श्री मनःकामेश्वर धाम में श्रद्धा की दिव्यता से खिला रजत द्वार, शिव पंच चिन्हों से सुसज्जित अलौकिक कृति लोकार्पित
आगरा। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर रावतपाड़ा स्थित प्राचीन श्री मनःकामेश्वर नाथ महादेव मंदिर में भक्तों की श्रद्धा, सेवा और भक्ति से निर्मित 100 किलोग्राम चांदी से बना भव्य रजत द्वार लोकार्पित किया गया। यह न केवल शिव भक्तों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि धार्मिक स्थापत्य कला का भी एक अनुपम उदाहरण बन गया है।
शुभ मुहूर्त में विधिवत पूजन और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ द्वार का लोकार्पण संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत गणपति पूजन और स्वास्तिक आराधना से हुई, इसके बाद सिंह पूजन और द्वार उद्घाटन की परंपरा निभाई गई।
इस ऐतिहासिक आयोजन के दौरान गुरु गादी पूजन और प्रसादी वितरण भी हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
श्रीमहंत योगेश पुरी ने इस मौके पर कहा, यह द्वार केवल चांदी का नहीं, श्रद्धा का दर्पण है। हर भक्त की आस्था और बाबा की कृपा इसमें समाहित है। जो भी बाबा के इस दरबार में आएगा, उसे आध्यात्मिक ऊर्जा का स्पर्श अवश्य होगा।
मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि द्वार के निर्माण के बाद अब बाबा की वेदी, 11 अखंड ज्योति, अर्द्धनारीश्वर भगवान की आकृति, कमल पुष्प और मंदिर की अन्य वेदिक संरचनाएं भी चांदी से श्रृंगारित की जाएंगी। यह कार्य चरणबद्ध रूप से भक्तों के सहयोग से किया जाएगा।
रजत द्वार के दोनों पल्लों पर भगवान शिव के पंच चिन्ह, ओंकार, दो सर्प, त्रिशूल, डमरू और सिंह मुख अत्यंत बारीकी से उकेरे गए हैं। फूल-पत्तियों की बारीक नक्काशी के मध्य ये चिन्ह शिवतत्त्व की शक्ति और सौंदर्य को एकाकार करते हैं। द्वार में लगभग 13 फीट लंबाई और 12 फीट चौड़ाई है, जिसे विशेष चांदी की कीलों से सजाया गया है।
द्वार की सुरक्षा हेतु रिमोट और स्विच से संचालित स्टील शटर भी स्थापित किया गया है, जो तकनीक और परंपरा के अद्भुत समन्वय को दर्शाता है।
द्वार के एक ओर लगी रजत पट्टिका पर यह अंकित है- निर्माण तिथि: आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा, संवत 2082 (10 जुलाई 2025), श्री मनःकामेश्वर रजत द्वार, श्री गुरु चरणों में समर्पित। तिलकायत श्री महंत योगेश पुरी जी एवं मठ प्रशासक श्री हरिहर पुरी जी।
भव्य द्वार का निर्माण समाज के हर वर्ग के लोगों के सहयोग से संभव हो सका। भक्तों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार 100 ग्राम से लेकर 1 किलो या उससे अधिक चाँदी का समर्पण किया। यह योगदान किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरी श्रद्धालु परंपरा की साझी भावना का प्रमाण है।
फूल बंगला और छप्पन भोग दर्शन ने इस दिन को और अधिक दिव्य बना दिया। भक्तों ने बाबा के दर्शन कर, रजत द्वार के समक्ष नतमस्तक होकर आत्मिक शांति प्राप्त की।
इस अवसर पर मंदिर परिसर भक्तिरस से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने एक स्वर में स्वीकार किया कि यह रजत द्वार, केवल प्रवेश द्वार नहीं, एक चेतना है जो शिवमयी अनुभूति का प्रवेश द्वार बन चुका है।