शाहजहांपुर में जूते में भरकर पेशाब पिलाने का आरोप, पुलिस ने बताया ‘झूठा’: पीड़ित अस्पताल में भर्ती
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में मानव गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले एक कथित मामले ने सनसनी फैला दी है। पिछड़ी जाति के एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि गांव के प्रधान पिता ने मामूली विवाद के बाद उसे जूते में पेशाब भरकर पिलाने जैसा अपमानजनक कृत्य किया। वहीं पुलिस ने घटना को पूरी तरह फर्जी बताते हुए कहा कि तथ्यों की जांच में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। घटना के वीडियो और बयान वायरल होने से गांव में तनाव का माहौल है।
-राजीव शर्मा-
शाहजहांपुर। सामाजिक गरिमा और जातीय सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले आरोपों के बीच शाहजहांपुर जिले के परौर के हरिद्वारा गांव में तनाव फैल गया है। थाना परौर क्षेत्र के इस गांव के एक व्यक्ति ने ग्राम प्रधान के पिता पर ऐसा आरोप लगाया है, जिसने लोगों को स्तब्ध कर दिया। पीड़ित का दावा है कि गायों को लेकर हुए विवाद के बाद उसे जूते में भरकर पेशाब पिलाया गया, जबकि पुलिस ने इसे मनगढंत बताया है।
पुलिस अधीक्षक राजेश द्विवेदी के मुताबिक, घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्राधिकारी जलालाबाद को गांव भेजा गया। उन्होंने गांव में जाकर जांच की और पाया कि पेशाब पिलाने का आरोप झूठा है। जांच अधिकारी ने ग्रामीणों से भी पूछताछ की, जिन्होंने इस तरह की घटना होने से इनकार किया है।
वहीं दूसरी ओर, पीड़ित इस समय राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती है। पीड़ित ने दावा किया कि ग्राम प्रधान के पिता की गायें गौशाला से निकलकर उसके घर में घुस गईं थीं, जिसका उसने विरोध किया तो प्रधान के पिता ने धमकाते हुए कहा कि बताओ, अभी मारें या कल मारें?
पीड़ित का कहना है कि अगले दिन वह अपनी पत्नी के साथ खेत में काम कर रहा था कि तभी प्रधान के पिता 5-6 लोगों के साथ आये और ये लोग उसे बुरी तरह पीटने लगे। यही नहीं, उसने आरोप लगाया कि मारपीट के बाद उसके साथ जूते में भरकर पेशाब पिलाने जैसा घिनौना काम किया गया। पीड़ित के शरीर पर मारपीट के निशान मौजूद हैं और वह इलाजरत है।
घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें पीड़ित की पत्नी पत्रकारों को पूरी कहानी सुनाती दिखाई दे रही है। वहीं पुलिस का कहना है कि जब वे घटना के बाद गांव पहुंचे, तो पीड़ित की पत्नी के बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई, जिसमें उसने केवल विवाद की बात कही, पेशाब पिलाने जैसा कोई आरोप नहीं लगाया।
घटना ने न केवल जातीय संवेदनाओं को झकझोरा है, बल्कि पुलिस और पीड़ित के बयानों के विरोधाभास ने पूरे मामले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना की सच्चाई पर अब इलाके की जनता जुबानी जंग लड़ रही है।