श्रीजगन्नाथजी रथयात्राः सतरंगी रथ पर सवार होकर श्रीहरि ने किया नगर भ्रमण, श्रद्धा से सराबोर हुआ आगरा
आगरा। जब श्रीजगन्नाथ भगवान अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नंदीघोष रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण को निकले, तब आगरा की सड़कें भक्ति की भावधारा से भर उठीं। इस्कॊन के बैनर तले बल्केश्वर महालक्ष्मी मंदिर से आरंभ हुई रथयात्रा का प्रत्येक दृश्य आध्यात्मिक उल्लास का प्रतीक बन गया। जैसे ही रथ पर विराजित भगवान के पट खुले, हर ओर हरे कृष्ण, हरे राम के कीर्तन और शंखनाद गूंजने लगे। श्रद्धालु हाथ ऊपर उठाकर नाचने-झूमने लगे और नगरजनों की आंखों में प्रभु दर्शन की दिव्यता उतर आई।
श्रद्धालुओं की भीड़, दंडवत प्रणाम और रस्सी को छूने की होड़
रथयात्रा में नृत्य करती एक विदेशी श्रद्धालु महिला।
रथ की रस्सी खींचने को भक्तों में अपार उत्साह दिखा। मार्ग में सैकड़ों श्रद्धालु दंडवत हो भगवान की वंदना करते नज़र आए। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी खींचना जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। इसीलिए रस्सी छोटी पड़ गई और श्रद्धालु असंख्य थे। अनेक श्रद्धालु रथ मार्ग को झाड़ू लगाकर शुद्ध करते और रंगोली से सजाते हुए प्रभु की अगवानी करते दिखे।
भक्ति के रंग में रंगा हर कोना, पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत
रथयात्रा में उमड़ा अपार जनसमुदाय।
पूरे नगर में रथयात्रा के स्वागत हेतु लोगों ने अपने घरों और प्रतिष्ठानों के बाहर पुष्पवर्षा की, थालों में आरती सजाई और प्रभु की झलक पाने के लिए शीश झुकाए खड़े रहे। घरों के भीतर से लेकर सड़कों के किनारे तक लोग इंतज़ार करते दिखे कि प्रभु के दर्शन हों और वे आरती उतारें। वातावरण पूरी तरह धार्मिक था।
वृन्दावन इस्कॉन और आगरा इस्कॉन ने की प्रथम आरती
रथयात्रा का शुभारंभ वृन्दावन इस्कॉन के हरिविजय प्रभु एवं आगरा इस्कॉन के अध्यक्ष अरविद प्रभु द्वारा की गई प्रथम आरती से हुआ। श्रद्धालुओं ने नाचते-गाते रथ की रस्सी खींचकर प्रभु को नगर भ्रमण कराते हुए पुनः मंदिर तक पहुंचाया। यह अद्भुत रथयात्रा हर भक्त के लिए अविस्मरणीय रही।
केन्द्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने लगाई सेवा में झाड़ू
केन्द्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने भी रथयात्रा मार्ग में झाड़ू लगाकर सेवा का सौभाग्य प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि जो लोग पुरी जाकर रथयात्रा में भाग नहीं ले सकते, वे अपने शहर में इस पुण्य अवसर का लाभ उठा सकते हैं। इस सेवा में उनके साथ नितेश अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, सुशील अग्रवाल, आशु मित्तल, नवीन सिंघल, संजय कुकरैजा, अनूप अग्रवाल, रमेश यादव, दिनेश अग्रवाल, शैलेश बंसल, विभु सिंघल, राजेश उपाध्याय, ओमप्रकाश अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, राजीव मल्होत्रा, प्रदीप बंसल, सूरज, शाश्वत नंदलाल, ज्योति बंसल सहित कई श्रद्धालु सहभागी बने।
प्रभुपाद जी और चैतन्यमहाप्रभु की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र
रथयात्रा में प्रभुपाद जी, राधा-कृष्ण एवं चैतन्यमहाप्रभु की जीवंत झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। घोड़ों और ऊंटों की अगुवाई में ध्वजों के साथ निकली रथयात्रा में महिलाएं गोपी वेश और पुरुष ग्वाले के भेष में शामिल हुए। प्रत्येक भक्त के गले में तुलसी माला और माथे पर तिलक शोभायमान था। कई श्रद्धालु अपने घरों से सजे-धजे लड्डू गोपाल को भी रथयात्रा में लेकर आए।
वृन्दावन श्रंगार में राजसी भेष में श्रीहरि का मनोहारी रूप
माधव प्रभु द्वारा भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का वृन्दावन का चंदुआ श्रंगार किया गया। नाथद्वारा के कारीगरों द्वारा तैयार जर्किन और स्वर्ण तारों से सजे नीले परिधान प्रभु के विराट स्वरूप को दर्शा रहे थे। श्रंगार लगभग 25 किलो वजनी था, जिसमें कदम्ब, मालती, मोगरा, बैजयन्ती जैसे पुष्पों का विशेष उपयोग हुआ। रथ को एंथोरियम, अमेरिकन गुलाब, बेला जैसे पांच कुंतल फूलों से सजाया गया, जो उनकी पहचान और दिव्यता का प्रतीक बन गया।