डीवीवीएनएल फतेहाबाद सर्किल में टेंडर की लूट, अफसर–ठेकेदार गठजोड़ उजागर

आगरा के फतेहाबाद स्थित दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (DVVNL) कार्यालय में लगभग 30 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है। आंतरिक जांच में सामने आया कि 2023-24 से 2025-26 के बीच 128 टेंडरों में गंभीर अनियमितताएं की गईं। इस मामले में 6 अधिकारियों समेत 19 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। अधीक्षण अभियंता रविकांत मिश्रा को निलंबित कर दिया गया है और चार कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हुई है। जांच रिपोर्ट में शिविर सहायक नीरज पाठक को पूरे घोटाले का मुख्य सूत्रधार बताया गया है। DVVNL प्रबंधन ने मामले को गंभीर मानते हुए जीरो टॉलरेंस नीति के तहत आगे भी कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

Jan 12, 2026 - 00:09
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डीवीवीएनएल फतेहाबाद सर्किल में टेंडर की लूट, अफसर–ठेकेदार गठजोड़ उजागर
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ई-टेंडर को दरकिनार कर बांटे गए करोड़ों के काम,6 अफसर समेत 19 पर एफआईआर 

आगरा। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) में अब तक का एक बड़ा टेंडर घोटाला सामने आया है। आगरा के फतेहाबाद स्थित विद्युत वितरण मंडल कार्यालय में बीते तीन वर्षों के दौरान लगभग 29–30 करोड़ रुपये के टेंडरों में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि कुल 128 टेंडरों में नियमों को ताक पर रखकर खेल किया गया, जिनमें 54 टेंडर बिना ई-निविदा पोर्टल पर डाले ही आवंटित कर दिए गए।

इस पूरे प्रकरण में 6 अधिकारियों समेत 19 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। वहीं, अधीक्षण अभियंता रविकांत मिश्रा को निलंबित कर दिया गया है और चार कर्मचारियों पर भी निलंबन की कार्रवाई हुई है। विभागीय और आपराधिक जांच अभी जारी है।

कैसे खुला घोटाले का राज

डीवीवीएनएल प्रबंधन द्वारा की गई इंटरनल समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि फतेहाबाद कार्यालय में कई टेंडर तो दिखाए जा रहे थे, लेकिन उनकी फाइलें अनुमोदन के लिए मुख्यालय तक पहुंची ही नहीं। इस पर प्रबंध निदेशक नितिश कुमार के निर्देश पर मुख्य अभियंता कपिल सिंघवानी से विस्तृत जांच कराई गई, जिसमें घोटाले की परत-दर-परत पोल खुलती चली गई।

जांच में सामने आई चौंकाने वाली गड़बड़ियां

जांच में पाया गया कि कई टेंडर ई-निविदा पोर्टल पर अपलोड ही नहीं किए गए, फिर भी अनुबंध कर दिए गए। जहां 15 लाख की निविदा थी, वहां राशि बढ़ाकर 28 लाख दिखा दी गई। निविदाएं निरस्त दिखने के बावजूद ठेके जारी किए गए। प्रथम/द्वितीय तकनीकी व वित्तीय भाग खोले बिना ही अनुबंध कर दिए गए। निविदा शुल्क व धरोहर राशि की रसीदों में भी हेराफेरी की गई है।  बिना निविदा में प्रतिभाग किए एल-1 दर्शाकर अनुबंध कर दिए गए। जांच में खुलासा हुआ कि 166 टेंडरों में से सिर्फ 43 फाइलें ही कार्यालय में उपलब्ध, बाकी के रिकॉर्ड जानबूझकर नष्ट किए गए। 

तीन वित्तीय वर्षों में खेल

जांच में 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के टेंडरों में अनियमितताएं पाई गईं। लगभग 40 अनुबंध ऐसे हैं ,जिनके लिए निविदा प्रकाशित ही नहीं हुई। 4 अनुबंध, जहां निविदा पोर्टल पर निरस्त थी, लेकिन काम दे दिया गया। 9 अनुबंध, जिनमें निविदा प्रक्रिया पूरी ही नहीं की गई। 29 टेंडरों में दरों, राशि और पीओ में गंभीर गड़बड़ी पाई गई। 

मुख्य सूत्रधार कौन?

जांच रिपोर्ट में स्पष्ट संकेत मिले हैं कि इस पूरे खेल का मुख्य सूत्रधार शिविर सहायक नीरज पाठक है, जिसने ठेकेदारों से मिलीभगत कर इस बड़े घोटाले को अंजाम दिया।

इन फर्मों को मिला सबसे ज्यादा फायदा

मां दुर्गा कंस्ट्रक्शन – ₹4.38 करोड़

सीडीआरएम पॉवर प्रा. लि. – ₹1.24 करोड़

कृष्णा इलेक्ट्रिकल्स एंड कॉन्ट्रैक्टर्स – ₹1.77 करोड़

शिवा इंटरप्राइजेज – ₹3.15 करोड़

रिषी इंटरप्राइजेज – ₹44.31 लाख

रघुवीर कॉन्ट्रैक्टर – ₹6.50 करोड़

चौहान इंटरप्राइजेज – ₹72.51 लाख

आरएस एंटरप्राइजेज – ₹3.88 करोड़

श्री महाकाल इंटरप्राइजेज – ₹1.45 करोड़

न्यूटेक इलेक्ट्रिकल्स – ₹5.76 करोड़

जीरो टॉलरेंस की चेतावनी

प्रबंध निदेशक नितिश कुमार ने साफ कहा है कि डीवीवीएनएल में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति लागू है। इससे पहले भी इटावा और फतेहाबाद में अनियमितताओं पर बड़े अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। इस मामले में भी सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।