एसआईआर का असर: जन्म प्रमाणपत्र बनवाने को दिया झूठा हलफनामा, जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा
-रमेश कुमार सिंह बरेली। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के चलते मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की होड़ में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। कंजर जाति के नौ लोगों द्वारा शीशगढ़ नगर पंचायत में झूठा जन्म स्थान दर्शाकर जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए दिए गए हलफनामे जांच में फर्जी पाए गए हैं। मामले की जांच जारी है और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
प्रकरण में उपजिलाधिकारी मीरगंज के समक्ष प्रस्तुत आवेदन पर संदेह होने के बाद आलोक कुमार (एसडीएम मीरगंज) ने शीशगढ़ नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी से विस्तृत जांच कराई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि जिन व्यक्तियों ने जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया, वे वर्ष 2018 से पहले शीशगढ़ के निवासी ही नहीं थे।
2018 में बसे, जन्म 1955–1995 तक दिखाया
जानकारी के अनुसार, शीशगढ़ कस्बे के मोहल्ला शेखपुरा में वर्ष 2018 में कंजर जाति के लगभग छह परिवार आकर बसे थे। इन परिवारों ने स्थानीय व्यक्ति से जमीन खरीदकर अस्थायी दस्तावेजों के आधार पर मकान बनाए। वर्तमान में इन परिवारों के करीब 40 लोग निवास कर रहे हैं।
जब वर्ष 2003 की मतदाता सूची में इनके नाम नहीं मिले, तो रफ्फन, नगीना, सितारा, शमशुल, मोअज्जम, शौकीन, ताहिर, शहादत और सफन मियां सहित नौ लोगों ने जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदन कर दिया। हलफनामे में इन्होंने अपना जन्म वर्ष 1955 से 1995 के बीच दर्शाया और शीशगढ़ को जन्म स्थान बताया, जबकि वास्तविकता में वे 2018 से पहले यहां रहते ही नहीं थे।
हलफनामे में दो स्थानीय गवाहों के हस्ताक्षर
शीशगढ़ नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी दुर्गेश कुमार सिंह ने बताया कि इन आवेदकों ने एसडीएम मीरगंज को दिए गए हलफनामे में शीशगढ़ के दो स्थानीय गवाहों के हस्ताक्षर भी कराए थे। जांच में यह हलफनामा पूरी तरह झूठा पाया गया है।
राजनीतिक संरक्षण के आरोप
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इन कंजर परिवारों को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ था। वोटों के लालच में एक सभासद की मदद से इनके निवास प्रमाणपत्र बनवाए गए, आधार कार्ड भी तैयार कराए गए और नगर पंचायत चुनावों में इन लोगों ने मतदान भी किया। हालांकि, एसआईआर शुरू होते ही मामला खुल गया और स्थिति गंभीर हो गई।
एसडीएम मीरगंज आलोक कुमार ने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट मिलते ही नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मताधिकार हासिल करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।