PHOTO SLIDE NEWS : भाई—बहन ने हाथ पकड़कर लगाई यमुना में डुबकी, लाखों श्रद्धालुओं का घाटों पर डेरा, भाई दूज की विशेष तस्वीरें
मथुरा/आगरा। सुबह के चार बजे का समय और मथुरा में यमुना के घाटों पर स्ट्रीट लाइट के उजियारे में हलचल। लाखों की संख्या में श्रद्धालु आज जमा हुए हैं। हल्की ठंड है और सूर्य की किरणाें ने अभी अपनी गर्माहट बिखेरना शुरू नहीं किया है। आस्था का ज्वार जैसे हिलोरे ले रहा है। भाई—बहन यम की फांस से मुक्ति पाने के लिए एक—दूसरे का हाथ पकड़ कर नदी में डुबकी लगा रहे हैं। आज भाई दूज की विशेष परंपरा के दिन यह मथुरा में यमुना नदी के घाटों का चित्रण है।
ब्रज में आज रविवार के दिन यम द्वितीया पर्व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। लाखों भाई-बहन यम की फांस से मुक्ति को यमुना में डुबकी लगा रहे हैं। घरों में भी बहनें भाई के टीका कर लंबी उम्र की प्रार्थना कर रही हैं। मथुरा में प्रशासन ने यमुना घाटों पर चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं। भाई-बहन यमुना स्नान के बाद विश्राम घाट स्थित धर्मराजजी-यमुनाजी के मंदिर के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। बहनें भाई के माथे पर टीका कर लंबी आयु की प्रार्थना कर रही हैं। भाई बहनों को उपहार दे रहे हैं।
मान्यता
मान्यता है कि यम द्वितीया के दिन यमराज जी अपनी बहन यमुना से मिलने विश्राम घाट पर आए थे। यमुना जी ने यमराज (धर्मराज) के टीका किया। यमराज ने यमुनाजी से वरदान मांगने को कहा। यमुनाजी ने कहा कि वह क्या मांगें, वह तो भगवान श्रीकृष्ण की पटरानी हैं, उन पर सबकुछ है। फिर भी यमराज जी ने वरदान मांगने को कहा। यमुनाजी ने कहा उनके अंदर स्नान करने वाला बैकुंठ को जाए। यमराज जी ने कहा कि यम द्वितीया के दिन जो भाई-बहन विश्राम घाट पर स्नान करेंगे, वह बैकुंठ जाएंगे।
स्नान और तिलक का महत्व
इस दिन भाई यदि यमुना में स्नान करें और अपनी बहन के यहाँ जाकर भोजन करें तथा तिलक करवाएं, तो उनका अल्प आयु दोष दूर होता है। इससे अकाल मृत्यु का खतरा नहीं रहता। यह त्यौहार बहुत अच्छा है और इसे हर भाई-बहन को मनाना चाहिए। इस त्यौहार में उपहार के रूप में गोला दिया जाता है। गोला नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला होता है और इसे मंगल कामना के साथ दिया जाता है। यह भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का एक तरीका है।
आगरा के घाटों पर भी रौनक
इधर आगरा के घाटों पर मथुरा जितनी भीड़ नहीं थी लेकिन जो लोग यम द्वितीया पर मथुरा नहीं जा सके, उन्होंने आगरा में कैलाश घाट, बल्केश्वर महादेव और बटेश्वर में यमुना नदी में डुबकी लगाई।