ताज नगरी से टकराया विश्व सिनेमा का मंच, आगरा के संकल्प भारद्वाज की फिल्म उस्ताद बंटू का इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल रॉटरडैम 2026 के प्रतिष्ठित हार्बर सेक्शन में चयन
आगरा। शहर के लिए यह क्षण गर्व का है। ताज नगरी के युवा अभिनेता संकल्प भारद्वाज भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के मंच पर रोशन करने जा रहे हैं। अर्ष जैन के निर्देशन में बनी उनकी फ़िल्म उस्ताद बंटू का चयन विश्व-प्रसिद्ध इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल रॉटरडैम 2026 के प्रतिष्ठित हार्बर सेक्शन में हुआ है, जो साहसी, प्रयोगधर्मी और प्रभावशाली सिनेमा के लिए वैश्विक पहचान रखता है।
हार्बर सेक्शन में चयन, बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि
इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल रॉटरडैम का हार्बर सेक्शन दुनिया भर से चुनी गई उन फ़िल्मों को मंच देता है, जो सिनेमा की परंपरागत सीमाओं को तोड़कर नई भाषा और संवेदना गढ़ती हैं। ‘उस्ताद बंटू’ का इस सेक्शन में चयन न केवल फ़िल्म की गुणवत्ता का प्रमाण है, बल्कि आगरा जैसे ऐतिहासिक शहर से निकलकर वैश्विक सिनेमा तक पहुंची एक सशक्त कहानी भी है।
निर्माण और पारिवारिक प्रेरणा
संकल्प भारद्वाज की मां, वरिष्ठ महिला साहित्यकार डॉ. मधु भारद्वाज ने बताया कि फ़िल्म का निर्माण 1719 फ़िल्म फ़ैक्ट्री और येलो ऑरेंज के बैनर तले किया गया है। यह फ़िल्म संकल्प की अभिनय क्षमता के साथ-साथ उनके समर्पण, प्रशिक्षण और निरंतर संघर्ष की जीवंत मिसाल है।
रेड सी इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल से मिली वैश्विक फंडिंग
डॉ. मधु भारद्वाज ने जानकारी दी कि ‘उस्ताद बंटू’ इससे पहले आईएफ़एफ़आई के अंतर्गत आयोजित वेव्स बाज़ार के वर्क-इन-प्रोग्रेस लैब में भी चयनित हो चुकी है, जहां इसे प्रसाद लैब्स द्वारा विशेष कलर करेक्शन मेंशन मिला।
इसके अलावा, फ़िल्म को रेड सी इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल से महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय फंडिंग भी प्राप्त हुई है, जो इसकी वैश्विक स्वीकार्यता और अंतरराष्ट्रीय वितरण संभावनाओं को मजबूत करती है।
रंगमंच से सिनेमा तक, सशक्त अभिनय यात्रा
संकल्प भारद्वाज का सफ़र केवल सिनेमा तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने 2023 और 2024 में एलटीजी रिपर्टरी के साथ कार्य किया, जो भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत देश की अग्रणी रंगमंच संस्थाओं में गिनी जाती है।
इसके साथ ही वे चर्चित शॉर्ट फ़िल्म ‘हेल्प योरसेल्फ’ में भी नज़र आए, जिसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार और सराहनाएं मिलीं।
‘उस्ताद बंटू’ और संकल्प भारद्वाज की यह उपलब्धि उन हज़ारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो छोटे शहरों से बड़े सपने देखते हैं। यह साबित करता है कि प्रतिभा, परिश्रम और निरंतर साधना के बल पर वैश्विक मंच तक पहुंचना संभव है।