हाईवे पर अस्थायी बस अड्डेः पुलिस-प्रशासन का कोई अस्तित्व है आगरा में?
आगरा। शहरी क्षेत्र में हाईवे पर रोडवेज बसों के ड्राइवरों की मनमानी चल रही है और आगरा का प्रशासन कुछ नहीं कर पा रहा। ऐसा लग रहा है कि आगरा में प्रशासन का कोई अस्तित्व नहीं रहा है। रोडवेज बसों के चालकों ने हाईवे पर पांच-छह पॊइन्ट पर अस्थायी बस अड्डे बना लिए हैं।
हाईवे की दो लेन ये बसें घेर लेती हैं। इसके बाद ट्रैफिक रेंगने लगता है। जाम भी लगता है, लेकिन जिम्मेदारों को यह नजर नहीं आता।
यूं तो आगरा शहर की सड़कें यातायात जाम से जूझती ही रहती हैं, लेकिन हाईवे पर यह नई समस्या पिछले कुछ सालों से पैदा कर दी गई है। हाईवे पर शहरी क्षेत्र में कई स्थानों पर आधा-आधा घंटे तक रोडवेज बसें खड़ी कर सवारियों का इंतजार किया जाता है।
हाईवे पर जिन पॊइन्ट्स को अस्थायी बस अड्डा बना लिया गया है, वे आईएसबीटी के सामने, भगवान टॊकीज फ्लाईओवर से नीचे उतरते ही अबूलाला दरगाह के सामने, दूसरी लेन पर श्री टॊकीज के सामने, वाटर वर्क्स फ्लाईओवर के नीचे अग्रवन के बराबर, रामबाग फ्लाईओवर और कुबेरपुर में यमुना एक्सप्रेसवे का एंट्री पॊइन्ट और सिकंदरा चौराहा।
आईएसबीटी के सामने बुरे हालात
आईएसबीटी के सामने हाईवे के साथ ही सर्विस रोड पर लाइन से बसें खड़ी देखी जा सकती हैं। यहां सर्विस रोड दो लेन की है। एक लेन बसें घेर लेती हैं। शेष बची एक लेन पर दोनों ओर का ट्रैफिक गुजरता है। सिकंदरा की ओर जाने वाले वाहन तो होते ही हैं, गुरुद्वारा की ओर का ट्रैफिक भी इसी लेन पर आता है। एक लेन से आने और जाने वाला ट्रैफिक गुजर ही नहीं सकता, इसलिए इस पॊइन्ट पर दिन भर जाम लगा रहता है। यहां ट्रैफिक कंट्रोल के नाम पर होमगार्ड खड़े रहते हैं, जो असहाय दिखते हैं। हैरानी की बात यह है कि हाईवे और सर्विस लेन पर घंटों तक बसें खड़ी रहती हैं, लेकिन इन्हें कोई रोकता नहीं।
अबूलाला दरगाह के सामने
कुछ समय पहले भगवान टाकीज फ्लाईओवर से उतरते ही बसों को यात्रियों के इंतजार में खड़ा कर दिया जाता था, जिससे यहां पूरे दिन जाम लगा रहता था। इसके खिलाफ आवाजें उठी तो बसों को अब अबूलाला दरगाह के सामने खड़ा किया जाने लगा है। यहां कभी-कभी एक लेन ही बचती है क्योंकि दो लेन में रोडवेज की बसें खड़ी कर दी जाती हैं।
हाईवे से कमला नगर जाने के लिए सर्विस लेन पर उतरने वालों और भगवान चौराहे से सर्विस रोड पर आकर हाईवे पर चढ़ने वालों को मुश्किल हालातों का सामना करना पड़ता है। सुबह से देर शाम तक इस पॊइन्ट पर रोडवेज बस चालकों की मनमानी चलती है। यहां भी इन्हें रोकने और टोकने वाला कोई नहीं।
फ्लाईओवर के बाद भी वाटर वर्क्स चौराहा जाम
वाटर वर्क्स चौराहा पर फ्लाईओवर बन चुका है, लेकिन फिर भी तमाम रोडवेज बसें हाईवे से सर्विस रोड पर उतारकर चौराहे के इस ओर और चौराहे के पार खड़ी कर सवारियों का इंतजार किया जाता है। इस मनमानी की वजह से इस चौराहे पर भी दिन पर यातायात जाम जैसी स्थिति बनी रहती है।
रामबाग फ्लाईओवर का एंट्री पॊइन्ट
यमुना पुल पार होते ही रामबाग फ्लाईओवर शुरू हो जाता है। इस फ्लाईओवर के एंट्री पॊइन्ट पर ही लाइन से तमाम बसें खड़ी हो जाती हैं। एक नहीं, दो-दो लेन घेरकर। इससे इस पॊइन्ट पर पूरे दिन ट्रैफिक रेंग-रेंग कर चलता है, क्योंकि तीन लेन का ट्रैफिक एक लेन से गुजरने पर पीछे लम्बा जाम लगता चला जाता है। इस पॊइन्ट पर रोडवेज बसों के चालक इतनी ढिठाई दिखाते हैं कि आप हॊर्न देते रहिए, वे बस को टस से मस नहीं करते।
यमुना एक्सप्रेसवे का एंट्री पॊइन्ट
कुबेरपुर में यमुना एक्सप्रेसवे के एंट्री पॊइन्ट पर भी यही हालात होते हैं। यहां रोडवेज के साथ ही प्राइवेट बसें भी सवारियों के इंतजार में खड़ी कर दी जाती हैं, जिसकी वजह से कभी-कभी तो यमुना एक्सप्रेसवे पर चढ़ना तक मुश्किल हो जाता है। इस पॊइन्ट पर तो कोई होमगार्ड तक नहीं होता, जिसकी वजह से पूरे दिन ट्रैफिक अस्त-व्यस्त रहता है।
सिकंदरा चौराहा पर भी मनमानी
शहरी क्षेत्र में छठवां पॊइन्ट सिकंदरा चौराहा है, जहां आगरा से मथुरा की ओर जाने वाली बसें चौराहा पार कर हाईवे पर ही खड़ी कर सवारियों का इंतजार किया जाता है। इससे इस चौराहा पर भी ट्रैफिक अस्त-व्यस्त रहता है।
बसों के चालान क्यों नहीं काटे जाते
हैरानी की बात यह है कि शहर में प्रशासन है, पुलिस है। यातायात पुलिस है। रोडवेज के अधिकारी भी हैं, लेकिन कोई भी बस ड्राइवरों की मनमानी पर रोक नहीं लगा पा रहा। हाईवे पर चलते-चलते सवारियों को उतारने और चढ़ाने तक की बात तो समझ में आती है, लेकिन हाईवे पर बसों को घंटों खड़ा कर सवारियों का इंतजार करना कैसे जायज ठहराया जा सकता है। पुलिस हो या यातायात पुलिस, सड़क पर गाड़ी पार्क करने पर आम लोगों के तो चालान काट देती है, लेकिन रोडवेज बसों के चालान क्यों नहीं काटे जाते।
पुलिस, प्रशासन और रोडवेज के अधिकारी क्या दफ्तरों में बैठने के लिए ही हैं। वे दफ्तरों से बाहर निकलकर क्यों नहीं देखते कि हाईवे पर किस कदर जगह-जगह बस अड्डे के रूप में बदल दिया गया है। बसों को बस अड्डे के इतर सड़क पर कैसे खड़ा किया जा सकता है।
डीएम-पुलिस कमिश्नर चाहें तो....
पुलिस कमिश्नर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के लिए तमाम कदम तो उठा रहे हैं, लेकिन हाईवे पर चल रही बस चालकों की मनमानी की ओर उनका भी ध्यान नहीं जा रहा। पुलिस कमिश्नर और आगरा के डीएम चाहें तो रोडवेज के अधिकारियों को बुलाकर पेंच कस सकते हैं, लेकिन उनकी बला से। हाईवे के जाम में वे तो फंसते नहीं हैं। आम लोग परेशान होते हैं तो होते रहें।
दिखावटी कार्रवाई से ज्यादा कुछ नहीं
रोडवेज बस स्टैंड परिसर के अंदर से ही बसों को व्यवस्थित रूप से खड़ा करके सवारियां भरने का स्पष्ट निर्देश है, लेकिन इसके बावजूद चालक और परिचालक मुख्य मार्गों पर मनमाने ढंग से बसें खड़ी करते हैं, मानो उन्हें किसी नियम-कानून का कोई डर ही न हो। हाईवे तथा अन्य सड़कों पर बसों और ऑटो को अवैध रूप से खड़ा रुकने पर आम जनता को भारी असुविधा हो रही है। पुलिस ने कई बार दिखावटी कार्रवाई तो की है, लेकिन इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब अपनी गहरी नींद से जागेंगे और कब इस गंभीर समस्या का कोई ठोस और कारगर समाधान निकालेंगे, ताकि आगरा के आम नागरिकों को इस दैनिक यातायात जाम की पीड़ा से मुक्ति मिल सके?