अजित पवार के विलय संबंधी अधूरे संकल्प पर शरद पवार की स्वीकारोक्ति, दूसरी ओर सत्ता की हड़बड़ी, क्या एनसीपी का विलय अब सिर्फ एक भावनात्मक अध्याय रह गया है?

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति इस समय शोक, संवेदना और सत्ता, तीनों के चौराहे पर खड़ी दिखाई दे रही है। डिप्टी सीएम अजित पवार की विमान हादसे में आकस्मिक मृत्यु के बाद जिस एक प्रश्न ने सबसे अधिक जोर पकड़ा, वह था, क्या राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों धड़े एक बार फिर एक होंगे? अब इस बहस को खुद पार्टी संस्थापक शरद पवार के बयान ने नई धार दे दी है। शरद पवार ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि अजित पवार दोनों गुटों के विलय के पक्षधर थे और यह प्रक्रिया लगभग तय मानी जा रही थी।

Jan 31, 2026 - 19:12
Jan 31, 2026 - 19:16
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अजित पवार के विलय संबंधी अधूरे संकल्प पर शरद पवार की स्वीकारोक्ति, दूसरी ओर सत्ता की हड़बड़ी, क्या एनसीपी का विलय अब सिर्फ एक भावनात्मक अध्याय रह गया है?

शरद पवार के अनुसार, शशिकांत शिंदे और जयंत पाटिल के जरिए दोनों गुटों के बीच बातचीत शुरू हो चुकी थी और 12 फरवरी को इसकी औपचारिक घोषणा की तैयारी थी। इसी कड़ी में 17 जनवरी को बारामती में शरद पवार और अजित पवार की एक अहम बैठक भी हुई थी, जिसका वीडियो अब सामने आया है। यह वीडियो उन चर्चाओं को बल देता है कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर परिवार और पार्टी, दोनों को एक सूत्र में पिरोने की कोशिश चल रही थी। लेकिन नियति ने बीच में हस्तक्षेप किया और यह अध्याय अधूरा रह गया।

इधर, अजित पवार के निधन के साथ ही एनसीपी (अजित पवार गुट) की प्राथमिकताएं तेजी से बदलती दिखीं। पार्टी नेतृत्व का ध्यान विलय से अधिक राज्य सरकार में अपनी पुरानी राजनीतिक हैसियत को सुरक्षित रखने पर केंद्रित हो गया। रिक्त हुए डिप्टी सीएम पद पर सुनेत्रा पवार को आगे बढ़ाने की कवायद शुरू हो गई। पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, सुनील तटकरे ने न सिर्फ सुनेत्रा पवार से मुलाकात की, बल्कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलकर अजित पवार के पास रहे विभागों पर भी दावा ठोक दिया। यही नहीं, शनिवार को सुनेत्रा पवार ने महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम पद की शपथ भी ले ली। 

दिलचस्प यह है कि जहां एक ओर सत्ता की राजनीति तेजी से आगे बढ़ी, वहीं दूसरी ओर पारिवारिक स्तर पर एकजुटता की कोशिशें भी चलती रहीं। शनिवार को बारामती स्थित शरद पवार के आवास पर पवार परिवार की बैठक हुई, जिसमें सुप्रिया सुले, रोहित पवार और युगेंद्र पवार मौजूद रहे। हालांकि, इस बैठक में अजित पवार की पत्नी या पुत्रों की मौजूदगी की पुष्टि नहीं हुई। यह अनुपस्थिति भी कई राजनीतिक संकेत छोड़ जाती है।

शरद पवार की स्वीकारोक्ति के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अजित पवार के बिना विलय संभव है? माना जा रहा है कि अजित पवार जीवित रहते तो शरद पवार पार्टी की बागडोर धीरे-धीरे उनके हाथों में सौंपने को तैयार थे। उम्र और सक्रिय राजनीति की सीमाओं को समझते हुए शरद पवार की अपेक्षा संभवतः इतनी ही होती कि सुप्रिया सुले और परिवार के अन्य युवा चेहरों को सम्मानजनक भूमिका मिलती रहे। अजित पवार और सुप्रिया सुले के मजबूत पारिवारिक रिश्ते इस समझौते की मजबूत जमीन बन सकते थे।

लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। अजित पवार के साथ ही विलय की शर्तें, भरोसे और संतुलन भी कहीं खो से गए हैं। वर्तमान हालात यह संकेत दे रहे हैं कि एनसीपी (अजित पवार गुट) पहले सत्ता में अपनी स्थिति मजबूत करेगा, उसके बाद ही किसी विलय या पुनर्एकता पर गंभीरता से विचार होगा। ऐसे में, शरद पवार की इच्छा और अजित पवार का सपना, दोनों फिलहाल राजनीतिक अनिश्चितता के धुंध में घिरे नजर आते हैं।

SP_Singh AURGURU Editor