Tag: journalist brij khandelwal

मई दिवस 2025ः अप्रासंगिक हो चुके श्रमिक संगठन, कभी वामप...

मई दिवस 2025 के मौके पर भारत में ट्रेड यूनियनों की गिरती प्रासंगिकता सवालों के घ...

क्या भारत की न्यायपालिका एक गैर-निर्वाचित सुपर विधायिका...

हाल के दिनों में भारत की उच्च न्यायपालिका के फ़ैसलों और टिप्पणियों ने एक ख़तरनाक...

"विरासत की चुप्पी और विकास का धोखा: आगरा की अधूरी कहानी"

विश्व विरासत दिवस आ रहा है। एक बार फिर यही सवाल सामने है कि अपनी पहचान के लिए सं...

"छोटा सुंदर है" की चरखेबाजी वाली सोच ने भारत की औद्योगि...

-बृज खंडेलवाल- भारत ने आज़ादी के बाद अपने इतिहास में कई महत्वपूर्ण अवसरों को ...

भारत में व्यवसाय एक सभ्यतागत विरासत, स्टार्ट-अप संस्कृत...

भारत की व्यावसायिक परंपरा कोई आधुनिक आविष्कार नहीं, बल्कि सदियों पुरानी एक जीवंत...

जाएं तो जाएं कहां, क्यों उपेक्षित फील करते हैं आगरावासी?

क्या मुग़ल और अंग्रेजी साम्राज्य का महत्वपूर्ण केंद्र होने का खामियाजा भुगत रहा ...

काला रंग: ब्रह्मांड की सच्चाई और समाज की सोच 

"हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं", बॉलीवुड फिल्मों ने गोरेपन को लेकर इतनी भ्...

मोदी जी, सीखो जी!  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नौकरशाही को सीम...

बसपा का भविष्य अनिश्चितता के भंवर में, दलित राजनीति नए ...

उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति नये मोड़ पर आ खड़ी हुई है। बहुजन समाज पार्टी के लग...

  जाति और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण: भारतीय राजनीति का  गे...

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने जातिगत अंकगणित या समीकरण बिठाते हुए लंबे ...