जयंती पर विशेषः नीम करोरी बाबा की भविष्यवाणी और चौधरी चरण सिंह का अचानक प्रधानमंत्री बनना आस्था और संयोग से जुड़ा प्रसंग है

स्वतंत्र भारत की राजनीति में चौधरी चरण सिंह का प्रधानमंत्री बनना केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि आस्था और संयोग से जुड़ा प्रसंग भी माना जाता है। वर्ष 1962 में वन मंत्री रहते हुए चरण सिंह ने नीम करोरी बाबा को कैंची धाम के लिए बिना किसी अड़चन के वन विभाग की भूमि उपलब्ध कराई थी। उसी दौरान बाबा ने सार्वजनिक रूप से भविष्यवाणी की थी कि ईमानदार राजनीति करने वाले चरण सिंह एक दिन भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे। 16 वर्षों बाद 28 जुलाई 1979 को यह भविष्यवाणी सच साबित हुई, जब वे अचानक देश के प्रधानमंत्री बने। यह प्रसंग राजनीति, ईमानदारी और आस्था के अद्भुत संगम का प्रतीक बन गया।

Dec 23, 2025 - 16:07
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जयंती पर विशेषः नीम करोरी बाबा की भविष्यवाणी और चौधरी चरण सिंह का अचानक प्रधानमंत्री बनना आस्था और संयोग से जुड़ा प्रसंग है
स्व. चौधरी चरण सिंह, जिनकी आज 23 दिसंबर को जयंती है।

-चंद्र प्रताप सिकरवार-

चौधरी चरण सिंह की आज (23 दिसम्बर) जयंती है। 28 जुलाई 1979 को वह अचानक प्रधानमंत्री बने थे। तत्कालीन राष्ट्रपति स्व नीलम संजीव रेड्डी ने उन्हें शपथ दिलाई थी। बहुत कम लोगों को मालूम है कि नीम करौरी बाबा ने 16 साल पहले ही चौधरी चरण सिंह के प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी कर दी थी।

जैसा कि अनुयाई मानते हैं कि नीम करोरी बाबा हनुमान जी के अवतार थे। वर्ष 1962 में बाबा हनुमान जी का मंदिर और आश्रम बनाने के लिए अपने घर से निकल पड़े थे। वह नैनीताल के कैंची गांव जा पहुंचे। कैंची के पहाड़ पूर्व में संतों की तपोस्थली थे।

नीम करोरी बाबा ने अपने आराध्य हनुमान जी से ही जमीन की व्यवस्था कराने की प्रार्थना की। इस बीच बाबा को दैवीय संकेत मिला कि मंदिर की जमीन के लिए वह चौधरी चरण सिंह से मिलें। चौधरी चरण सिंह उस वक्त यूपी की तत्कालीन मुख्यमंत्री सुचेता मजूमदार (कृपलानी) की कैबिनेट में वन एवं कृषि मंत्री थे। अंबाला में पढीं सुचेता मूलतः बंगाल की थीं और यूपी की मुख्यमंत्री बनी थीं।

वन विभाग की जमीन देने में आज की तरह उस वक्त भी काफी कानूनी बंदिशें थीं, लेकिन तत्कालीन वन मंत्री चौधरी चरण सिंह को आश्रम के लिए जमीन देने में तनिक भी अड़चन नहीं आई। बाबा ने आश्रम और हनुमान जी का मंदिर बनाने के लिए जितनी जमीन मांगी थी, उन्हें वन विभाग की उतनी ही जमीन दे दी गई। नीम करौरी बाबा कहते थे, ये हनुमान जी का ही चमत्कार था।

उसी जमीन में आज कैंची धाम का भव्य आश्रम और मंदिर है। वहां बडा मेला लगता है और लाखों भक्त प्रति वर्ष हनुमान जी और नीम करोरी बाबा के दर्शन करने के लिए आते हैं। बाबा का एक आश्रम वृंदावन परिक्रमा मार्ग में भी है।

कैंची धाम में मंदिर और आश्रम जब बन रहा था, तब एक दिन बाबा नीम करोरी ने चौधरी चरण सिंह के बारे में कहा था- 'ये चरण सिंह जिस सच्चाई और ईमानदारी से राजनीति कर करता है,  हनुमान जी इसे एक दिन भारत का प्रधानमंत्री बनवाएंगे'। यह बात चौधरी चरण सिंह तक भी पहुंची, लेकिन उस वक्त बाबा की इस बात को उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन इस वाकये के 16 साल बाद 28 जुलाई 1979 को बाबा के मुख से निकली वह बात सत्य साबित हुई।

बाबा अक्सर अपने भक्तों से कहते थे कि 'मैं कुछ नहीं कहता, मुझसे तो हनुमान जी जो कहलवाते हैं, वही मैं बोल देता हूं।

संयोग देखिए, चौधरी चरण सिंह हनुमान जी ही क्या, किसी देवता के मंदिर में दर्शन करने नहीं जाते थे। वह अपने घर पर आर्य समाज पद्धति से हवन जरूर करवाते थे। स्वामी दयानंद सरस्वती जी के प्रवचन सुनते थे। घर पर प्रसाद बांटते थे।

एक बार वृंदावन में चौधरी चरण सिंह की पार्टी का सम्मेलन हुआ था। पार्टी के सभी नेता बिहारी जी व अन्य मंदिरों के दर्शन करने गए लेकिन वे दर्शन करने नहीं गए। वह वृंदावन के गुरुकुल में वहां की व्यवस्थाओं की जानकारी लेने चले गये। इस गुरुकुल के लिए अपने बगीचे की जमीन राजा महेन्द्र प्रताप ने फर्रुखाबाद के आर्य समाज के लोगों को दान दी थी।

वृंदावन के वरिष्ठ भाजपा नेता राधा कृष्ण पाठक के पिता स्व. बनवारी लाल पाठक नीम करोरी बाबा के परम शिष्य थे। बाबा ने स्व. पाठक व अन्य भक्तों के समक्ष ही चौधरी चरण सिंह के प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी की थी। आज भी तमाम शिष्य बाबा की भविष्यवाणियों के और उनके चमत्कारों के किस्से सुनाते हैं।Top of Form

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और वर्तमान में उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।)

SP_Singh AURGURU Editor