सुप्रीम कोर्ट ने पूछा– कैशलेस इलाज योजना देशभर में क्यों नहीं लागू हुई?

आगरा/नई दिल्ली।  देशभर में सड़क हादसों में घायल लोगों के कैशलेस इलाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सख्त जवाब मांगा है। कोर्ट ने 14 मार्च 2025 की डेडलाइन मिस करने पर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को 28 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश आगरा के अधिवक्ता केसी जैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

Apr 9, 2025 - 20:30
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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा– कैशलेस इलाज योजना देशभर में क्यों नहीं लागू हुई?

न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुआन की पीठ ने यह स्पष्ट कर दिया कि अगर समय पर योजना लागू न करने के लिए संतोषजनक कारण नहीं मिला, तो केंद्र सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जा सकती है।

हर साल 4.5 लाख घायल – गोल्डन आवर में इलाज जरूरी

सड़क हादसों में घायल व्यक्तियों को तत्काल इलाज दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 8 जनवरी 2025 को सरकार को आदेश दिया था कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 162(2) के तहत देशभर में कैशलेस इलाज योजना शुरू की जाए। आदेश में साफ कहा गया था कि 14 मार्च 2025 तक यह योजना लागू हो जानी चाहिए।

योजना बनी, लेकिन लागू नहीं हुई

सरकार ने बताया कि योजना का प्रारूप तैयार कर लिया गया है और पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यह चंडीगढ़, असम, पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा और पुडुचेरी में लागू की गई है। इसके तहत सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को 7 दिन तक ₹1.5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। लेकिन देशव्यापी क्रियान्वयन न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है।

सरकार की लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बैनर्जी ने बताया कि तकनीकी दिक्कतों के कारण योजना लागू नहीं हो पाई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को 28 अप्रैल 2025 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर यह बताने का आदेश दिया है कि अभी तक आदेश का अनुपालन क्यों नहीं हुआ।

अवमानना की चेतावनी

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और उज्ज्वल भुआन की पीठ ने कहा कि अगर कोर्ट को यह संतोषजनक कारण नहीं मिले कि योजना समय पर लागू क्यों नहीं हुई, तो केंद्र सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जा सकती है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि, जब तक शीर्ष अधिकारियों को अदालत में नहीं बुलाया जाता, तब तक वे कोर्ट के आदेशों की गंभीरता को नहीं समझते हैं।

क्या बोले- याचिकाकर्ता केसी जैन एडवोकेट

याचिकाकर्ता अधिवक्ता केसी जैन ने स्वयं ही इस मामले की पैरवी भी की। श्री जैन ने कहा कि, "यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का ईमानदारी से पालन हो, तो यह योजना हजारों जिंदगियों को बचा सकती है। सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में यह एक ऐतिहासिक कदम होगा।"

श्री जैन ने बताया कि भारत में सड़क हादसों में घायल होने वाले लोगों की संख्या चिंताजनक है-

वर्ष        घायल लोग

2018      4,64,715

2019      4,49,360

2020      3,46,747 (कोविड वर्ष)

2021      3,84,448 (कोविड वर्ष)

2022      4,43,366

श्री जैन ने कहा कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि हर साल औसतन 4.5 लाख से ज्यादा लोग सड़क दुर्घटनाओं में घायल होते हैं। यदि यह कैशलेस इलाज योजना लागू होती है तो लाखों लोगों को तत्काल इलाज मिल सकेगा और हजारों जानें बचाई जा सकती हैं।

SP_Singh AURGURU Editor