गुरुद्वारा गुरु का ताल में गूंजे गुरबाणी के स्वर, अमृत पान कर नई पीढ़ी को दी प्रेरणा
गुरुद्वारा गुरु का ताल में आयोजित तीन दिवसीय गुरमत समागम का रविवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ समापन हुआ। समागम के अंतिम दिन अमृत संचार की विशेष विधि संपन्न हुई, जिसमें लगभग 150 महिला, पुरुष और बच्चों ने अमृत पान कर खालसा स्वरूप धारण किया।
आगरा। गुरुद्वारा गुरु का ताल में आयोजित तीन दिवसीय गुरमत समागम का रविवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ समापन हुआ। समागम के अंतिम दिन अमृत संचार की विशेष विधि संपन्न हुई, जिसमें लगभग 150 महिला, पुरुष और बच्चों ने अमृत पान कर खालसा स्वरूप धारण किया।
गुरुद्वारा गुरु का ताल के मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह जी ने बताया कि अमृत संचार की रस्म दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से आए पंज प्यारों द्वारा सिख मर्यादा के अनुसार संपन्न कराई गई। पंज प्यारों ने सभी को ककार धारण कराए और खंडे बाटे से तैयार अमृत का पान कराया। अमृत पान के बाद सभी सिख संगत पंक्तिबद्ध होकर दरबार साहिब पहुंचे और माथा टेककर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर संतों ने अमृतधारी सिखों को सिरोपा देकर सम्मानित किया और संगत ने जयकारों के साथ उनका स्वागत किया।
समागम के दौरान जत्थेदार बाबा रजिंदर सिंह जी ने बताया कि अंतिम दिन सुबह से दोपहर तक कीर्तन समागम आयोजित हुआ। दरबार साहिब में भाई हरजीत सिंह और लवप्रीत सिंह ने गुरबाणी गायन किया, जबकि ज्ञानी केवल सिंह जी ने अमृत पान करने वाले सभी सिखों को प्रतिदिन नितनेम और गुरबाणी पाठ का महत्व समझाते हुए शुभकामनाएँ दीं। बाबा अमरीक सिंह जी ने नई पीढ़ी से कथा, कीर्तन और गुरुघर से जुड़े रहने की अपील की।
कार्यक्रम का समापन आनंद साहिब के पाठ, अरदास और हुकुमनामे के साथ हुआ। समागम का संचालन ज्ञानी केवल सिंह जी और दिल्ली गुरुद्वारा शीशगंज साहिब के हेड ग्रंथी ज्ञानी अंग्रेज सिंह ने किया।
इस अवसर पर बाबा पाल सिंह, बाबा अमर सिंह जी, महंत हरपाल सिंह, ग्रंथी हरबंस सिंह, सतवीर सिंह सुशील, अजायब सिंह टीटू, वीर सिंह और हरनाम सिंह ने व्यवस्थाएँ संभालीं।
समागम का मुख्य संदेश “अमृत पान कर खालसा स्वरूप धारण करना जीवन को गुरमत मार्ग पर अग्रसर करने की प्रेरणा है” रहा।