सेंट पैट्रिक्स स्कूल में मेंटल हेल्थ पर वर्कशॉप, बिहेवियर साइंटिस्ट डॉ. नवीन गुप्ता ने शिक्षकों को दी ‘मानसिक महामारी’ से निपटने की ट्रेनिंग
आगरा। शहर के प्रतिष्ठित सेंट पैट्रिक्स स्कूल में मानसिक स्वास्थ्य जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षकों को विद्यार्थियों की बढ़ती मनोवैज्ञानिक चुनौतियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया गया। कार्यशाला में विशेषज्ञ ने साफ कहा कि वर्तमान दौर में मानसिक स्वास्थ्य एक पैंडेमिक (महामारी) का रूप लेता जा रहा है, जिसे नजरअंदाज करना आने वाली पीढ़ी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
प्रसिद्ध बिहेवियर साइंटिस्ट डॉ. नवीन गुप्ता ने किया मार्गदर्शन
कार्यशाला के मुख्य वक्ता निदेशक (सीएसडी) एवं प्रसिद्ध बिहेवियर साइंटिस्ट व लाइफ कोच डॉ. नवीन गुप्ता ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों के भीतर भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक दबाव तेजी से बढ़ रहा है, जिसे समय रहते समझना और उसका समाधान करना बेहद जरूरी है।
विद्यार्थियों की भावनात्मक समस्याओं को समझना जरूरी
डॉ. गुप्ता ने शिक्षकों के साथ विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि किस प्रकार विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति, व्यवहार और भावनात्मक उतार-चढ़ाव को समझकर उन्हें सही दिशा दी जा सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि बच्चों का मानसिक संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
प्रधानाचार्या सिस्टर लीना ने बताया समय की जरूरत
विद्यालय की प्रधानाचार्या सिस्टर लीना ने इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यालय को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसी कार्यशालाएं शिक्षकों को विद्यार्थियों के बेहतर मार्गदर्शन में मददगार साबित होंगी।
DOS तकनीक से व्यक्तित्व अध्ययन, कार्ड डिस्कशन से समाधान
कार्यशाला में DOS तकनीक के माध्यम से व्यक्तित्व मूल्यांकन किया गया, जिससे यह समझाया गया कि स्कूल स्तर पर बच्चों के व्यवहार और मानसिक स्थिति का विश्लेषण कैसे किया जा सकता है।
साथ ही, कार्ड डिस्कशन के जरिए विद्यार्थियों में बढ़ती मानसिक समस्याओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया और उनके व्यावहारिक समाधान भी प्रस्तुत किए गए।
अभिभावकों और शिक्षकों को भी खुद पर करना होगा काम
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए अभिभावकों और शिक्षकों दोनों को स्वयं पर भी कार्य करना होगा। बच्चों के जीवन में आने वाले मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों और लाइफ डिसऑर्डर्स को समझना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
संकल्प के साथ समाप्त हुई कार्यशाला
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार ने डॉ. नवीन गुप्ता के बहुमूल्य मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया और यह संकल्प लिया कि वे विद्यार्थियों के समग्र विकास, शैक्षणिक के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी समान रूप से ध्यान देंगे।