शाहजहांपुर: सात साल की मासूम से दुष्कर्म और बहन की हत्या मामले में आरोपी को फांसी की सजा

-राजीव शर्मा- शाहजहांपुर। जिले की पॉक्सो न्यायालय ने पांच वर्ष पुराने एक निर्मम अपराध में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी अनिल उर्फ चमेली को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने आदेश दिया कि दोषी को तब तक फांसी के फंदे से लटकाया जाए जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए। साथ ही उस पर एक लाख 37 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

Nov 1, 2025 - 13:58
 0
शाहजहांपुर: सात साल की मासूम से दुष्कर्म और बहन की हत्या मामले में आरोपी को फांसी की सजा

बिस्किट के लालच में मासूमों को खेत में ले गया था दरिंदा

यह हृदय विदारक घटना 22 फरवरी 2021 की है। थाना कांट क्षेत्र के एक गांव में सात और पांच वर्षीय दो बहनें प्राथमिक विद्यालय में गई हुई थीं। यहीं से आरोपी अनिल उर्फ चमेली उन्हें बिस्किट और शहद का लालच देकर गांव से दूर खेतों में ले गया।
आरोप है कि उसने बड़ी बहन के साथ दुष्कर्म किया और जब उसने विरोध किया तो उसके सिर पर खंते (लोहे के नुकीले औजार) से वार कर घायल कर दिया। पांच साल की छोटी बहन की उसने निर्दयतापूर्वक हत्या कर दी।

जब दोनों बच्चियां देर शाम तक घर नहीं लौटीं, तो परिवारजन और ग्रामीण उनकी खोज में निकल पड़े। तलाश के दौरान गांव के बाहर छोटी बहन का शव मिला, जबकि 100 मीटर दूर सरसों के खेत में बड़ी बहन घायल अवस्था में पड़ी मिली, जिसकी सांसें चल रही थीं। घायल बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पुलिस ने उसके बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

जज ने कहा- ऐसे अपराधी को समाज में जीने का अधिकार नहीं

विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिद्धू की अदालत में चले इस मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने ठोस सबूत और गवाही प्रस्तुत की। अपराध की निर्ममता और पीड़ित की उम्र को देखते हुए अदालत ने कहा कि यह अपराध समाज की आत्मा को झकझोर देने वाला है, ऐसे अपराधी को समाज में जीने का कोई अधिकार नहीं।
इसके बाद अदालत ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई और आदेश में लिखा कि दोषी अनिल उर्फ चमेली को तब तक फांसी पर लटकाया जाए जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए।

अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) रजनीश कुमार मिश्रा ने बताया कि यह मुकदमा थाना कांट में 23 फरवरी 2021 को दर्ज हुआ था। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, चिकित्सकीय रिपोर्ट और डीएनए साक्ष्य के आधार पर अपराध सिद्ध किया। न्यायालय ने त्वरित सुनवाई कर दोषी को कठोरतम सजा दी है।

यह फैसला उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद का प्रतीक है जो वर्षों से अदालतों में न्याय की आस लगाए बैठे हैं। शाहजहांपुर की अदालत ने यह संदेश दिया है कि निर्दोषों पर अत्याचार करने वाले को कानून माफ नहीं करेगा, चाहे न्याय में कितना भी वक्त क्यों न लगे, न्याय अवश्य मिलेगा।

SP_Singh AURGURU Editor