सुप्रीम कोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी उच्च-शक्ति समिति को सौंपी
मथुरा। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्थित वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी जी महाराज मंदिर के दैनिक कार्यों की देखरेख के लिए पूर्व न्यायाधीश अशोक कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च-शक्ति समिति का गठन किया है। यह समिति मंदिर के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ परिसर और आसपास के क्षेत्र के समग्र विकास की योजना बनाएगी।
यूपी सरकार के अध्यादेश की संवैधानिकता पर इलाहाबाद हाई कोर्ट करेगा एक वर्ष के अंदर अंतिम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा पारित अध्यादेश की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाले मामलों को इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष सौंप दिया है। हाई कोर्ट जब तक इस पर फैसला नहीं करता, तब तक मंदिर का प्रबंधन सुप्रीम कोर्ट की गठित समिति द्वारा संभाला जाएगा। अदालत ने अध्यादेश के उन प्रावधानों पर भी रोक लगाई है, जो राज्य को मंदिर प्रबंधन के लिए ट्रस्ट गठित करने की अनुमति देते हैं, ताकि उच्च न्यायालय के फैसले तक किसी भी तरह का अनुचित प्रबंधन न हो।
उच्च-शक्ति समिति के ये होंगे सदस्य
सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति अशोक कुमार (इलाहाबाद हाई कोर्ट, अध्यक्ष), मुकेश मिश्रा (सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सदस्य), जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मथुरा (सदस्य), मुंसिफ/सिविल जज, मथुरा (सदस्य), जिला मजिस्ट्रेट/कलेक्टर, मथुरा (सदस्य-सह-सचिव), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मथुरा (सदस्य), नगर आयुक्त, मथुरा (सदस्य), उपाध्यक्ष, मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण (सदस्य), एक प्रख्यात वास्तुकार (अध्यक्ष द्वारा नामित सदस्य), भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का प्रतिनिधि (सदस्य), दोनों गोस्वामी समूहों से 2-2 प्रतिनिधि (सदस्य)।
अध्यक्ष को मासिक 2 लाख रुपये मानदेय, सचिवीय एवं परिवहन सुविधाएं मंदिर कोष से दी जाएंगी। श्री मुकेश मिश्रा को ₹1 लाख प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा।
समिति मंदिर परिसर में बुनियादी सुविधाओं जैसे कार्यशील शौचालय, स्वच्छ पेयजल, आश्रय, बैठने की व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष गलियारे, वृद्धों, महिलाओं, बच्चों एवं दिव्यांगजन के लिए विशेष प्रबंध सुनिश्चित करेगी। मंदिर और आसपास के क्षेत्र का समग्र विकास योजना के तहत निजी जमीन को समझौते से खरीदा जाएगा, अन्यथा राज्य कानूनी प्रक्रिया अपनाएगा। पूजा, सेवा और प्रसाद अर्पण के अलावा मंदिर प्रबंधन में केवल चार गोस्वामी प्रतिनिधियों का हस्तक्षेप होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह अध्यादेश की संवैधानिक वैधता पर दायर याचिकाओं पर एक वर्ष के भीतर निर्णय दे। साथ ही कोर्ट ने 15 मई 2025 के आदेश को भी वापस ले लिया, जिसमें राज्य को वृंदावन कॉरिडोर विकास परियोजना के लिए मंदिर निधि का उपयोग करने की अनुमति मिली थी।