फिलहाल टला पर खत्म नहीं हुआ संकट: क्या अब भी बदल सकता है आगरा कॉलेज का नाम?
आगरा। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर से वैसी कोई घोषणा नहीं हुई, जैसी कि आगरा कॊलेज का नाम बदले जाने की चर्चा थी। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या आगरा कॊलेज का नाम बदले जाने जैसी बात टल गई है या फिर वह प्रस्ताव अभी भी जीवित है, जिसमें नाम बदले जाने की वकालत की गई है।
क्या आने वाले ‘बड़े कार्यक्रम’ में हो सकती है घोषणा?
यह सवाल इसलिए बना हुआ है क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल आगरा में अपने भाषण के दौरान यह भी कहा था कि जल्द ही लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर को समर्पित बड़ा कार्यक्रम आगरा में होगा। तो क्या आगामी कार्यक्रम यह अनुमान लगाने को काफी है कि शासन स्तर पर अभी भी यह प्रस्ताव सक्रिय विचार में है। क्या यह प्रस्तावित कार्यक्रम पूरी तरह सांस्कृतिक होगा या इसमें संस्थानों का नामकरण भी शामिल होगा, यह तो भविष्य बताएगा, लेकिन इतना संकेत मिल रहा है कि यह मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है।
सबसे पहले कॊलेज से ही उठे विरोध के स्वर
आगरा कॉलेज का नाम बदलने की सुगबुगाहट तब शुरू हुई जब यह जानकारी सार्वजनिक हुई कि आगरा कॊलेज का नाम ‘लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर कॉलेज’ रखने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसकी खबर मिलते ही कॉलेज स्टाफ क्लब के बैनर तले सभी शिक्षक विरोध में आ खड़े हुए।
कॉलेज स्टाफ क्लब ने उसी दिन प्राचार्य प्रो. सी.के. गौतम और औटा ( डॊ. भीमराव आंबेडकर विवि- पूर्ववर्ती आगरा विवि टीचर्स एसोसिएशन) के महासचिव संजय कुमार मिश्रा ने मंडलायुक्त और कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार सिंह को विरोध-पत्र सौंपकर स्पष्ट कहा कि आगरा कॉलेज की 200 वर्षों से अधिक पुरानी ऐतिहासिक और शैक्षणिक पहचान से छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी।
आगरा कॊलेज के शिक्षकों का कहना था कि आगरा कॉलेज मात्र एक नाम नहीं, बल्कि आगरा की ऐतिहासिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक है। वर्ष 1823 में स्थापित इस संस्थान का स्वतंत्रता संग्राम, समाज सुधार और आधुनिक शिक्षा आंदोलनों से गहरा नाता रहा है। शिक्षक समुदाय ने नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को को अनुचित, अव्यावहारिक और संस्थान की विरासत के विरुद्ध बताया था।
पीएमओ-सीएमओ तक पहुंच गया था विरोध
आगरा कॊलेज का नाम बदलने के प्रस्ताव का विरोध एक तरफ शिक्षक खुलकर कर रहे थे तो दूसरी ओर सोशल मीडिया पर भी यह प्रस्ताव विरोध के स्वरों के साथ छाया रहा। यहां तक कि तमाम लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए प्रधानमंत्री ऒफिस और यूपी के मुख्यमंत्री ऒफिस तक अपना विरोध दर्ज कराया। माना जा रहा है कि विरोध के स्वर संज्ञान में आने के बाद ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कल आगरा में इसकी घोषणा से बचे।
सीएम ने कुछ नहीं कहा, लेकिन क्या इशारा छोड़ गए
हालांकि जैसी चर्चाएं थीं कि जीआईसी ग्राउंड के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री आगरा कॉलेज के नाम को बदलने की घोषणा कर सकते हैं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। इससे विरोध करने वालों ने अस्थायी राहत की सांस ली, लेकिन मुख्यमंत्री का यह कहना कि बहुत जल्द आगरा में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर को समर्पित बड़ा कार्यक्रम होगा, नए कयासों को जन्म दे गया है। कयास यह लगाए जा रहे हैं कि सीएम का यह कथन क्या यह आने वाले दिनों में किसी बड़ी घोषणा की भूमिका है, जिसमें नाम परिवर्तन जैसे विषय भी शामिल हो सकते हैं।
1823 में हुई थी आगरा कॊलेज की स्थापना
ज्ञातव्य है कि आगरा कॉलेज की स्थापना 1823 में हुई थी और यह देश के प्राचीनतम उच्च शिक्षण संस्थानों में एक है। इसका नाम न केवल शहर की पहचान, बल्कि शैक्षणिक गरिमा का प्रतीक भी है।
नाम बदलने का विरोध सिर्फ परंपरा या भावनात्मक जुड़ाव की बात नहीं है, बल्कि यह सवाल है कि क्या बिना व्यापक संवाद और सहमति के किसी ऐतिहासिक संस्थान की पहचान को बदल उचित है?