मरणोपरांत भी मानवता की सेवा: आशा जैन ने देहदान कर रचा चिकित्सा शिक्षा का अमर उदाहरण
आगरा। मानव सेवा की सच्ची मिसाल पेश करते हुए सेक्टर-16ए, आगरा निवासी 76 वर्षीय स्वर्गीय श्रीमती आशा जैन (चपलावत) धर्मपत्नी स्व. ज्ञानचंद जैन की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनका पार्थिव शरीर डॉक्टरों की पढ़ाई के लिए एसएन मेडिकल कॊलेज को दान कर दिया गया। उनके निधन के बाद मंगलवार को परिजनों ने हेल्प आगरा के सहयोग से उनका पार्थिव शरीर एस.एन. मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग को समर्पित किया। यह देहदान आने वाली पीढ़ियों के चिकित्सकों के प्रशिक्षण में उपयोगी होगा और समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।

एसएन मेडिकल कॊलेज में देहदान की प्रक्रिया पूरी करते परिजन।
देहदानी आशा जैन, हेल्प आगरा के संस्थापक सदस्य मुकेश जैन की चाची थीं। उनके निवास से पार्थिव शरीर को फूलों से सजी हेल्प आगरा की एंबुलेंस द्वारा श्रद्धापूर्वक शवयात्रा के रूप में एस.एन. मेडिकल कॉलेज लाया गया। वहां प्रधानाचार्य डॉ. प्रशान्त गुप्ता की उपस्थिति में एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप को पार्थिव शरीर सौंपा गया।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य डॉ. प्रशान्त गुप्ता ने चिकित्सा शिक्षा में देहदान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि डॉक्टरों के प्रशिक्षण के लिए मृत शरीर की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और देहदान एक महान पुण्य कार्य है। उन्होंने इस उदार पहल के लिए चपलावत परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
देहदान कार्यक्रम के दौरान आशा जैन के पुत्र प्रकाश जैन, पुत्री सुधा छाजेड़ सहित चपलावत परिवार के अनेक महिला-पुरुष उपस्थित रहे। साथ ही नरेश जैन, तनय जैन, अतुल जैन, प्रशान्त जैन भी मौजूद रहे।
हेल्प आगरा की ओर से अध्यक्ष सुरेंद्र जैन, महासचिव गौतम सेठ, राजीव गुप्ता, नंदकिशोर गोयल तथा जगवीर सिंह की उपस्थिति में पूरे कार्यक्रम को गरिमामय ढंग से सम्पन्न कराया गया।
स्वर्गीय आशा जैन का यह निर्णय यह संदेश देता है कि मृत्यु के बाद भी जीवन को दिशा दी जा सकती है। उनका देहदान चिकित्सा विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए वरदान और समाज के लिए अनुकरणीय आदर्श है।