नन्हें-मुन्नों की मुस्कान में बसंतः दयालबाग के खेतों में सजे बेबी शो में दिखा प्रतिभा, संस्कार और रचनात्मकता का अद्भुत संगम

आगरा। बसंत की सुगंध, उल्लास का रंग और नन्हे-मुन्नों की किलकारियों से दयालबाग का वातावरण इन दिनों पूरी तरह आनंदमय हो उठा है। बसंतोत्सव के पावन अवसर पर दयालबाग में आयोजित बेबी शो 2026 ने शिशु प्रतिभा, संस्कार और रचनात्मकता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। खेतों की कर्मभूमि पर सजा यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि बाल विकास, पारिवारिक सहभागिता और आध्यात्मिक चेतना का उत्सव बन गया।

Jan 20, 2026 - 19:17
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नन्हें-मुन्नों की मुस्कान में बसंतः दयालबाग के खेतों में सजे बेबी शो में दिखा प्रतिभा, संस्कार और रचनात्मकता का अद्भुत संगम
बसंतोत्सव के मौके पर मंगलवार को दयालबाग में आयोजित बेबी शो के मनमोहक दृश्य।

दयालबाग में बेबी शो की यह परंपरा रा.धा./धः स्वामी मत के छठे संत सतगुरु परम गुरु हुजूर मेहता जी महाराज के समय से चली आ रही है। छह दशक से अधिक के इस सफर में स्वरूप भले बदला हो, लेकिन उद्देश्य आज भी वही है, शिशु अवस्था से ही बच्चों के सर्वांगीण विकास के प्रति अभिभावकों को जागरूक करना और बच्चों में आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति, रचनात्मकता व लचीलापन विकसित करना।

इस वर्ष बेबी शो दो चरणों में संपन्न हुआ। पहले चरण में आध्यात्मिक सौंदर्य, बुद्धिमत्ता और स्वास्थ्य से जुड़ी प्रतियोगिताएं 21 दिसंबर 2025 को पी.वी. प्राइमरी स्कूल परिसर में आयोजित की गईं, जिनमें दयालबाग के स्थायी निवासी तीन सप्ताह से आठ वर्ष तक की आयु के 73 बच्चों—34 बालक और 39 बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दूसरे चरण में फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता 3 जनवरी 2026 को आयोजित हुई, जिसमें 14 नन्हे प्रतिभागियों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से सभी का दिल जीत लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ हुजूर प्रो. प्रेम सरन सतसंगी साहब एवं ममतामयी रानी साहिबा की गरिमामयी उपस्थिति में प्रार्थना के साथ हुआ। इसके बाद फैंसी ड्रेस विजेताओं की प्रस्तुति, नर्सरी स्कूल के बच्चों द्वारा पाठ गायन और प्राइमरी स्कूल के छात्र-छात्राओं की सुमधुर कव्वाली ने पूरे वातावरण को आनंद से भर दिया।

डॊ. अंजू, इरा दास और विभा, जिन्होने बेबी शो का मूल्यांकन किया। 

बेबी शो का स्नेहपूर्ण मूल्यांकन विशिष्ट विशेषज्ञों द्वारा किया गया। डॉ. अंजू भटनागर, बाल रोग विशेषज्ञ, सरन आश्रम अस्पताल ने स्वास्थ्य मानकों पर बच्चों के शारीरिक विकास और देखभाल के पहलुओं को रेखांकित किया। प्रो. विभा सत्संगी, सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं डे-बोर्डिंग स्कूल प्रभारी ने बुद्धिमत्ता के मानकों पर बच्चों की समझ और प्रतिक्रिया क्षमता को परखा। वहीं प्रो. इरा दास, एमेरिटस प्रोफेसर, मनोविज्ञान विभाग ने आध्यात्मिक सौंदर्य के अंतर्गत भाव-भंगिमा, सरलता और संस्कारों के महत्व को उजागर किया। निर्णायकों ने अभिभावकों का उत्साहवर्धन करते हुए बच्चों की तैयारी की सराहना की।

परिणामों की बात करें तो समूह ए (3 सप्ताह–1 वर्ष) में निश्चल सत्संगी और चेतन वर्मा प्रथम, वान्या कालरा और नूर धारा द्वितीय तथा दृष्टि यादव तृतीय स्थान पर रहीं। समूह बी (1–2 वर्ष) में प्रेम सारंग सत्संगी और आलेख सत्संगी प्रथम, अमी दास व दिव्यांश सत्संगी द्वितीय तथा बिहंग और दर्शन न्यारी तृतीय रहे। समूह सी (2–4 वर्ष) में साध दयाल शर्मा ने प्रथम, आरोही चौधरी ने द्वितीय और अवयुक्त सिंह, भक्ति प्रिया व भाग सत्संगी ने संयुक्त तृतीय स्थान प्राप्त किया। समूह डी (4–6 वर्ष) में धुन सत्संगी प्रथम, शब्द ऋषि द्वितीय तथा गुरु सरना सत्संगी, रौनक सत्संगी और माही यादव तृतीय स्थान पर रहे। समूह ई (6–8 वर्ष) में समा सिंह और दयाल अनुपमा न्यारी प्रथम, अगम सत्संगी व परमी धुन अमोली द्वितीय तथा गुरु प्रीति सत्संगी तृतीय स्थान पर रहीं।

फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में ग्रुप बी (1–2 वर्ष) में आरत सत्संगी ने ‘दयालबाग वे ऑफ लाइफ (फूल)’ की प्रस्तुति से प्रथम स्थान पाया। ग्रुप सी (2–4 वर्ष) में मान्या सत्संगी (परी) प्रथम, उमंग सत्संगी (मोर) और ज्योति सत्संगी (परी) द्वितीय, अमृत सत्संगी (प्रकृति को बचाएं) तृतीय तथा अलख सत्संगी (सत्संगी भाई) को सांत्वना पुरस्कार मिला। ग्रुप डी (4–6 वर्ष) में सुधि संत बानी (परम गुरु हुजूर मेहता जी महाराज के बचन) प्रथम, आदित्य (संत कबीर दास जी) द्वितीय और नज़र सत्संगी (तितली) तृतीय रहे। समूह ई (6–8 वर्ष) में सुमति शर्मा (फार्मेसी) प्रथम, सहज शर्मा (आंवला) और वेद प्रकाश गुप्ता (भगवान कृष्ण) द्वितीय, संस्कृति सिंह (दयालबाग मोरिंगा पेड़) तृतीय तथा नूर केशवर (सूक्ष्म जगत–स्थूल जगत) को सांत्वना पुरस्कार मिला।

कार्यक्रम के अंत में हुजूर की पावन उपस्थिति में सभी प्रतिभागियों, निर्णायकों, व्यवस्थापकों और अतिथियों को प्रसाद वितरित किया गया। खेतों में सेवाकार्य करते हुए भाई-बहनों ने आयोजन का आनंद लिया, जबकि देश-विदेश से सत्संगी ऑनलाइन कैस्कैड के माध्यम से जुड़े। इस आयोजन का लगभग 580 केंद्रों पर सजीव प्रसारण किया गया, जिसमें लाखों सत्संगियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन सहभागिता की।

SP_Singh AURGURU Editor