अजमेर के जायरीनों से दरगाह आला हजरत की गलियां गुलजार, हादसे का शिकार हुई अजमेर जाने वाली बस, सभी यात्री सुरक्षित
814वें उर्स के मौके पर ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी की बारगाह में हाज़िरी देने जा रहे देशभर के अकीदतमंद बरेली स्थित दरगाह आला हजरत पर रुककर फातिहा पढ़ रहे हैं। सड़क और रेल मार्ग से पहुंच रहे जायरीनों की वजह से दरगाह की गलियां रौशन और गुलजार हैं। इसी बीच अजमेर जा रही जायरीनों से भरी एक बस बरेली के निकट दुर्घटनाग्रस्त हो गई, हालांकि राहत की बात यह रही कि सभी यात्री सुरक्षित हैं।
-रमेश कुमार सिंह-
बरेली। अजमेर उर्स के अवसर पर जा रहे जायरीन पहले दरगाह आला हजरत पर गुलपोशी और चादरपोशी कर रहे हैं। फातिहा के बाद मुल्क में अमन, खुशहाली और भाईचारे की दुआएं मांगी जा रही हैं।
जायरीन दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा ख़ान (सुब्हानी मियां) और सज्जादानशीन मुफ़्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) से मुलाकात कर दाख़िला सिलसिला अदा कर रहे हैं, इसके बाद आगे के सफर पर रवाना हो रहे हैं। यह सिलसिला 24 दिसंबर तक चलेगा, जबकि कुल शरीफ 27 दिसंबर को चंद्र दर्शन के अनुसार होने की उम्मीद है।
जायरीनों की सुविधा के लिए जिला प्रशासन ने बरेली सिटी स्टेशन पर शिविर लगाया है। यहां शौचालय, पानी के टैंक, डॉक्टर और दवाइयों की व्यवस्था की गई है। दरगाह के रज़ाकार रात-दिन जायरीनों की खिदमत में जुटे हैं।
सड़क मार्ग से आने वाली बसों का पड़ाव पुरानी पुलिस लाइन से दूल्हा मिया के मज़ार तक निर्धारित किया गया है। सिटी स्टेशन से दरगाह तक की सड़कों पर जायरीनों की आवाजाही से रौनक बनी हुई है।
बहराइच के जायरीनों से भरी एक बस बुधवार को बरेली शहर के पास सीबीगंज थाना क्षेत्र में हादसे का शिकार हो गई। बस दरगाह आला हजरत पर हाज़िरी के बाद जायरीनों को लेकर अजमेर जा रही थी। बरेली से निकलते ही बस असंतुलित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई, हालांकि पलटने से बच गई और सभी यात्री सुरक्षित रहे।
दरगाह के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि सूचना मिलते ही दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रज़ा ख़ान के निर्देश पर मंज़ूर रज़ा, सोहेब रज़ा, मुजाहिद बी और जुनैद रज़ा तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। सभी जायरीनों को दरगाह में ठहराने की व्यवस्था की गई। गुरुवार को बस ठीक होने के बाद जायरीन अजमेर के लिए रवाना हो गए।
दरगाह आला हजरत, जो महान इस्लामी विद्वान आला हजरत इमाम अहमद रज़ा ख़ान से जुड़ी है, आज फिर से सूफियाना परंपरा और आपसी सौहार्द का केंद्र बनी हुई है। यहां पहुंचने वाला हर जायरीन अजमेर की राह पर निकलने से पहले अमन का पैगाम साथ लेकर जा रहा है।