आगरा में मूर्ति कला कार्यशालाः डॉ. अमरेश कुमार ने संवेदना और सृजन के संगम को किया उजागर

ललित कला संस्थान में जारी छह दिवसीय मूर्तिकला कार्यशाला के पांचवें दिन कला और जीवन का संगम देखने को मिला, जब विख्यात मूर्तिकार डॉ. अमरेश कुमार ने अपने अनुभवों, कलात्मक दृष्टिकोण और सृजन की संवेदनाओं को विद्यार्थियों के साथ साझा किया। उनका संवाद न केवल प्रेरणादायी रहा, बल्कि नवोदित कलाकारों के भीतर छिपे रचनात्मक बीजों को अंकुरित करने वाला साबित हुआ।

Oct 18, 2025 - 19:15
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आगरा में मूर्ति कला कार्यशालाः डॉ. अमरेश कुमार ने संवेदना और सृजन के संगम को किया उजागर
ललित कला संस्थान में चल रही मूर्तिकला कार्यशाला के पांचवें दिन छात्रों से संवाद करते विख्यात मूर्तिकार डॊ. अमरेश कुमार।

आगरा। ललित कला संस्थान की मूर्तिकला कार्यशाला का पांचवां दिन युवा कला साधकों के लिए यादगार रहा। इस अवसर पर प्रसिद्ध मूर्तिकार, शिक्षाविद और परफॉर्मेंस आर्टिस्ट डॉ. अमरेश कुमार ने कला – संवेदना और सृजन की प्रक्रिया विषय पर विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि कला केवल रूपांकन नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति है, जो अनुभवों से आकार लेती है।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. कुमार के स्लाइड शो से हुई, जिसमें उन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचनाएँ—स्टोन कार्विंग, टेराकोटा, सिरेमिक, मिक्स्ड मीडिया और परफॉर्मेंस आर्ट—प्रदर्शित कीं। हर कृति के माध्यम से उन्होंने बताया कि किस प्रकार हर कलाकार अपने परिवेश से प्रेरणा लेकर अपने सृजन का माध्यम चुनता है।

उन्होंने अपने प्रारंभिक कला-सफर को याद करते हुए कहा कि हर रचना के पीछे एक आत्मिक यात्रा होती है। समय के साथ अभिव्यक्ति बदलती है, लेकिन भाव का स्रोत वही रहता है। उनकी कृतियों में आधुनिकता के साथ पारंपरिक भारतीय सौंदर्यशास्त्र का अद्भुत संगम देखने को मिला।

छात्रों के सवाल और संवाद ने बढ़ाई कार्यशाला की गहराई

विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक उनसे प्रश्न पूछे। कला की प्रेरणा, माध्यम चयन, और रचना की आत्मा से जुड़े प्रश्नों पर उन्होंने सहज, गहरी और प्रायोगिक दृष्टि से उत्तर दिए। उन्होंने कहा, हर कलाकार को अपने भीतर झांकना चाहिए, क्योंकि कला बाहर नहीं, भीतर जन्म लेती है।

संस्थान परिवार का उत्साहपूर्ण सहयोग

कार्यक्रम के समापन पर सह-संरक्षक डॉ. मनोज कुमार और संयोजक डॉ. गणेश कुशवाह ने डॉ. अमरेश कुमार को धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर संस्थान के सभी शिक्षक—डॉ. शार्दूल मिश्रा, दीपक कुलश्रेष्ठ, देवेंद्र कुमार सिंह, डॉ. शीतल शर्मा, पारुल जुरैल, महिमा सिंह, डॉ. ममता बंसल, कुसुम यादव, नीरज और लक्ष्मी गौतम—सक्रिय रूप से उपस्थित रहे।

कार्यशाला में विद्यार्थियों ने कहा कि यह अनुभव उनके लिए एक प्रेरक मोड़ साबित होगा, जिसने कला के प्रति उनका दृष्टिकोण और गहराई दोनों बढ़ा दिए हैं।

SP_Singh AURGURU Editor