शिक्षिका ने पुलिस आयुक्त को तथ्य दिखाकर सिकंदरा पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाये

आगरा। सिकंदरा थाना क्षेत्र में महिला शिक्षिका की गंभीर शिकायत को हल्का कर देने के आरोप अब पुलिस आयुक्त तक पहुंच गये हैं। शिक्षिका ने आगरा के पुलिस कमिश्नर के समक्ष सीसीटीवी फुटेज, फ़ोटोग्राफ़ और कॉल लॉग सहित पूरे तथ्यों के साथ पेशी की और सिकंदरा पुलिस की कार्रवाई पर खुलेआम सवाल उठाए।

Dec 6, 2025 - 12:30
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शिक्षिका ने पुलिस आयुक्त को तथ्य दिखाकर सिकंदरा पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाये

शिक्षिका का कहना है कि जिस मामले में सेक्स रैकेट, ड्रग सप्लाई, संदिग्ध गतिविधियों और ऒपरेशन फुटेज जैसे स्पष्ट संकेत थे, उसे सिकंदरा थाने ने जानबूझकर पति–पत्नी विवाद बनाकर दबा दिया।

आवास विकास सेक्टर–11 निवासी महिला शिक्षिका ने पुलिस आयुक्त को बताया कि वह चार महीने से मायके में रह रही थीं। उनकी अनुपस्थिति में पति की शह से घर में संदिग्ध लोगों का आना–जाना बढ़ गया था।

उनका आरोप था कि घर से देह व्यापार, नशीले पदार्थों की आपूर्ति और संदिग्ध गतिविधियां चलाई जा रही थीं। 26 अक्टूबर को उन्होंने 112, 1090 और 1076 पर कॉल करके तत्काल कार्रवाई की मांग की थी।

महिला ने पुलिस आयुक्त को बताया कि उनकी शिकायत पर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तो घर के अंदर से चार महिलाएं और दो युवक मिले। भीड़ की मौजूदगी में सभी को थाने लाया गया।
वायरल फुटेज और तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि पुलिस ने पूरे घर की तलाशी ली, युवक–युवतियों को वाहनों में बैठाकर ले जाया गया और माहौल किसी बड़े ऒपरेशन जैसा था।

पुलिस कमिश्नर के समक्ष शिक्षिका ने कहा कि मैंने शिकायत देह व्यापार का अड्डा चलने, नशा बेचने और संदिग्ध गतिविधियों की दी थी। पर थाने ने सब कुछ हटाकर केवल धारा 151 लगा दी। इतना बड़ा ऑपरेशन कैसे पति-पत्नी का ‘झगड़ा’ बन गया?

शिक्षिका ने यह भी आरोप लगाया कि थाने ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर गलत रिपोर्ट भेजी। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत को वैवाहिक विवाद बताकर मिसरिपोर्ट किया गया। न देह व्यापार की धारा लगी, न एनडीपीएस, न किसी नेटवर्क की जांच हुई।

सिकंदरा पुलिस ने आरोपी पति, तीन युवक, एक युवती और मौके पर मौजूद एक यूट्यूबर तक को धारा 151 में शांति भंग के आरोप में चालान कर दिया।
इसमें देह व्यापार से जुड़ी कोई धारा, एनडीपीएस की कोई जांच, या संभावित गैंग/नेटवर्क की कोई इनक्वायरी नहीं की गई।

महिला ने फुटेज, फोटो और कॉल रिकॉर्ड साक्ष्य के रूप में कमिश्नर को सौंपे।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस आयुक्त ने तथ्यों की जांच कराने की बात कही है।

SP_Singh AURGURU Editor