ताज साहित्य उत्सव में अभिनेता राजपाल यादव बोले- अपने भीतर झांको, हर इंसान धमाका है, उत्सव के पहले दिन फिल्म, साहित्य और संगीत का जीवंत संगम, हंसी–ठिठोली के बीच हुआ गहन आत्मीय मंथन
आगरा। ताज साहित्य उत्सव के अंतर्गत आयोजित फिल्म, साहित्य और संगीत सत्र आगरा के सांस्कृतिक कैलेंडर में एक यादगार अध्याय बनकर उभरा, जहां मंच पर शब्द, स्वर और संवेदनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। अभिनेता राजपाल यादव, गीतकार पंछी जालौनवी, आईएएस डॉ. हरिओम, आईएएस पवन कुमार की मौजूदगी ने सत्र को विचारोत्तेजक ही नहीं, बल्कि ठहाकों से भरपूर बना दिया। पूरे सत्र का संचालन टीवी एंकर अनुराग मुस्कान ने अपने चुटीले, धारदार और संवादात्मक अंदाज में किया।
अभिनेता राजपाल यादव ने कहा, मैं 25 साल से इस दुनिया से लड़ रहा हूं कि मैं सिर्फ कॉमेडियन नहीं हूं। हास्य भी एक गंभीर विधा है। आठ रस फीके पड़ जाते हैं, जब हास्य आता है। शांत रस की मुस्कुराहट ही असली हास्य है। उन्होंने मनोरंजन को विज्ञान बताते हुए कहा कि कलाकार किसी एक रस में बंधा नहीं होता, वह सभी रसों का ज्ञाता होता है।
राजपाल यादव ने युवाओं और विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा, अपने भीतर झांको, हर आदमी अपने आप में धमाका है। किताबें पढ़ो, आपके भीतर छुपे सारे धमाके बाहर आ जाएंगे। जीवन में निराशा लाने वाले कारण बहुत हैं, लेकिन उनसे ऊपर उठना ही असली कला है।
गीतकार पंछी जालौनवी से जब आजकल के गीतों में अटपटे शब्दों और ‘दस बहाने’ जैसे ट्रेंड पर सवाल किया गया, तो उन्होंने गंभीरता से उत्तर दिया कि आज गीत धुनों पर लिखे जा रहे हैं। फिल्म की सिचुएशन के अनुसार गीत लिखना एक क्राफ्ट है। म्यूजिकल हिट और लिरिकल हिट अलग-अलग चीजें हैं। लेखक को लिरिकल हिट की लड़ाई लड़नी चाहिए, उन्होंने कहा।
सत्र का एक अविस्मरणीय क्षण तब आया जब आईएएस पवन कुमार ने अपनी जादुई आवाज में-
“मैं तेरे प्यार का मारा हुआ हूं,
सिकन्दर हूं मगर हारा हुआ हूं…”
गुनगुनाया। उनकी प्रस्तुति ने सभागार में मौजूद हर श्रोता को चकित कर दिया।
आईएएस डॉ. हरिओम और मंडलायुक्त शैलेन्द्र कुमार सिंह ने भी चर्चा में अपने विचार रखे। वहीं कवि पवन आगरी ने कहा कि हास्य और व्यंग्य एक-दूसरे के पूरक हैं। व्यंग्य के बिना हास्य अधूरा लगता है।
इस अवसर पर जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल पुनीत वशिष्ठ, उद्यमी पूरन डावर सहित शिक्षा, साहित्य और संस्कृति से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
बच्चों और अभिभावकों को राजपाल यादव की दो टूक सलाह
कार्यक्रम के दौरान राजपाल यादव ने बच्चों और उनके अभिभावकों से स्पष्ट शब्दों में कहा, नंबर, रंग और कमजोरी पर कभी भरोसा मत करना। अगर पढ़ाई में नंबर अच्छे नहीं हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप कमजोर हैं। आप किसी और क्षेत्र के लिए बने हैं। अपने रंग, किसी भी कमी या रिजल्ट के नंबर से खुद को कम आंकने की भूल मत करो। हर इंसान में कोई न कोई खासियत जरूर होती है।
हंसी, संवेदना, आत्मचिंतन और प्रेरणा से भरा यह सत्र ताज साहित्य उत्सव की आत्मा को पूरी तरह प्रतिबिंबित करता नजर आया।