शारदीय नवरात्र प्रारंभ, तृतीया दो दिन होने से दस दिन होगी मां की पूजा
शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर 2025 से शुरू होकर 2 अक्टूबर विजयदशमी तक चलेंगी। तृतीया तिथि वृद्धि से नवरात्र 10 दिन के रहेंगे। अष्टमी 30 सितंबर, नवमी 1 अक्टूबर रहेगी। इस बार मां भगवती हाथी पर सवार होकर आएंगी, जो अत्यंत शुभ और समृद्धि दायक माना गया है।
-दैवज्ञ पं. बृज मोहन दीक्षित-
शारदीय नवरात्रि आज (22 सितंबर 2025 से) प्रारंभ हो चुके हैं। खास बात ये है कि इस बार नवरात्र में दस दिन माता की पूजा होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि नवरात्र का तृतीया दो दिन यानि 24 और सितम्बर) को मनाया जाएगा। इस बार अष्टमी 30 सितंबर, नवमी 1 अक्टूबर तथा विजयदशमी 2 अक्टूबर को रहेगी।
दैवज्ञ पंडित बृज मोहन दीक्षित ने बताया कि तृतीया तिथि में वृद्धि होने की वजह से ही नवदुर्गा 10 दिवसीय रहेंगे। मां भगवती इस बार हाथी पर सवार होकर विराजमान होंगी, जो अत्यंत शुभ संकेत है। इसका अर्थ है कि देश में सुख-समृद्धि और खुशहाली का संचार होगा, कृषि के क्षेत्र में उन्नति होगी तथा चारों ओर शुभ वातावरण रहेगा। मां का प्रस्थान नौका पर होगा।
घट स्थापना के शुभ मुहूर्त
सोमवार, अश्विन शुक्ल प्रतिपदा को घट स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। स्थिर लग्न वृश्चिक में प्रातः 10:19 बजे से मध्याह्न 12:37 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त में प्रातः 11:47 बजे से 12:35 बजे तक तथा चौघड़िया के अनुसार अमृत प्रातः 06:07 से 07:38 बजे तक और शुभ प्रातः 09:09 से 10:40 बजे तक घट स्थापना का शुभ समय है। इन सभी मुहूर्तों में से किसी भी समय घट स्थापना की जा सकती है। राहुकाल प्रातः 07:30 से 09:00 बजे तक रहेगा। नक्षत्र की दृष्टि से प्रातः 11:24 बजे तक उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र तथा इसके बाद हस्त नक्षत्र रहेगा। इस दिन सूर्य और चंद्र दोनों ही कन्या राशि में स्थित रहेंगे।
ऐसे करें मां भगवती की स्थापना
ईशान कोण या पश्चिम दिशा में चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर भगवती की स्थापना करनी चाहिए। पूजा में लाल कनेर, गुड़हल, गुलाब आदि पुष्पों का अर्पण करें। मिष्ठान अर्पित करें। दीपक में गाय के घी और तिल के तेल का प्रयोग करें। घी का दीपक बाएं हाथ की ओर और तेल का दीपक दाएं हाथ की ओर रखें। साथ ही बटुक भैरव की पूजा करें और उर्द की दाल के पकौड़े का भोग लगाएं। शुद्ध मिट्टी पर जौ बोकर उस पर घट रखें। घट पर वस्त्र चढ़ाकर ऊपर नारियल रखें और गंगाजल तथा अन्य तीर्थों का जल भरकर उसमें सभी देवताओं का आवाहन करें।
इसके साथ ही नवदुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करें और भगवती से प्रार्थना करें कि वे हमारे मन के शत्रुओं काम, क्रोध, मद, लोभ और मत्सर का विनाश करें, आत्मोन्नति प्रदान करें और मनोकामना पूर्ण करें। श्रद्धालु चाहें तो दुर्गा सप्तशती का संस्कृत या हिंदी में पाठ कर सकते हैं।
विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए निम्न मंत्रों का जाप फलदायी रहेगा—
सभी प्रकार की बाधा मुक्ति के लिए
“ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्यः सुतान्वितः।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥”
पत्नी प्राप्ति हेतु
“पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥”
आरोग्य व सौभाग्य के लिए
“देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि॥”
देवी की प्रसन्नता के लिए
“प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि।
त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव॥”
धन प्राप्ति के लिए
“कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्।
पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्॥”
इन मंत्रों के साथ नवार्ण मंत्र “ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे” का जाप अवश्य करें। इससे मां की विशेष कृपा प्राप्त होगी और समस्त संकटों से मुक्ति मिलेगी।