सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई की तीन-भाषा नीति पर रोक लगाने से किया इनकार, मुख्य न्यायाधीश बोले- 'भाषा सीखना कभी व्यर्थ नहीं जाता'

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की नई तीन-भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि इस स्तर पर नीति के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं बनता। हालांकि, अदालत ने इस नीति की वैधता और इसके क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई जारी रखने का निर्णय लेते हुए केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी से जवाब तलब किया है।

Jul 14, 2026 - 18:22
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सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई की तीन-भाषा नीति पर रोक लगाने से किया इनकार, मुख्य न्यायाधीश बोले- 'भाषा सीखना कभी व्यर्थ नहीं जाता'

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि नई भाषा व्यवस्था लागू होने से कक्षा 9 के विद्यार्थियों को पहले से पढ़ी जा रही भाषा बदलनी पड़ सकती है। उनका यह भी कहना था कि देशभर के अनेक स्कूलों में पर्याप्त भाषा शिक्षक और आवश्यक पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में नीति को लागू करने से पहले आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी की जानी चाहिए।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा, कोई भी भाषा सीखना कभी व्यर्थ नहीं जाता। अदालत ने इसी आधार पर फिलहाल तीन-भाषा नीति पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया और कहा कि मामले की विस्तृत सुनवाई बाद में की जाएगी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि कई भारतीय भाषाओं की एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकें अभी तक उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही विभिन्न भाषाओं के प्रशिक्षित शिक्षकों की भी कमी है। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि नई व्यवस्था लागू होने से विदेशी भाषाएं पढ़ाने वाले शिक्षकों के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी को नोटिस जारी करते हुए 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने संकेत दिया कि अगली सुनवाई में नीति की संवैधानिक वैधता के साथ-साथ उसके व्यावहारिक पक्ष, जैसे शिक्षकों की उपलब्धता, पाठ्यपुस्तकों की व्यवस्था और अन्य बुनियादी तैयारियों की भी विस्तार से समीक्षा की जाएगी।

सुनवाई के दौरान शिक्षकों के खिलाफ संभावित कार्रवाई का मुद्दा भी उठा। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि केवल तीन-भाषा नीति लागू न कर पाने के कारण किसी शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, तो अदालत आवश्यक होने पर हस्तक्षेप करेगी।

उल्लेखनीय है कि सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के लिए संशोधित तीन-भाषा व्यवस्था लागू की है। नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होना अनिवार्य है। इसी नीति को चुनौती देते हुए विभिन्न अभिभावकों, शिक्षकों और संगठनों ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

SP_Singh AURGURU Editor