सोशल मीडिया का साइड इफेक्ट! परिवारों में बढ़ रहे झगड़े, भरोसा टूट रहा, रिश्तों पर मंडरा रहा संकट : बरेली कॉलेज के समाजशास्त्रियों का सर्वे

-आरके सिंह- बरेली। मोबाइल और सोशल मीडिया ने लोगों को दुनिया से जोड़ने का काम तो किया है, लेकिन इसका असर अब परिवारों और वैवाहिक रिश्तों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बरेली कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग के शोधार्थियों द्वारा किए गए एक सर्वे में सामने आया है कि सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल से परिवारों में मतभेद, दंपति के बीच अविश्वास, वैवाहिक विवाद और विवाहेतर संबंधों की प्रवृत्ति बढ़ रही है। हालांकि, सर्वे यह भी बताता है कि सोशल मीडिया ने जीवनसाथी चुनने और संवाद को आसान बनाने में सकारात्मक भूमिका भी निभाई है।

Jul 15, 2026 - 12:25
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सोशल मीडिया का साइड इफेक्ट! परिवारों में बढ़ रहे झगड़े, भरोसा टूट रहा, रिश्तों पर मंडरा रहा संकट : बरेली कॉलेज के समाजशास्त्रियों का सर्वे

बरेली कॉलेज की उप प्राचार्या डॉ. वंदना शर्मा ने बताया कि कॉलेज के समाजशास्त्री डॉ. नवनीत अहूजा और नलिनी राजपूत के निर्देशन में समाजशास्त्र के शोधार्थियों ने अप्रैल माह में बरेली महानगर क्षेत्र के 300 परिवारों पर यह अध्ययन पूरा किया। अध्ययन का उद्देश्य सोशल मीडिया के पारिवारिक और वैवाहिक जीवन पर पड़ रहे प्रभावों का विश्लेषण करना था।

सर्वे में सामने आया कि 95 प्रतिशत परिवार इंटरनेट का उपयोग करते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल तकनीक अब लगभग हर घर तक पहुंच चुकी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि डिजिटल क्रांति ने संचार को पहले से कहीं अधिक तेज, सरल और वैश्विक बनाया है, लेकिन इसके साथ ही पारिवारिक संबंधों, सामाजिक व्यवहार, सांस्कृतिक मूल्यों और विवाह जैसी महत्वपूर्ण सामाजिक संस्थाओं में भी बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

वैवाहिक जीवन पर सबसे अधिक असर

सर्वे के अनुसार 71.67 प्रतिशत परिवारों का मानना है कि सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग से वैवाहिक जीवन में धोखाधड़ी, संदेह और विवाद की संभावनाएं बढ़ गई हैं। वहीं 50.67 प्रतिशत परिवारों ने माना कि सोशल मीडिया के कारण परिवार के सदस्यों के बीच आपसी मतभेद बढ़ रहे हैं।

शोध में यह भी सामने आया कि व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर स्टेटस और स्टोरी देखना, उन पर प्रतिक्रिया देना या प्रतिक्रिया न देना भी कई बार रिश्तों में तनाव का कारण बन रहा है।

जीवनसाथी चुनने में भी निभा रहा भूमिका

नकारात्मक प्रभावों के बीच सर्वे का एक सकारात्मक पक्ष भी सामने आया। 50 प्रतिशत लोगों ने माना कि सोशल मीडिया जीवनसाथी चुनने में उपयोगी साबित हो रहा है। इससे लोगों को संवाद और जानकारी प्राप्त करने में सुविधा मिलती है।

बदल रहे हैं पारिवारिक मूल्य

शोधकर्ताओं का कहना है कि सोशल मीडिया ने परिवारों के मूल्य, आचार-विचार और नैतिकता को प्रभावित किया है। इसका असर केवल युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों, अभिभावकों और बुजुर्गों पर भी दिखाई दे रहा है।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि बरेली महानगर क्षेत्र में विवाह-विच्छेद, पति-पत्नी के बीच तालमेल की कमी, अविश्वास, ईर्ष्या और झगड़ों की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है। साथ ही विवाह पूर्व और विवाहेतर संबंधों की प्रवृत्ति भी बढ़ने की बात सामने आई है।

सर्वे में 67.67 प्रतिशत लोगों ने माना कि विवाह के पारंपरिक स्वरूप पर सोशल मीडिया का गहरा प्रभाव पड़ा है, जबकि 50 प्रतिशत लोगों ने विवाहेतर संबंधों में वृद्धि होने की बात स्वीकार की।

युवाओं में सबसे अधिक सोशल मीडिया की लत

सर्वे के अनुसार 76.34 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया कि उन्हें सोशल मीडिया की आदत पड़ चुकी है। परिवार में सोशल मीडिया का सबसे अधिक उपयोग करने वालों में युवा – 63.33 प्रतिशत, माता-पिता – 15 प्रतिशत, बच्चे – 13.30 प्रतिशत और बुजुर्ग – 8.34 प्रतिशत  शामिल हैं।

स्मार्टफोन बना सबसे बड़ा माध्यम

अध्ययन में पाया गया कि सोशल मीडिया तक पहुंच का सबसे बड़ा माध्यम स्मार्टफोन है। स्मार्टफोन – 72.33 प्रतिशत, लैपटॉप – 13.33 प्रतिशत, टैबलेट – 0.68 प्रतिशत यूज करते हैं।

शोधकर्ताओं का निष्कर्ष है कि सोशल मीडिया आज समाज का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। इसके सकारात्मक लाभों से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन यदि इसका संतुलित और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग नहीं किया गया तो पारिवारिक रिश्तों, सामाजिक मूल्यों और वैवाहिक जीवन पर इसके दुष्प्रभाव और अधिक गंभीर हो सकते हैं।

SP_Singh AURGURU Editor