यूजीसी गाइडलाइंस पर जनरल कैटेगरी के आंदोलन को कलराज मिश्र, कुमार विश्वास और मनोज मुंतसिर जैसी हस्तियों का समर्थन, भाजपा के भीतर से भी बागी स्वर और विपक्ष की चुप्पी, यह सब मोदी सरकार के लिए बनता जा रहा है ‘पॉलिटिकल ट्रैप’

नई दिल्ली। नई यूजीसी गाइडलाइंस को लेकर देश भर में जनरल कैटेगरी के छात्रों का विरोध अब केवल शैक्षणिक असंतोष नहीं रहा, बल्कि यह एक व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बहस का रूप ले चुका है। कैंपस से लेकर सड़कों तक चल रहे प्रदर्शनों को वह समर्थन मिल रहा है जिसकी सरकार को शायद अपेक्षा नहीं थी और यही कारण है कि यह मामला धीरे-धीरे मोदी सरकार के गले की फांस बनता दिख रहा है।

Jan 28, 2026 - 19:20
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यूजीसी गाइडलाइंस पर जनरल कैटेगरी के आंदोलन को कलराज मिश्र, कुमार विश्वास और मनोज मुंतसिर जैसी हस्तियों का समर्थन, भाजपा के भीतर से भी बागी स्वर और विपक्ष की चुप्पी, यह सब मोदी सरकार के लिए बनता जा रहा है ‘पॉलिटिकल ट्रैप’

जनरल कैटेगरी के छात्रों का आरोप है कि नई गाइडलाइंस अवसरों की समानता को कमजोर करती हैं और व्यवस्था पर सीधा असर डालती हैं। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया पहले से ही दबाव में है, ऐसे में यह बदलाव असंतुलन को और बढ़ाएगा। यही आशंका अब आंदोलन की धुरी बन चुकी है। सवर्ण छात्रों की सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि इन गाइडलाइंस में उन्हें स्वघोषित अपराधी मान लिया गया है कि वे जातिगत भेदभाव करते हैं। ये छात्र सवाल उठाते हैं कि अगर उनके साथ जातिगत भेदभाव होता है तो इस पर कार्रवाई के लिए गाइडलाइंस में कोई प्रावधान नहीं है।

कलराज मिश्र ने खुलकर कहा- यूजीसी गाइडलाइंस असंवैधानिक

मामले की गंभीरता तब बढ़ गई जब भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने गाइडलाइंस पर सवाल उठाते हुए इसे सामाजिक संतुलन के लिए घातक बताया। कलराज मिश्र ने यूजीसी के नए नियमों को असंवैधानिक बताते हुए कहा है कि इसे वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नियम में इस तरह की प्रावधान नहीं होना चाहिए जो सामान्य वर्ग के लोगों के लिए असमान अनुभव पैदा करे और शिकायत का अधिकार सबके लिए समान होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए झूठी शिकायत के खिलाफ दंड का प्रावधान होना चाहिए, जो वर्तमान नियमों में नहीं है।

कुमार विश्वास ने कविता से कसा तंज

प्रख्यात कवि कुमार विश्वास ने यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सार्वजनिक समर्थन जताया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया (X) पोस्ट पर दिवंगत रमेश रंजन मिश्र की कविता साझा करते हुए लिखा- "चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा…"
और इसके साथ कुमार विश्वास ने #UGC_RollBack हैशटैग भी लगाया।

इस पोस्ट के जरिए उन्होंने गाइडलाइंस के विरोधियों के साथ अपना विरोध जताया है और नियमों को वापस लेने की मांग की है।

मनोज मुंतशिर का बयान

गीतकार और कवि मनोज मुंतशिर ने यूजीसी बिल को काला कानून कहा है और प्रधानमंत्री से हाथ जोड़कर इसे वापस लेने की अपील की है। उन्होंने एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर साझा की जिसमें कहा गया कि सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलने चाहिए और किसी एक समूह को खुश करने के लिए दूसरे को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर किसी बाग में एक पौधा छोटा रह गया तो इसका मतलब यह नहीं कि बाकी को ऊपर से काट देना चाहिए।”
मनोज मुंतशिर ने यह भी कहा कि यदि जातियों की राजनीति आगे बढ़ती है तो देश हार जाएगा।

इन बयानों ने यूजीसी के नए नियमों पर विवाद को राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से गहरा कर दिया है, क्योंकि यह केवल छात्रों या संगठनों का विरोध नहीं रहा, बल्कि सुप्रसिद्ध हस्तियों ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखी है।

भाजपा के भीतर असहजता और खुला विरोध

Top of FormBottom of Formइन हस्तियों के बयानों के साथ ही कई राज्यों और जिलों में भाजपा के विधायक और पदाधिकारी खुलकर यूजीसी गाइडलाइंस के विरोध में सामने आ गए हैं। कुछ स्थानों पर भाजपा पदाधिकारियों द्वारा पदों से इस्तीफे दिए जाने की खबरों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। यह संकेत है कि असंतोष केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा।

विपक्ष की चुप्पी और मायावती का समर्थन, विपक्ष के दोनों हाथों में लड्डू

दिलचस्प पहलू यह है कि कांग्रेस समेत अधिकांश विपक्षी दल इस मुद्दे पर खामोश नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि वे इसे भाजपा की ‘आंतरिक उलझन’ मानकर दूरी बनाए हुए हैं। विपक्ष को यूजीसी गाइडलाइंस को लेकर हो रहे बवाल में दोनों ही हाथों में लड्डू नजर आ रहे हैं। केंद्र सरकार अगर गाइडलाइंस से पीछे हटती है तो विपक्ष द्वारा दलित और पिछड़ा विरोधी होने का टैग लगाया जाएगा और अगर सरकार इस पर कायम रहती है तो भी विपक्ष को अपना लाभ दिखता है। विपक्ष को लगता है कि नाराज सामान्य जातियों के वोट उसे बैठे-बिठाये मिल सकते हैं।
हालांकि बसपा प्रमुख मायावती ने यूजीसी गाइडलाइंस का समर्थन किया है और इसे सामाजिक न्याय की दिशा में जरूरी कदम बताया है। इससे बहस और तीखी हो गई है, क्योंकि एक ओर जनरल कैटेगरी का आक्रोश है, तो दूसरी ओर सामाजिक संतुलन का तर्क।

मोदी सरकार के लिए क्यों संकट बन गया यह मुद्दा

मोदी सरकार के लिए यह मामला इसलिए पेचीदा है क्योंकि विरोध का नेतृत्व छात्र कर रहे हैं, जो भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करते हैं। असंतोष भाजपा के भीतर से भी सामने आ रहा है, जिससे संदेश गलत जा रहा है। विपक्ष की चुप्पी सरकार को अकेला छोड़ रही है, जहां हर प्रतिक्रिया सीधे सत्तापक्ष पर जा रही है।

यदि सरकार ने समय रहते संवाद और संशोधन का रास्ता नहीं अपनाया, तो यह आंदोलन शिक्षा नीति से निकलकर व्यापक राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। फिलहाल यूजीसी गाइडलाइंस न सिर्फ कैंपस में, बल्कि सत्ता के गलियारों में भी बेचैनी बढ़ा चुकी हैं और यही बेचैनी आने वाले दिनों में सरकार की परीक्षा लेने वाली है।

SP_Singh AURGURU Editor