सुप्रीम कोर्ट का देश भर के हाई कोर्ट को अलेटीमेटम, निष्पादन याचिकाओं को जल्द निपटाएं

सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में 8.82 लाख से अधिक निष्पादन याचिकाओं के पेंडिंग रहने पर गहरी चिंता जताई है। पीठ ने सभी हाईकोर्ट को अल्टीमेटम दिया है कि वे जल्द से जल्द इन याचिकाओं का निपटारा करें, अन्यथा पीठासीन अधिकारी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि फैसले लागू होने में सालों लगना न्याय का उपहास है।

Oct 19, 2025 - 22:13
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सुप्रीम कोर्ट का देश भर के हाई कोर्ट को अलेटीमेटम, निष्पादन याचिकाओं को जल्द निपटाएं


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश भर की विभिन्न अदालतों में 8.82 लाख से ज्यादा 'निष्पादन याचिकाओं' के लंबित रहने को बेहद निराशाजनक और चिंताजनक बताया है। निष्पादन याचिका उसे कहते हैं जिनपर फैसला सुनाया जा चुका है लेकिन उसे लागू नहीं करवाया जा सका हो। यानी कि जब कोई नागरिक विवाद अदालत में सुलझ जाता है और हारने वाला पक्ष फैसला नहीं मानता, तो जीतने वाला पक्ष अदालत में 'निष्पादन याचिका' दायर करता है। यह याचिका अदालत के फैसले को जमीन पर उतारने का काम करती है, यानी आदेश का पालन करवाना सुनिश्चित करती है।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल की पीठ ने 6 मार्च के अपने उस आदेश के अनुपालन की समीक्षा करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें सभी उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया गया था कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली दीवानी अदालतों को छह महीने के भीतर निष्पादन याचिकाओं पर फैसला सुनाने का निर्देश दें। लेकिन यह काम समय से हो नहीं सका।  
 
अब सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि निष्पादन याचिका जल्द से जल्द निपटाया जाए नहीं तो उसके निर्देश के अनुसार पीठासीन अधिकारी किसी भी देरी के लिए उत्तरदायी होंगे।

पीठ ने कहा कि हमें जो आंकड़े प्राप्त हुए हैं, वे बेहद निराशाजनक हैं। देश भर में लंबित नष्पादन याचिकाओं के आंकड़े चिंताजनक हैं। आज की तारीख में देश भर में 8,82,578 निष्पादन संबंधी याचिकाएं लंबित हैं। पीठ ने कहा कि 6 मार्च से पिछले छह महीनों में कुल 3,38,685 निष्पादन याचिकाओं पर निर्णय और निपटारा किया गया है। पीठ ने 16 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा, "जैसा कि हमारे मुख्य फैसले में कहा गया है, अगर डिक्री पारित होने के बाद भी उसे लागू करने में सालों-साल लगेंगे, तो इसका कोई मतलब नहीं है और यह न्याय का उपहास होगा।

शीर्ष अदालत ने कहा कि दुर्भाग्य से, कर्नाटक उच्च न्यायालय हमें इस संबंध में आवश्यक आंकड़े उपलब्ध कराने में विफल रहा है। "शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री से अनुरोध है कि वह एक बार फिर कर्नाटक उच्च न्यायालय को स्मरण कराए कि वह पिछले छह महीनों में निष्पादन याचिकाओं के निपटारे और आज की तारीख तक लंबित याचिकाओं के संबंध में आंकड़े उपलब्ध कराए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "कर्नाटक उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को यह स्पष्टीकरण देना होगा कि वह हमें आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने में क्यों विफल रहे। इस संबंध में स्पष्टीकरण देने के लिए उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को दो सप्ताह का समय दिया जाता है।"