श्रीकृष्ण लीला रासोत्सव में दसवें दिन श्रीकृष्ण–सुदामा मिलन लीला ने भाव, भक्ति और प्रेम से भिगोया पंडाल
भक्ति, प्रेम और निष्कपट मित्रता का अनुपम उदाहरण बने श्रीकृष्ण–सुदामा मिलन प्रसंग ने श्री कृष्ण लीला रासोत्सव के दशम दिवस को अविस्मरणीय बना दिया। मंच से उतरकर सीधे हृदय तक पहुंचने वाली इस लीला ने दर्शकों को यह अनुभूति कराई कि सच्ची मित्रता में वैभव नहीं, भाव का महत्व होता है।
आगरा। श्री श्यामा श्याम भागवत आयोजन समिति के तत्वावधान में नवीन गल्ला मंडी परिसर में आयोजित श्री कृष्ण लीला रासोत्सव के दशम दिवस सायंकाल श्रीकृष्ण–सुदामा मित्रता प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण मंचन किया गया। भव्य पंडाल में प्रस्तुत इस लीला ने सच्ची मित्रता, विनम्रता और आत्मीय प्रेम का ऐसा संदेश दिया कि पूरा वातावरण भक्तिरस में डूब गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ठाकुर जी एवं स्वरूपों की विधिवत आरती के साथ हुआ। इसके पश्चात गुरुकुल काल से चली आ रही श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का सजीव चित्रण मंच पर उतरा। निर्धन ब्राह्मण सुदामा की दयनीय स्थिति, पत्नी के आग्रह पर मुट्ठी भर चावल लेकर द्वारिका प्रस्थान और संकोचवश उसे न दे पाने की व्यथा ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
लीला का सबसे मार्मिक क्षण तब आया जब श्रीकृष्ण द्वार पर खड़े अपने बालसखा सुदामा को देखते ही राजवैभव त्यागकर नंगे पांव दौड़ते हुए उन्हें गले लगा लेते हैं। श्रीकृष्ण द्वारा सुदामा के चरण पखारना और प्रेमपूर्वक चावल ग्रहण करने का दृश्य देख श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। “कृष्ण सुदामा की जय” के जयघोष से पूरा पंडाल गूंज उठा।
प्रसंग के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि प्रभु के समक्ष वस्तु का नहीं, भाव का मूल्य होता है। सुदामा द्वारा लाए गए साधारण चावल को श्रीकृष्ण ने प्रेमवश अमूल्य मानते हुए बिना मांगे ही उनकी दरिद्रता हर ली और उन्हें समृद्धि का वरदान दिया।
कलाकारों के सजीव अभिनय, भावपूर्ण संवाद, मधुर भजन, प्रभावशाली प्रकाश एवं ध्वनि संयोजन ने द्वारिका और सुदामा की कुटिया दोनों के दृश्य साकार कर दिए। दर्शक स्वयं को लीला का हिस्सा अनुभव करने लगे।
स्वामी लक्ष्मण जी महाराज एवं स्वामी प्रदीप कृष्ण ठाकुर ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि श्रीकृष्ण–सुदामा प्रसंग जीवन में मित्रता, विनम्रता और निष्कपट प्रेम का महत्व सिखाता है। जहां शुद्ध भाव होता है, वहां स्वयं भगवान कृपा करते हैं।
आयोजन समिति के अध्यक्ष हरी चंद्र अग्रवाल ने बताया कि शुक्रवार को नरसी भात लीला का भावपूर्ण मंचन किया जाएगा। प्रतिदिन की भोजन प्रसादी व्यवस्था अंकुर अग्रवाल द्वारा संभाली जा रही है।
इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिनेश चंद्र गोयल, मंच व्यवस्थापक अनीश अग्रवाल, राजीव गुप्ता, देवेश शाह, ओम प्रकाश अग्रवाल, महावीर मंगल, शैलेंद्र अग्रवाल, नरेश चंद्र, जय प्रकाश अग्रवाल, शंभू नाथ, राज कुमार, सत्य प्रकाश, विक्रांत गोयल, गोपाल गोयल, राकेश अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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