आगरा में बारावफात पर शांति से निकले छोटे बड़े जुलूस, दिखी भाईचारे की झलक
आगरा। ईद मिलादुन्नबी (बारावफात) के पावन पर्व पर रविवार को सुलहकुल की नगरी आगरा में सांप्रदायिक सौहार्द का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। शहर और देहात से निकले दर्जनभर से अधिक जुलूसों में हज़ारों लोगों की सहभागिता रही। इस्लामी नारे, नात और पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद साहब के बताए रास्तों पर चलने की हिदायतों से माहौल गुंजायमान रहा। खास बात यह रही कि गैर-मुस्लिम भाइयों और सामाजिक संस्थाओं ने जुलूस मार्ग पर स्वागत मंच बनाकर फूल, मिठाइयाँ और फल वितरित किए, जिससे गंगा-जमुनी तहज़ीब और हिंदू-मुस्लिम एकता की अनोखी मिसाल पेश हुई।
इस वर्ष का बारावफात मुख्य जुलूस पिछले वर्षों की तुलना में और भी बड़ा व भव्य रहा। जुलूस मार्ग पर कई स्वागत द्वार बनाए गए थे। गैर-मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी आगे बढ़कर जुलूस का गर्मजोशी से स्वागत किया और मिठाई व फल वितरित कर भाईचारे का पैगाम दिया।
एक भव्य जुलूस हाजी बिलाल के नेतृत्व में निकाला गया। इसमें इरफ़ान, सलीम, समी आग़ाई, बुंदन मियां, हाजी असलम, अदनान कुरैशी समेत हज़ारों लोग शामिल हुए। जगह-जगह जुलूस का स्वागत कर भाईचारे और इंसानियत का पैगाम दिया गया।
इससे पहले मस्जिद मेवाती से हाजी मंजूर और काले शरीफ के नेतृत्व में मस्जिद के बच्चों ने बारावफात का जुलूस निकाला। मदरसे के बच्चों का एक अन्य जुलूस नगला मेवाती से निकाला गया। इसके अलावा ताजगंज, पक्की सराय, मल्को गली, वजीरपुरा, नई बस्ती, बिल्लोचपुरा समेत अन्य क्षेत्रों से भी बारावफात के जुलूस निकाले गये। ये सभी जुलूस जामा मस्जिद पहुंचे और फिर वहां से भव्य और बड़ा जुलूस शुरू हुआ। यह जुलूस घाटी मामू भांजा, मंटोला, मीरा हुसैनी, नाई की मंडी, एमजी रोड और धाकरान चौराहा होते हुए पुनः जामा मस्जिद पर पहुंचकर ही समाप्त हुआ। जुलूस में हजारों की संख्या में लोग शामिल थे।
ऑल इंडिया मुस्लिम इत्तेहाद कमेटी ने रुई की मंडी से कमेटी के अध्यक्ष निसार अहमद के नेतृत्व में वारावफ़ात का जुलूस निकाला। जुलूस की सरपरस्ती गद्दीनशीं अजमल अली शाह चिश्ती नियाजी ने की। जुलूस भोगीपुरा चौराहा, सिरकी मंडी, लोहामंडी, जगदीशपुरा और बोदला चौराहा होते हुए कदम शरीफ पर पहुंचा। जुलूस में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शामिल हुए।
जुलूस में नासिर खान, डॉ. जाफरी, अमीर हसन एडवोकेट, इख़्तियार जैदी, पप्पू भाई, हाजी आफताब, असग़र अली, जाकिर अली आदि शामिल थे।
आगरा प्रेम और सौहार्द की नगरी- डॊ. शिराज
हिंदुस्तानी बिरादरी के अध्यक्ष एवं कबीर पुरस्कार से सम्मानित डॉ. सिराज कुरैशी ने इस मौके पर कहा कि आज का दिन हज़रत मोहम्मद साहब की पैदाइश और विसाल का दिन है। इस मौके पर दुनिया भर में मुसलमान खुशियां मनाते हैं और गरीबों में पकवान बांटते हैं। आगरा की खासियत ही यही है कि यहां गैर-मुस्लिम भाई भी बढ़-चढ़कर मुस्लिम समाज का स्वागत करते हैं। आगरा प्रेम और सौहार्द की नगरी है, और भविष्य में भी यही संदेश देती रहेगी। संगठन के उपाध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार विशाल शर्मा, महासचिव व वरिष्ठ पत्रकार विजय उपाध्याय ने कहा कि आगरा की धरती पर धार्मिक विविधता के बावजूद आपसी एकता और सद्भावना कायम है।
अमन और मोहब्बत पैगम्बर ए इस्लाम का पैगाम-शब्बीर
ईद-ए-मीलादुन्नबी के मौक़े पर जीवनी मंडी स्थित कार्यालय में एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई। इस गोष्ठी को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शब्बीर अब्बास ने कहा कि आज के हालात में जब समाज को बाँटने और नफ़रत फैलाने की कोशिशें हो रही हैं, तब हमें पैग़म्बर-ए-इस्लाम की सीरत से सबक लेना होगा।
उन्होंने कहा कि हुज़ूर ने पूरी इंसानियत को अमन, मोहब्बत और इंसाफ़ का पैग़ाम दिया। इस्लाम की असल रूह क़ुर्बानी, भाईचारे और इंसानियत की सेवा है। मुसलमान की असली पहचान अमन और मोहब्बत है, और यही पैग़म्बर-ए-इस्लाम का पैग़ाम है।
इस मौक़े पर नासिर अब्बासी, शरीफ़ कुरैशी, रफ़्फ़न अब्बासी, समीर अब्बासी, आक़िल अब्बास, जमी़ल ख़ान, फ़ाईम उस्मानी, अख़्तर चौधरी, अलीम उद्दीन सहित कई मौज़िज़ लोग मौजूद रहे।Top of Form
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