कुत्तों के हमले में घायल हुए दो 'लुप्तप्राय' हॉग डियर का सफल रेस्क्यू, इलाज के बाद जंगल में छोड़ा गया

आगरा। वाइल्डलाइफ एसओएस और उत्तर प्रदेश वन विभाग ने मिलकर एक सराहनीय वन्यजीव बचाव अभियान को अंजाम दिया। मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र के तरौली गांव में दो हॉग डियर शावक (एक नर और एक मादा) को आवारा कुत्तों के हमले के बाद सुरक्षित रेस्क्यू कर इलाज के लिए ले जाया गया।

May 10, 2025 - 17:04
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कुत्तों के हमले में घायल हुए दो 'लुप्तप्राय' हॉग डियर का सफल रेस्क्यू, इलाज के बाद जंगल में छोड़ा गया
घायलों हिरनों को इलाज देने के बाद जंगल में छोड़ते वाइल्डलाइफ एसओएस के कर्मचारी।

-मथुरा के तरौली गांव में ग्रामीणों की सतर्कता और वाइल्डलाइफ एसओएस की तत्परता से बच पाए दोनों शावक

ग्रामीणों ने देखा कि दोनों शावक कुत्तों के झुंड से बचकर गांव की ओर भाग आए हैं और उनके पिछले पैर घायल हैं। उन्होंने तुरंत वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस की हेल्पलाइन (+91 9917109666) पर सूचना दी।

त्वरित रेस्क्यू और सतही चोटों का इलाज

रेस्क्यू टीम ने दोनों हिरणों को सुरक्षित पकड़ा और उन्हें वाइल्डलाइफ एसओएस की ट्रांजिट सुविधा में चिकित्सा निरीक्षण के लिए लाया गया। डॉ. इलियाराजा (उप निदेशक, पशु चिकित्सा सेवाएं) के अनुसार, सौभाग्य से चोटें गंभीर नहीं थीं और दोनों ने उपचार के दौरान तेजी से रिकवरी की। दो दिन के चिकित्सा देखभाल के बाद, दोनों हिरणों को एक सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया।

सामुदायिक भागीदारी बनी रेस्क्यू की कुंजी

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने ग्रामीणों की तत्परता की सराहना करते हुए कहा, यह बचाव दर्शाता है कि जब समुदाय सतर्क और जागरूक होता है तो वन्यजीवों की सुरक्षा और पुनर्वास संभव हो पाता है। बैजूराज एम.वी. (डायरेक्टर, कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स) ने जोड़ा, आजकल ऐसे संघर्ष बढ़ रहे हैं क्योंकि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास तेजी से घट रहा है।

क्या है हॉग डियर की स्थिति?

भारतीय हॉग डियर को IUCN रेड लिस्ट में 'लुप्तप्राय' श्रेणी में रखा गया है। ये मुख्य रूप से दक्षिण एशिया व दक्षिण पूर्व एशिया के गीले घास के मैदानों और दलदली क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इनका शिकार मांस, पारंपरिक दवाओं और ट्रॉफी के लिए सींगों की वजह से होता है।

SP_Singh AURGURU Editor