हरे कृष्णा संकीर्तन से गूंजा श्रीजगन्नाथ मंदिरः नित्यानन्द त्रयोदशी महोत्सव पर उमड़ा भक्ति का सागर
आगरा। चैतन्य महाप्रभु की आज्ञा से घर-घर हरे कृष्णा… हरे राम महामंत्र का प्रचार करने वाले नित्यानन्द प्रभु की जयन्ती शनिवार को कमला नगर स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर (इस्कॉन) में नित्यानन्द त्रयोदशी महामहोत्सव के रूप में अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाई गई। संपूर्ण मंदिर परिसर हरे कृष्णा… हरे कृष्णा के संकीर्तन से गूंज उठा और भक्तजन भक्ति रस में डूबे नजर आए।
मान्यता है कि नित्यानन्द प्रभु की कृपा के बिना न तो वृन्दावन वास संभव है और न ही राधा-कृष्ण की शुद्ध भक्ति की प्राप्ति। इसी भाव के साथ श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा-अर्चना कर नित्यानन्द प्रभु से कृपा और भक्ति का आशीर्वाद मांगा।
इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष अरविन्द प्रभु ने नित्यानन्द प्रभु की दिव्य कथा सुनाते हुए कहा कि द्वापर युग में भगवान बलराम के स्वरूप में श्रीकृष्ण के साथ अवतरित होने के बाद, लगभग 550 वर्ष पूर्व नित्यानन्द प्रभु ने श्रीचैतन्य महाप्रभु के साथ पुनः अवतार लिया। वे परम करुणामय थे और बिना भेदभाव के सभी पर कृपा करते थे।
उन्होंने बताया कि चैतन्य महाप्रभु के संकीर्तन आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य नित्यानन्द प्रभु ने घर-घर जाकर किया। वे सभी से यही कहते थे- भजो कृष्णा, कहो कृष्णा, करो कृष्णा शिक्षा। नित्यानन्द प्रभु की कृपा के बिना किसी को भी वृन्दावन वास और राधा-कृष्ण भक्ति प्राप्त नहीं हो सकती। आज का जाग्रत वृन्दावन, जो लगभग 500 वर्ष पूर्व लुप्तप्राय था, उसे पुनर्जीवित करने का श्रेय भी नित्यानन्द प्रभु और चैतन्य महाप्रभु को ही जाता है।
महामहोत्सव के अवसर पर भगवान जगन्नाथ को विशेष रूप से नीले और पीले रंग की दिव्य पोशाक में श्रृंगारित किया गया। नित्यानन्द प्रभु एवं चैतन्य महाप्रभु का पंचामृत और पंचगव्य से भव्य अभिषेक किया गया। पूरे दिन भजन, कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन का वातावरण भक्तों को आध्यात्मिक आनंद से भरता रहा।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से नितेश अग्रवाल, सुनील मनचंदानी, सुशील अग्रवाल, नवीन सिंघल, शैलेश बंसल, ओमप्रकाश अग्रवाल, राजीव मल्होत्रा, शाश्वत नन्दलाल, आशु मित्तल, ज्योति बंसल, विश्वास, चिराग सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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