आगरा में बेरोजगार युवाओं को विदेश भेजने के नाम पर ठगने वाले गिरोह के सात सदस्य गिरफ्तार

आगरा। बेरोज़गार युवाओं को विदेश में त्वरित नियुक्ति का लालच देकर ठगी करने वाले संगठित गिरोह का हरीपर्वत थाना पुलिस और साइबर प्रकोष्ठ ने भंडाफोड़ किया है। गिरोह सोशल मीडिया मंचों पर चमकदार विज्ञापन डालकर उमीदवारों से संपर्क साधता, फिर वीज़ा प्रक्रिया और दस्तावेज़ सत्यापन के नाम पर भारी वसूली करता था। पुलिस ने दबिश देकर सात आरोपियों को पकड़ा है। मुख्य आरोपी अंकित गुप्ता फर्जी रोज़गार केंद्र चलाकर पूरे नेटवर्क का संचालन करता था।

Sep 5, 2025 - 16:01
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आगरा में बेरोजगार युवाओं को विदेश भेजने के नाम पर ठगने वाले गिरोह के सात सदस्य गिरफ्तार
बेरोजगारों को विदेश भेजने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करने वाली पुलिस टीम।

-हरीपर्वत थाना पुलिस साइबर प्रकोष्ठ की संयुक्त कार्रवाई में नकली इलेक्ट्रॉनिक वीज़ा (ई-वीज़ा), कॉल लेटर, नियुक्ति-पत्र भी बरामद

टीम को मौके से नकली इलेक्ट्रॉनिक वीज़ा (ई-वीज़ा), सरकारी दस्तावेज़, बुलावा-पत्र (कॉल लेटर), नियुक्ति-पत्र, बहुराष्ट्रीय कंपनियों की तरह बनाए गए छद्म लेटरहेड, मुहरें और कई मोबाइल-सिम मिले हैं।

संजय प्लेस में था ऒफिस

पकड़े गये शातिरों ने संजय प्लेस के सत्यम कांप्लेक्स में एसआई ओवरसीज के नाम से एक कंपनी बनाई हुई थी। ये सोशल मीडिया के जरिए विदेश में नौकरी दिलवाने के लिए प्रचार करते थे। विदेश में नौकरी की चाहत रखने वाले लोग इनके नंबर पर कॉल करते थे।

युवाओं को भरोसा दिलाने के लिए कंपनियों के फर्जी नाम होली इंटरनेशनल, जयां इंटरनेशनल, प्राउड इंटरनेशनल, सी ओवरसीज, मोन ओवरसीज, ओमेक्स इंटरनेशनल के नाम बताते थे। अपने आफिस का एड्रेस भी देते थे। आफिस में फीमेल स्टाफ भी रखा हुआ था। जब कोई वहां पहुंचता था तो उसे इन लोगों को लेकर विश्वास हो जाता था।

अंकित मास्टर माइंड, छह अन्य के बारे में भी जानिए

गैंग में पकडे़ गए लोगों में अंकित गुप्ता गैंग का मास्टर माइंड है। वो पहले भी इस मामले में पकड़ा जा चुका है। दिल्ली में उसके खिलाफ केस दर्ज है। अंकित ने बताया कि गैंग के नवनीत जैन व हेमन्त शर्मा फर्जी ऑफर लेटर, वीजा बनाते थे। विजय कुमार, राजेश शर्मा व विशाल मेहता कॉलिंग करते थे।

कार्रवाई की रूपरेखा

डीसीपी सिटी सोनम कुमार को इस गिरोह के बारे में शिकायत मिली थी। उन्हीं के आदेश पर एडीसीपी आदित्य कुमार और एसीपी हरीपर्वत के नेतृत्व में विशेष टीम गठित हुई। तकनीकी निगरानी और मानवीय ख़ुफ़िया के आधार पर की गई छापेमारी में गिरोह के लोग रंगे हाथ पकड़े गए। उप निरीक्षक प्रशांत सिंह और मोहित कुमार की कार्रवाई में प्रमुख भूमिका रही। पूरा मामला थाना हरीपर्वत क्षेत्र का है।

ठगी का तरीकाः गिरोह ऐसे फंसाता था शिकार

चमकदार विज्ञापन: सोशल मीडिया पर विदेश में उच्च वेतन पर जॊब, तुरंत जॉइनिंग, वीज़ा सुनिश्चित जैसे प्रलोभन भरे विज्ञापन।

पहला संपर्क: इच्छुक अभ्यर्थियों से चैट/फ़ोन पर बात कर दस्तावेज़ जांच और प्रोफ़ाइल शॉर्टलिस्टिंग के नाम पर प्रारम्भिक राशि।

फर्जी काग़ज़ात की सप्लाई: बनावटी बुलावा-पत्र और नियुक्ति-पत्र भेजकर भरोसा जगाना; दूतावास जैसे दिखाई देने वाले नकली ई-वीज़ा जारी करना।

अंतिम वसूली: टिकट, बीमा, चिकित्सा जांच, सत्यापन शुल्क आदि के नाम पर मोटी रकम ऐंठना।

ठिकाने की आड़: फर्जी/काल्पनिक पहचान पर किरायानामा कर ऑफिस चलाना, बार-बार ठिकाना बदलना ताकि पहचान न हो सके।

ये-ये नकली दस्तावेज और सामान बरामद

नकली इलेक्ट्रॉनिक वीज़ा (ई-वीज़ा) के प्रिंटआउट और डिजिटल टेम्पलेट्स।

विभिन्न देशों के नाम से मिलते-जुलते नियुक्ति-पत्र और बुलावा-पत्र।

कई सरकारी दस्तावेज़ों की नक़ल, मुहरें, लेटरहेड।

बहु-संचार के लिए मोबाइल फ़ोन, सिम कार्ड, लैपटॉप/प्रिंटर।

किरायानामा और फर्जी पहचान-पत्र, जिनके सहारे ऑफिस संचालित होता था।

नेटवर्क की पहुंच और वर्तमान स्थिति

प्रारम्भिक पूछताछ में सामने आया कि गिरोह का जाल कई राज्यों तक फैला हो सकता है। पुलिस अब तक ठगा गए लोगों की पहचान कर रही है और लेन-देन के डिजिटल साक्ष्य खंगाले जा रहे हैं। बरामद उपकरणों की फ़ॉरेंसिक जांच कराई जाएगी, ताकि पीड़ितों की सूची और लेन-देन का विवरण पुख्ता हो सके।

बेरोजगारों को बनाते थे निशाना

गिरोह का मुख्य लक्ष्य बेरोज़गार युवा और विदेश में रोज़गार के इच्छुक अभ्यर्थी थे। तेज़ प्रक्रिया, उच्च वेतन, रिहाइश और भोजन मुफ़्त जैसी शर्तें दिखाकर भरोसा जीतते और चरण-बद्ध तरीके से रकम वसूलते थे।

पुलिस की अपील

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि विदेश में रोज़गार संबंधी किसी प्रस्ताव पर दूतावास/अधिकृत एजेंसी की वेबसाइट से स्वतंत्र सत्यापन अवश्य करें। किसी भी अनजान खाते में अग्रिम भुगतान न करें; जाँच-पड़ताल के बाद ही औपचारिक प्रक्रिया अपनाएं। यदि आपने ऐसे किसी गिरोह को पैसे दिए हैं या संदिग्ध दस्तावेज़ प्राप्त किए हैं, तो संबंधित थाने पर संपर्क कर सूचना दें।

SP_Singh AURGURU Editor