डिब्बों पर टैक्स कम, कागज पर ज्यादाः आगरा का पैकेजिंग उद्योग उलझा टैक्स विसंगति में

आगरा। जीएसटी काउंसिल ने जूता और डिब्बों पर टैक्स दर 12% से घटाकर 5% कर दी है, जिससे व्यापारियों को बड़ी राहत मिली। लेकिन डिब्बे बनाने में इस्तेमाल होने वाले कागज पर टैक्स 12% से बढ़ाकर 18% कर दिया गया है। यह विसंगति पैकेजिंग उद्योग के लिए गंभीर समस्या बन गई है। कारोबारी सवाल कर रहे हैं कि जब तैयार डिब्बे पर 5% टैक्स है तो कच्चे माल यानी कागज पर 18% टैक्स का बोझ क्यों?

Sep 5, 2025 - 19:17
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डिब्बों पर टैक्स कम, कागज पर ज्यादाः आगरा का पैकेजिंग उद्योग उलझा टैक्स विसंगति में
आगरा पेपर पैकिंग एसोसियेशन के अध्यक्ष प्रदीप पुरी और महामंत्री बंटी ग्रोवर।

एसोसिएशन ने आभार के साथ चिंता भी जताई

आगरा पेपर पैकिंग एसोसियेशन की आपात बैठक अध्यक्ष प्रदीप पुरी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में महामंत्री बंटी ग्रोवर, कोषाध्यक्ष प्रदीप अग्रवाल, नितिन शर्मा, ब्रज मोहन अग्रवाल, प्रवीण तलवार, नवीन जैन, गुड्डू बंसल, शैलेंद्र, अंकुर महाजन, अर्पित जैन, अर्पित बंसल, सागर सचदेवा समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में केंद्र सरकार और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का डिब्बों पर जीएसटी घटाने के निर्णय पर आभार जताया गया। साथ ही सभी ने एक स्वर में कहा कि कागज पर टैक्स बढ़ाना उद्योग पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है।

निर्माताओं पर बढ़ा बोझ

व्यापारियों ने कहा कि यह स्थिति उत्पादन इकाइयों को घाटे में धकेल सकती है। 13% का यह अंतर निर्माण लागत बढ़ा रहा है। पहले से ही अमेरिकी बाज़ार की मंदी के कारण ऑर्डर घटे हुए हैं, ऐसे में टैक्स का यह असंतुलन उद्योग को और संकट में डाल देगा।

सरकार से राहत की मांग

बैठक में सर्वसम्मति से तय हुआ कि एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात करेगा। उनसे अनुरोध किया जाएगा कि कागज पर भी टैक्स दर 5% लागू की जाए ताकि पैकेजिंग उद्योग को स्थिरता मिल सके और इकाइयाँ सुचारू रूप से चल सकें।

SP_Singh AURGURU Editor