श्रीमद् भागवत कथाः गिरिराज की गोद में सिमटा ब्रज, गौ–धरा–वन की महिमा से गूंजा आकाश

आगरा। जब इंद्र के अभिमान से ब्रज पर विपत्ति के घनघोर मेघ छा गए, तब नन्हे कन्हैया ने अपनी कोमल कानी उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर ब्रज को छैयां दी। गिरिराज की दिव्य छत्रछाया में गौएं, ग्वाल-बाल, माताएं और समूचा ब्रज निर्भय हो उठा। समाधि पार्क मंदिर, सूर्य नगर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में मंगलवार को गोवर्धन लीला के भावपूर्ण वर्णन ने श्रद्धालुओं के हृदय में ब्रज-रस, प्रकृति प्रेम और गोसेवा का अलौकिक भाव भर दिया।

Dec 30, 2025 - 21:06
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श्रीमद् भागवत कथाः गिरिराज की गोद में सिमटा ब्रज, गौ–धरा–वन की महिमा से गूंजा आकाश
समाधि पार्क मंदिर, सूर्य नगर में श्रीमद् भागवत कथा में मंगलवार को गोवर्धन लीला का भावनात्मक ब्रज शैली में वर्णन करतीं कथा व्यास श्री कीर्ति किशोरी जी एवं श्री गिरिराज जी पूजन का दृश्य।

प्रारंभ में केशव दत्त गुप्ता, बसंत गुप्ता, डॉ. तरुण शर्मा, प्रमोद सिंघल, मुख्य संरक्षक अजय अग्रवाल (बीएन ग्रुप), संयोजक उमेश बंसल बालाजी एवं मनोज अग्रवाल (पोली भाई) ने विधिवत व्यास पीठ की आरती उतारकर प्रभु चरणों में श्रद्धा अर्पित की। इसके पश्चात मुख्य यजमान संजय–संगीता गुप्ता एवं रोहित जैन द्वारा व्यास पूजन किया गया।

कथा व्यास कीर्ति किशोरी (श्रीधाम वृन्दावन) ने भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी, दामोदर लीला, कालिया मर्दन एवं विशेष रूप से गोवर्धन लीला का अत्यंत सरस, भावनात्मक और ब्रज शैली में वर्णन किया। उन्होंने कहा कि माखन चोरी लीला में श्रीकृष्ण भक्तों के हृदय का माखन चुराते हैं, जबकि दामोदर लीला यह संदेश देती है कि भगवान प्रेम की रस्सी से ही बंधते हैं।

कालिया मर्दन लीला के प्रसंग में कथा व्यास ने कहा कि श्रीकृष्ण केवल भक्तों के रक्षक ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जल स्रोतों के संरक्षक भी हैं। यमुना को विषमुक्त करना आज के युग में पर्यावरण संरक्षण का गूढ़ संदेश देता है।
गोवर्धन लीला के वर्णन के साथ ही कथा पंडाल मानो ब्रजधाम में परिवर्तित हो गया। कथा व्यास ने कहा कि श्रीकृष्ण ने इंद्र पूजा का निषेध कर यह स्पष्ट किया कि गाय, पर्वत, वन, जल और धरती ही जीवन के आधार हैं। प्रकृति का पूजन ही सच्ची पूजा है। इंद्र का अभिमान टूटता है और गिरिराज महाराज की महिमा ब्रज में प्रतिष्ठित होती है।

गोवर्धन लीला के उपरांत श्रद्धा एवं भक्ति भाव से श्री गिरिराज जी पूजन, छप्पन भोग अर्पण तथा अन्नकूट महाप्रसादी का आयोजन किया गया। गिरिराज महाराज की जय के जयकारों से वातावरण भक्तिरस में सराबोर हो उठा।

कथा में बुधवार को महारास लीला एवं श्री रुक्मणि–कृष्ण विवाह के दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया जाएगा।

SP_Singh AURGURU Editor