सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस शेखर कुमार यादव के बयान का विवरण मांगा
प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव का वीएचपी के कार्यक्रम में दिए गए बयान का मुद्दा गहरा गया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से शिकायत की गई थी। अब इस पर सुप्रीम कोर्ट एक्शन मोड में दिख रहा है। इस संबंध में अब सामने आया है कि सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव की ओर से दिए गए एक भाषण की अखबारों में प्रकाशित रिपोर्ट का संज्ञान लिया है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस संबंध में हाई कोर्ट से विवरण और जानकारी मांगी गई है। यह मामला अभी विचाराधीन है। दरअसल, उन्होंने बयान दिया था कि कानून तो बहुसंख्यकों से चलता है।
जस्टिस शेखर कुमार यादव के बयान पर विवाद लगातार गहराया हुआ है। कई चर्चित वकीलों ने इस मामले में जस्टिस यादव के बयान की निंदा की है। जस्टिस शेखर कुमार यादव के बयान का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। कैंपेन फॉर ज्यूडीशियल एकाउंटेंबिलिटी एंड रिफॉर्म्स ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को चिट्ठी लिखकर बयान की शिकायत की थी।
सीजेएआर ने जस्टिस शेखर कुमार यादव के बयान की इन-हाउस जांच की मांग की। जानकारी के अनुसार, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने मामले का संज्ञान मीडिया रिपोर्ट पर लिया है। मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर कहा गया है कि मामला विचाराधीन है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव ने 8 नवंबर को प्रयागराज में विश्व हिंदू परिषद की लीगल सेल के एक कार्यक्रम में विवादित बयान दिया था। जस्टिस शेखर ने कार्यक्रम में कहा कि मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि हिंदुस्तान बहुसंख्यकों की इच्छा के हिसाब से चलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मैं यह बात हाई कोर्ट के जज के तौर पर नहीं बोल रहा, परिवार या समाज में जो बात ज्यादा लोगों को मंजूर होती है। वही स्वीकार की जाती है।
जस्टिस यादव के बयान पर राज्यसभा सांसद और वकील कपिल सिब्बल ने बड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने जस्टिस यादव के बयान पर कहा कि ये भारत को तोड़ने वाली बात है। उन्होंने कहा कि राजनेता भी ऐसी बात नहीं करते हैं। वह तो संविधान की रक्षा के पद पर बैठे हैं। उनको ये शब्द शोभा नहीं देते हैं। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि ऐसे बयान देने वाले जज की नियुक्त कैसे होती है? ऐसे बयान देने की लोगों की हिम्मत कैसे होती है?
मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि पिछले 10 साल में ही ऐसा क्यों हो रहा है? कुछ लोग हैं जो ऐसे बयान देते हैं और इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो जाते हैं। इसके बाद राज्यसभा सदस्य बन जाते हैं। मुझे लगता है कि सुप्रीम कोर्ट को इस प्रकार के मामले में सख्त कदम उठाना चाहिए। उस शख्स को कुर्सी पर नहीं बैठने देना चाहिए। उनके पास एक भी केस नहीं जाना चाहिए।