सपा की सर्जिकल स्ट्राइक: तीन बागी विधायक बाहर, चार अभी भी 'वेटिंग' में!
लखनऊ। समाजवादी पार्टी ने आखिरकार फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले अपने तीन विधायकों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। बागी विधायकों मनोज पांडेय (ऊंचाहार), राकेश सिंह (गौरीगंज) और अभय सिंह (गोसाईगंज) को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।
-अखिलेश यादव ने दिखाई सख्ती, संकेत- विचारधारा से समझौता नहीं
सपा ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर पोस्ट करते हुए कहा, सांप्रदायिक, विभाजनकारी और पीडीए विरोधी विचारधारा का साथ देने के कारण पार्टी जनहित में इन विधायकों को निष्कासित करती है। इन्हें हृदय परिवर्तन के लिए दी गई अनुग्रह अवधि समाप्त हो चुकी है।
फरवरी में हुए राज्यसभा चुनाव में सपा के सात विधायकों ने पार्टी लाइन से अलग जाकर भाजपा उम्मीदवारों को वोट दिया था, जिससे सपा का तीसरा उम्मीदवार हार गया था। इन तीनों के साथ पूजा पाल, विनोद चतुर्वेदी, आशुतोष मौर्य और राकेश पांडेय भी इस लिस्ट में थे। लेकिन इन चार के खिलाफ सपा नेतृत्व अब तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं कर सका है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निष्कासन देरी से जरूर हुआ, लेकिन सपा की उस अंदरूनी बेचैनी को उजागर करता है जो बागियों की वजह से कई महीनों से पार्टी में पसरी थी। वहीं निष्कासित विधायकों की प्रतिक्रिया भी कम दिलचस्प नहीं रही। मनोज पांडेय और राकेश सिंह ने कहा कि वे तो 17 महीने पहले ही पार्टी छोड़ चुके थे, अब बाहर निकाले जाने की बात पर हंसना ही आता है।
तीन विधायकों के निष्कासन से यह बात भी पता चलती है कि लगभग डेढ़ साल तक सपा नेतृत्व ने इंतजार किया कि वे विधायक अपनी गलती मानकर वापस लौट आएं, लेकिन जब इसके कोई संकेत नहीं मिले तो इन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया। ऐसा लगता है कि शेष चार विधायकों को लेकर सपा नेतृत्व अभी भी उम्मीद पाले हुए है। सवाल यग उठता है कि पार्टी अपने अनुशासन को लेकर सख्त है तो बाकी चार बागी विधायकों पर अब तक चुप्पी क्यों? क्या संगठनात्मक मजबूरी है या कोई राजनीतिक रणनीति?