मंजू हत्याकांड का सामाजिक असरः तीन बच्चे अनाथ हुए और सात परिवारों पर बर्बादी का संकट

निबोहरा थाना क्षेत्र में सारंगपुर रोड पर विगत 18 जुलाई को मंजू नाम की महिला की हत्या का मामला बताता है कि एक व्यक्ति की गलत सोच और गलत रिश्तों का दुष्परिणाम केवल उसकी पत्नी या परिवार तक सीमित नहीं रहता, वह कई परिवारों को घसीट लेता है। मंजू हत्याकांड यह सबक भी है कि पारिवारिक मूल्यों की उपेक्षा और अवैध संबंधों की जिद किसी एक की नहीं, कई लोगों की जिंदगी को बर्बाद कर सकती है।

Jul 20, 2025 - 11:31
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मंजू हत्याकांड का सामाजिक असरः तीन बच्चे अनाथ हुए और सात परिवारों पर बर्बादी का संकट

आगरा। कभी गृहस्थी की साधारण कहानी रही मंजू की जिंदगी, अब एक जघन्य हत्याकांड की मार्मिक इबारत बन चुकी है। 18 जुलाई को दीवानी कचहरी से केस की तारीख करके अपने मायके लौट रही मंजू की कनपटी पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह हत्या केवल एक महिला की नहीं थी, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक ताने-बाने को भी चीर देने वाला अपराध साबित हुई।

पति मनोज, जो सीआरपीएफ में तैनात है, पर ही हत्या का आरोप लगा है। पुलिस जांच में अगर अन्य छह नामजद आरोपी- देवर, ननदोई और रिश्तेदारों की भूमिका भी प्रमाणित होती है, तो यह मामला न केवल कानूनी प्रक्रिया में कई परिवारों को उलझा देगा, बल्कि इन परिवारों की बर्बादी का कारण भी बन जाएगा।

वैवाहिक संबंधों की दरार और नारी जीवन की त्रासदी

मंजू की शादी 17 वर्ष पहले हुई। तीन बच्चे पैदा हुए। इसके बाद पति की जिंदगी में दूसरी महिला आई तो यह सब एक टूटती हुई गृहस्थी के संकेत थे। स्वाभिमानी मंजू ने पति से अलग होकर अपने दो छोटे बच्चों के साथ मायके में रहना शुरू कर दिया था जबकि इस दंपति का बड़ा बेटा पिता के साथ ही रह रहा था। मंजू ने जब भरण-पोषण के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तो यह न्याय की मांग नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की पुकार थी, लेकिन इसके जवाब में जो मिला वह थी गोली, जिसने उसकी सांसें थाम दीं। मंजू की हत्या निबोहरा थाना क्षेत्र में सारंगपुर रोड पर तब हुई थी जब वह पैदल-पैदल अपने मायके गढ़ी केसरी जा रही थी।

इस अपराध की सबसे बड़ी सजा किसे मिली?

इस हत्याकांड में सबसे करुण पक्ष वे तीन बच्चे हैं, जो अब मां के बिना और पिता को जेल में देख कर पलेंगे। सबसे बड़ा बेटा फतेहाबाद में पिता के साथ था, जबकि दो छोटे बच्चे मां के साथ ननिहाल में। अब ये तीनों अनाथ से हो गए हैं। मां नहीं रही और पिता एक अपराधी के रूप में कानून की पकड़ में आने को है।

एक अपराध, अनेक पीड़ाएं

कानूनी दृष्टि से देखें तो यह एक हत्या का मामला है, लेकिन सामाजिक दृष्टि से यह एक व्यापक त्रासदी है, जिसमें जहां एक महिला की जान गई, वहीं तीन मासूमों का बचपन बिखर गया। अपराध साबित हुआ तो एक पति का भविष्य जेल में कटेगा। इसी अपराध में नामजद हुए छह अन्य लोगों के परिवारों पर कानूनी संकट मंडरा रहा है और अगर इनकी अपराध में संलिप्तता मिलती है तो इसका असर इनके भी परिवारों के बिखरने के रूप में सामने आएगा।

बता दें कि मृत मंजू के पिता पिता हरी सिंह ने पति मनोज पुत्र शिवचरण निवासी समोना (राजाखेड़ा) हाल निवासी फतेहाबाद, देवर प्रदीप, ननदोई सुरेंद्र, भूरी सिंह, योगेंद्र निवासी फतेहाबाद, धर्मेंद्र निवासी अर्जुनपुरा के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है।

SP_Singh AURGURU Editor