एनडीपीएस कोर्ट के विशेष लोक अभियोजक पर फर्जी हस्ताक्षर और वेतन गबन का गंभीर आरोप
आगरा की एनडीपीएस कोर्ट के विशेष लोक अभियोजक पर फर्जी हस्ताक्षर कर उपस्थिति दर्ज कराने और सरकारी वेतन लेने का आरोप लगा है। जून 2025 की उपस्थिति तालिका में जज के कूटरचित हस्ताक्षर दिखाने का दावा किया गया है। 16 जून को अदालत में गैरहाजिरी और 21 से 30 जून के अवकाश के बावजूद उपस्थिति दर्ज होने के आरोप हैं। एडवोकेट सत्यप्रकाश की शिकायत पर थाना न्यू आगरा में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
उपस्थिति रजिस्टर में कथित हेराफेरी से मचा हड़कंप
आगरा। आगरा की एनडीपीएस कोर्ट में तैनात विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) विनायक वशिष्ठ पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि अभियोजक ने फर्जी हस्ताक्षरों के सहारे अपनी उपस्थिति दर्शाकर सरकारी वेतन का अनुचित लाभ लिया। मामला सामने आने के बाद न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।
जून 2025 की उपस्थिति तालिका पर उठे सवाल
शिकायत के अनुसार, जून 2025 की उपस्थिति तालिका में अभियोजक की मौजूदगी दर्शाई गई है, जबकि उसमें न्यायाधीश के कूटरचित (फर्जी) हस्ताक्षर दिखाए जाने का दावा किया गया है। आरोप है कि यह हस्ताक्षर वास्तविक नहीं हैं और जानबूझकर लगाए गए।
16 जून को गैरहाजिरी, जमानत आदेश में भी उल्लेख
शिकायतकर्ता का कहना है कि 16 जून 2025 को संबंधित अभियोजक अदालत में उपस्थित नहीं थे। इतना ही नहीं, उसी दिन पारित एक जमानत आदेश में भी अभियोजक की गैरहाजिरी का स्पष्ट उल्लेख दर्ज है, जो उपस्थिति तालिका के दावों पर सवाल खड़े करता है।
अवकाश अवधि में भी दिखाई गई उपस्थिति
आरोपों में यह भी सामने आया है कि 21 से 30 जून के बीच अभियोजक अवकाश पर थे, इसके बावजूद उनकी उपस्थिति दर्ज की गई। इसे सीधे तौर पर सरकारी धन के गबन और नियमों की अनदेखी से जोड़कर देखा जा रहा है।
जांच पूरी होने तक पद से हटाने की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ता ने मांग की है कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए जांच पूरी होने तक अभियोजक को पद से हटाया जाए, ताकि साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका न रहे।
मुख्यमंत्री और उच्च अधिकारियों तक पहुंची शिकायत
इस पूरे मामले की शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, वरिष्ठ न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजी गई है, जिससे प्रकरण की उच्चस्तरीय निगरानी में जांच हो सके।
शिकायत पर मुकदमा दर्ज
यह मामला एडवोकेट सत्यप्रकाश की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायत के आधार पर थाना न्यू आगरा में अभियोजक के खिलाफ आपराधिक मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। पुलिस अब दस्तावेजों, उपस्थिति रजिस्टर और हस्ताक्षरों की फॉरेंसिक जांच की तैयारी में जुटी है।
न्यायिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर बहस
इस घटना ने एक बार फिर न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी तंत्र को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब सबकी निगाहें जांच के निष्कर्ष और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।