वृंदावन में उमड़ा आस्था का जनसागर, बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण की सनातन हिंदू एकता पदयात्रा का भव्य समापन
वृंदावन। धर्म, आस्था और सनातनी एकता की धारा को एक सूत्र में पिरोते हुए दिल्ली के छतरपुर से निकली सनातन हिंदू एकता पदयात्रा जब कान्हा की पावन नगरी वृंदावन पहुंची, तो पूरे मार्ग में उमड़ा जनसैलाब किसी ऐतिहासिक अध्याय से कम नहीं था। बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के आह्वान पर शुरू हुई यह यात्रा हर कदम पर बढ़ते उत्साह और अपार श्रद्धा की गवाही देती रही।
दिल्ली से वृंदावन तक आस्था, एकता और संकल्प की ऐतिहासिक यात्रा
संत–महंतों, प्रमुख हस्तियों और लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति बनी आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक
वृंदावन। धर्म, आस्था और सनातनी एकता की धारा को एक सूत्र में पिरोते हुए दिल्ली के छतरपुर से निकली सनातन हिंदू एकता पदयात्रा जब कान्हा की पावन नगरी वृंदावन पहुंची, तो पूरे मार्ग में उमड़ा जनसैलाब किसी ऐतिहासिक अध्याय से कम नहीं था। बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के आह्वान पर शुरू हुई यह यात्रा हर कदम पर बढ़ते उत्साह और अपार श्रद्धा की गवाही देती रही।
7 नवंबर को शुरू हुई यात्रा 13 नवंबर को ब्रज धरा पर पहुंची, जहां स्वागत के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ कई मिथकों को तोड़ती नजर आई। यात्रा का काफिला चलते-चलते जनज्वार में बदल गया। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री स्वयं पैरों के छालों की परवाह किए बिना हाथ में माइक लेकर पूरी यात्रा की अगुवाई करते रहे। कई किलोमीटर तक मार्ग पर केवल पदयात्रियों का हुजूम ही दिखाई दे रहा था।
गुप्ता रेजिडेंसी, छाता में रात्रि विश्राम के बाद शनिवार को सभा के साथ यात्रा आगे बढ़ी। सभा में सनातन एकता, गोमाता की रक्षा, यमुना शुद्धिकरण, ब्रज क्षेत्र को मांस–मदिरा मुक्त करने और श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण जैसे संकल्प दिलाए गए। पूरा वातावरण गूंज उठा “अरे हिंदुओं जागो रे”, “जो राम का नहीं, वह किसी काम का नहीं”, “जात–पात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई–भाई” जैसे नारों से।
रविवार को छटीकरा के चार धाम में भव्य समारोह के साथ यात्रा का समापन हुआ। मंच पर संत–महंतों की उपस्थिति में धर्मध्वजा ठाकुर बांकेबिहारी को अर्पित की गई। इस अवसर पर कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं, जिनमें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य, मुनि चिदानंद, गायक जुबिन नौटियाल अन्य संत, आचार्य और प्रतिष्ठित व्यक्तित्व शामिल थे।
पदयात्रा को देखते हुए मथुरा पुलिस प्रशासन ने रूट डायवर्जन किया तथा छटीकरा मार्ग पर वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी।
समारोह में जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने घोषणा की कि अगली पदयात्रा दिल्ली से कश्मीर तक निकाली जाएगी, जिससे कश्मीर को एक बार फिर भारत का स्वर्ग बनाने के संकल्प को नया स्वर मिल सके।
अपने संबोधन में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि इस पदयात्रा में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि मेरा हर सनातनी भाई इस मुहिम के साथ खड़ा है। यात्रा भले समाप्त हो रही हो, लेकिन यह आस्था यात्रा अब हर घर तक जाएगी। आने वाले समय में भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित कराने का लक्ष्य अवश्य पूरा होगा।
आचार्य मृदुल शास्त्री ने कहा कि वे अपने मंचों से सनातन की इस यात्रा का संदेश हर व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प लेते हैं।
इस ऐतिहासिक पदयात्रा ने ब्रजभूमि में न सिर्फ आस्था का महासागर बहाया, बल्कि सनातन संस्कृति की एकता, गरिमा और सामूहिक चेतना को एक नई ऊँचाई भी प्रदान की।