स्मृति 2025: ‘दर्पण से छील दीजिए अपनी छवि को, तब मिलेंगे हरिऔध जी’

नई दिल्ली/आगरा/सिडनी/लंदन। पंडित अयोध्या सिंह उपाध्याय “हरिऔध” की जयंती 15 अप्रैल 2025 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाते हुए, ‘हरिऔध स्मृति’ साहित्यिक आयोजन का भव्य रूप से ज़ूम मंच के जरिए किया गया। इस वैश्विक आयोजन की परिकल्पना और समन्वय हरिऔध परिवार की संस्था ‘थिएटर ऑन डिमांड’ ने किया, जिसमें सहयोगी संस्थाएं ‘भारत-ऑस्ट्रेलिया साहित्य सेतु’, ‘साहित्य संध्या’ मेलबर्न, तथा पत्रिका ‘ऑस्ट्रेलियांचल’ सिडनी शामिल रहीं।

Apr 18, 2025 - 12:31
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स्मृति 2025: ‘दर्पण से छील दीजिए अपनी छवि को, तब मिलेंगे हरिऔध जी’
हरिऔध स्मृति साहित्यिक आयोजन में जुड़े देश-विदेश के साहित्यकार।  

-अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की जयंती पर अंतरराष्ट्रीय काव्य विमर्श और कवि सम्मेलन का गरिमामयी आयोजन

सम्मेलन की अध्यक्षता शिक्षाविद भगवान सिंह ने की, जिन्होंने हरिऔध जी के साहित्य को भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि हरिऔध जी का हिंदी साहित्य में योगदान युगांतरकारी रहा है और उनकी स्मृतियों को लेखनी के माध्यम से जोड़ते हुए एक पुस्तक का प्रकाशन किया जाना चाहिए।

मुख्य वक्तव्यों और प्रस्तुतियों की झलक

हरिऔध जी की पौत्री श्रीमती आशा शर्मा ने उद्घाटन वक्तव्य में कहा कि आप सभी अपने साथ अपनी अगली पीढ़ियों को भी इस आयोजन से जोड़ें, जिससे वे साहित्य और संस्कृति से आत्मीय संबंध स्थापित कर सकें।

मुख्य वक्ता प्रॉंजल धर ने कहा, “दर्पण से छील दीजिए अपनी छवि को, तब मिलेंगे हरिऔध जी।” उनका वक्तव्य गूढ़ार्थ और चिंतनपरक रहा। लंदन से विशिष्ट अतिथि तेजेंद्र शर्मा ने अपनी ग़ज़ल के माध्यम से संवेदना और विचारशीलता की अभिव्यक्ति दी।

लंदन से ही विशिष्ठ अतिथि वरिष्ठ लेखिका  जया वर्मा ने कहा कि मैं अपने छोटे भाई को हरिऔध जी की कविता ‘उठो लाल अब आंखें खोलो’ पढ़कर जगाया करती थी। विशिष्ट अतिथि डॊ. नीलम भटनागर ने कहा कि हरिऔध जी की कविता ‘प्रिय प्रवास’ ने सिद्ध किया कि खड़ी बोली में भी रस, माधुर्य और महाकाव्यात्मकता संभव है। उनकी कविता ‘बूंद’ मेरी प्रिय है।

सारस्वत अतिथि डॊ. विमल कुमार शर्मा  ने अपने काव्य पाठ में सुनाया-“मज़ा अब आ रहा है दर्द का, दवाई रहने दो…।” डॊ. कुसुम चतुर्वेदी ने मधुर गीत प्रस्तुत किया-

“मैंने तुम्हारे लिए जो लिखे वे परस पा तुम्हारा भजन हो गए…।” डॊ. शैलजा चतुर्वेदी ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, हरिऔध जी ने साहित्य की विराट विरासत के साथ एक ऐसा परिवार दिया है जो आज भी उनके यशगान से हिंदी को जीवंत रखे हुए है।

 सिडनी, भौतिक विज्ञान की अमेरिक्टस प्रोफेसर प्रो. राजेश्वरी माथुर ने ग़ज़ल प्रस्तुत की- “आओ चलें ऐसी जगह जहां हम हों, तुम हो, बहार हो…।” वंदना रानी दयाल ने कहा कि यदि तीसरी और चौथी पीढ़ी साहित्य की विरासत को संजो रही है, तो हिंदी भाषा का भविष्य सुरक्षित है। खुशबू गुप्ता ने गीत प्रस्तुत किया- “हे कृष्ण! तुम्हें फिर आना होगा, मानवता की रक्षा करने...।”

वनीता शर्मा ने हरिऔध जी को समर्पित छंद में कहा- “वरद पुत्र मां शारदा के, अपार स्नेह गुण गाथ थे...।” सोनम झा ने गीत प्रस्तुत किया जबकि  अलका दुबे ने प्रेरणास्पद पंक्तियां पढ़ीं- “शंखनाद करो, परवाज़ भरो, तुम नारी हो नव भारत की…।” डा. शशिकांत शर्मा ने सुनाया- “भले ही चूल्हे जुदा-जुदा हों, ये आंगन अभी बंटा नहीं है…।”

महेन्द्र तिवारी ‘अलंकार’, प्रतिभा मिश्रा ‘ख़्वाहिश’ और प्रियंका अग्निहोत्री ने काव्य पाठ के ज़रिए अपनी साहित्यिक प्रस्तुति दी। प्रियंका की पंक्तियां विशेष चर्चा में रहीं-

“क्या खोया क्या नहीं पा सके, सोचना होगा…।” भोपाल के वरिष्ठ कवि बलराम गुमाश्ता  ने अपने संदेश में लिखा-“हरिऔध जी जैसे साहित्यिक महामानव की रचनात्मक विरासत को हिंदी सदैव नमन करती रहेगी।”

कार्यक्रम की सफलतापूर्वक प्रस्तुति में योगदान

कार्यक्रम का संचालन हरिऔध जी की प्रपौत्री अपर्णा वत्स और भारत-ऑस्ट्रेलिया साहित्य सेतु के संस्थापक कवि अनिल कुमार शर्मा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन हरिऔध जी की बड़ी प्रपौत्री अंगिरा वत्स ने किया, जो मुंबई में सिनेमा जगत से जुड़ी हैं। डॊ. प्रवीण गुप्ता, विनय गुप्ता (एशिया खबर), अंग्रेज़ी कवि राजीव खंडेलवाल और डॊ. शैलजा चतुर्वेदी का विशेष सहयोग उल्लेखनीय रहा।

SP_Singh AURGURU Editor