तरुण चुघ की सख़्त नसीहत, योगी की फटकार, मतदाता सूची पर लापरवाही की तो हार तय
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अब आर-पार की रणनीति अपना ली है। रविवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हुई बड़ी बैठक में पार्टी ने साफ संदेश दिया, अगले पाँच दिन निर्णायक हैं और संगठन अपनी पूरी ताक़त झोंक देगा। बैठक में सभी सांसद, विधायक, जिलाध्यक्ष, विधानसभा क्षेत्र के SIR संयोजक, प्रदेश व क्षेत्रीय पदाधिकारी बुलाए गए।
एसआईआर पर एक्शन मोड में भाजपा, लखनऊ में महाबैठक, अगले पांच दिन निर्णायक
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अब आर-पार की रणनीति अपना ली है। रविवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हुई बड़ी बैठक में पार्टी ने साफ संदेश दिया, अगले पाँच दिन निर्णायक हैं और संगठन अपनी पूरी ताक़त झोंक देगा। बैठक में सभी सांसद, विधायक, जिलाध्यक्ष, विधानसभा क्षेत्र के SIR संयोजक, प्रदेश व क्षेत्रीय पदाधिकारी बुलाए गए।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने तीखे शब्दों में सांसद-विधायकों को नसीहत के साथ चेतावनी दी। उन्होंने कहा जिसे चुनावी खुजाल मिटानी है, वह SIR में जुट जाए। जो अभी काम कर लेगा, वही अगले 20 साल तक विधायक-सांसद बना रहेगा।
तरुण चुघ ने दो टूक कहा कि जिसे चुनाव नहीं लड़ना है, वह सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को पहले ही बता दे, लेकिन SIR में पार्टी के साथ धोखा बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अभी नाम जोड़ने का सही समय है, बाद में फॉर्म-6 की औपचारिकताएं भारी पड़ेंगी।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने संगठन के मंच से SIR प्रगति की “पोल” खोल दी। जिन विधानसभा क्षेत्रों में काम कमजोर रहा, उनकी सूची सार्वजनिक की गई। आंकड़ों में लखनऊ कैंट, लखनऊ उत्तरी-दक्षिणी, हरदोई, मिल्कीपुर, आगरा दक्षिण, लखीमपुर जैसे क्षेत्र सामने आए, जहां शिफ्टेड, लापता और मृतक मतदाताओं की संख्या अधिक बताई गई। सीएम ने कहा कि कई विधानसभाओं में 15–20% नाम अभी भी मिसिंग हैं और 26 दिसंबर तक इन्हें जोड़ने का मौका है।
योगी ने बूथ-स्तर पर सघन जांच के निर्देश दिए। कहा कि ड्राफ्ट सूची देखें, कहीं जीवित मतदाता ‘लापता’ या ‘मृत’ तो नहीं दर्ज। उन्होंने कहा कि संदिग्ध नामों पर आपत्ति ज़रूर लगाएं। फॉर्म-7 और फॉर्म-8 के जरिए दावा-आपत्ति समय पर दाखिल करें, ताकि बाद में शपथपत्र जैसी जटिलताओं से बचा जा सके।
कार्यशाला में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने भी मार्गदर्शन दिया। पार्टी पदाधिकारियों को फॉर्म-7/8 भरने का प्रशिक्षण दिया गया और तय हुआ कि अब जिलों में भी ऐसी कार्यशालाएं होंगी। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने स्पष्ट किया, अभी सबका फोकस SIR पर रहे, मुलाकातें बाद में।
हालांकि बैठक में एक सख़्त संदेश यह भी गया कि SIR को लेकर शीर्ष नेतृत्व सक्रिय है, लेकिन कई सांसद-विधायक अपेक्षित दिलचस्पी नहीं ले रहे। कार्यशाला में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों की गैरहाज़िरी पर असंतोष दिखा। जिन नामों की चर्चा रही, उनमें जितिन प्रसाद, रमेश अवस्थी, हेमा मालिनी, स्मृति ईरानी, संजीव बालियान, भोला सिंह, दिनेश खटीक सहित अन्य शामिल हैं।
निष्कर्ष साफ है भाजपा के लिए SIR अब संगठनात्मक परीक्षा बन चुका है। अगले कुछ दिन यह तय करेंगे कि मतदाता सूची में पकड़ मजबूत होगी या चुनावी गणित बिगड़ेगा। इस बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेई की जन्म जयंती पर होने वाले कार्यक्रमों के लिए भी दिशा-निर्देश दिए गए।