संघ प्रमुख मोहन भागवत पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा वार: हिंदुओं संख्या बढ़ानी है तो खुद शादी कर संतान उत्पन्न करें, कई और राष्ट्रीय मुद्दों पर साधा निशाना
-आरके सिंह- बरेली। देश की धार्मिक और सामाजिक बहस के बीच शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने हिंदू जनसंख्या बढ़ाने के मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि यह इतना आवश्यक है, तो समाज को दिशा देने वाले लोगों को स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।
खुद शादी कर उदाहरण बनें
बरेली स्थित देवभूमि इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट परिसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तंज कसते हुए कहा कि अगर हिंदुओं की संख्या बढ़ाने की चिंता है, तो संघ प्रमुख को खुद विवाह कर संतान उत्पन्न करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो बात समाज को बताई जाती है, उसे पहले अपने जीवन में लागू करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि धर्म और जनसंख्या जैसे संवेदनशील विषयों पर बयान देने से पहले नेताओं को अपने आचरण पर ध्यान देना चाहिए। समाज में संतुलन और सद्भाव बनाए रखना आवश्यक है।
भागवत के ‘तीन बच्चे’ संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया
दरअसल, संघ प्रमुख मोहन भागवत कई बार यह कह चुके हैं कि हिंदुओं को कम से कम तीन बच्चे पैदा करने चाहिए। हाल ही में मथुरा दौरे के दौरान भी उन्होंने कहा था कि तीन संतान होने से परिवार अधिक संतुलित और स्वस्थ बनता है। इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने यह टिप्पणी की।
धार्मिक यात्रा और परंपरा का उल्लेख
शंकराचार्य ने बताया कि वे वाराणसी से दिल्ली होते हुए ऋषिकेश जा रहे हैं, जहां से 8 अप्रैल को परंपरा के अनुसार बद्रीनाथ धाम के लिए ज्योति का घड़ा रवाना किया जाएगा। उन्होंने बरेली को धर्मनगरी बताते हुए यहां के विद्वानों की सराहना भी की।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार गो-माता की रक्षा के लिए कानून लाती है तो वे उसका समर्थन करेंगे। उन्होंने खुद को किसी राजनीतिक दल से अलग बताते हुए कहा कि जो उनकी बात सुनेगा, वे उसके साथ खड़े होंगे।
लव जिहाद और धर्मांतरण केवल चुनावी मुद्दे
शंकराचार्य ने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही लव जिहाद और धर्मांतरण जैसे मुद्दे जनता का ध्यान भटकाने के लिए उठाए जाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने मूल मुद्दों पर ही वोट करें।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी टिप्पणी
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव पर उन्होंने कहा कि दुनिया के विद्वान इस पर मौन हैं, जो मानवता के लिए चिंताजनक है। उन्होंने संकेत दिया कि भारत की पारंपरिक गुटनिरपेक्ष नीति पर भी सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आम जनता महंगाई और गैस संकट से जूझ रही है, लेकिन सरकार को इसका अहसास नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री के रुख पर भी अप्रत्यक्ष सवाल उठाए।