टीटीजेड के आगरा समेत पांच जिलों का औद्योगिक भविष्य नौ दिसंबर को तय होना है
एक बार आगरा के औद्योगिक विकास पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। आगरा के ही एक व्यक्ति की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने विगत 14 अक्टूबर 2024 को आगरा के टीटीजेड (आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, एटा और हाथरस जिलों का क्षेत्र) में किसी भी प्रकार का नया उद्योग लगाने पर रोक लगा दी थी। यह रोक नौ दिसंबर 2024 तक के लिए थी। आगरा के उद्यमी इस आदेश पर पुनर्विचार करने का आग्रह कर रहे हैं। नौ दिसंबर की सुनवाई में तय होगा कि आगरा का औद्योगिक भविष्य क्या होगा। उद्यमियों की ओर से इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी सहयोग की अपेक्षा की गई है।
- विगत 14 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने नौ दिसंबर 2024 तक ताज ट्रिपेजियम जोन में नए उद्योग लगाने पर लगाई थी रोक
-उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड के चेयरमैन ने नौ दिसंबर की सुनवाई में एसजी तुषार मेहता से पैरवी कराने का सीएम से किया अनुरोध
-28 साल पहले सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के अनुपालन करती आ रही हैं आगरा की सभी औद्योगिक इकाइयां
-कभी पर्यावरण और वन मंत्रालय के अधिकारी तो कभी टीटीजेड विरोधी शक्तियां औद्योगिक विकास में बाधा खड़ी कर रहीं
एसपी सिंह
आगरा। ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के नाम पर ताज ट्रिपेजियम जोन के आगरा समेत पांच जिलों के औद्योगिक हितों पर एक बार फिर आघात हो रहा है। विगत 14 अक्तूबर 2024 को ही सर्वोच्च न्यायालय के स्तर से टीटीजेड के आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, एटा और हाथरस जिलों में 9 दिसंबर 2024 तक कोई भी नया उद्योग स्थापित करने पर रोक लगाई गई थी। आगामी नौ दिसंबर को होने वाली सुनवाई में तय होना है कि टीटीजेड के पांच जिलों का औद्योगिक भविष्य क्या होगा।
उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड के चेयरमैन राकेश गर्ग ने इस मुद्दे को बहुत गंभीरता के साथ मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया है। राकेश गर्ग ने हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखकर आगरा के औद्योगिक विकास में खड़े किए जा रहे अवरोधों की ओर ध्यान आकर्षित किया है।
राकेश गर्ग ने एमसी मेहता बनाम भारत सरकार एवं अन्य में सुप्रीम कोर्ट द्वारा विगत 14 अक्तूबर 2024 को दिए गए आदेश की ओर ध्यान दिलाते हुए मुख्यमंत्री से कहा है कि एक ओर आप प्रदेश को औद्योगिक प्रगति के मार्ग पर ले जाने को प्रयासरत हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेश का औद्योगिक विकास न हो, इस भावना से सक्रिय शक्तियां सुप्रीम कोर्ट में विभिन्न आईए डालकर औद्योगिक विकास में बाधा उत्पन्न कर रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट का यह था 30 दिसंबर 1996 का आदेश
पत्र में कहा गया है कि वादी अरुण कुमार गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक आईए में कहा है कि एमसी मेहता बनाम भारत सरकार में सुप्रीम कोर्ट द्वारा विगत 30 दिसंबर 1996 को दिए गए आदेश की अवहेलना की जा रही है। श्री गर्ग ने लिखा है कि वादी का कथन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के सर्वथा विपरीत है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्तिगण कुलदीप सिंह और फैजानुद्दीन ने 30 दिसंबर 1996 को दिए अपने आदेश में पृष्ठ संख्या 42 पर कहा है, टीटीजेड के विचाराधीन प्रकरण का उद्देश्य प्रदूषण को रोकना है, वहीं दूसरी ओर उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देना है। दोनों न्यायमूर्तिगणों ने स्पष्ट किया था कि यह पुरानी अवधारणा है कि विकास और ईकोलॊजी साथ-साथ नहीं चल सकती हैं, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
राकेश गर्ग ने अपने पत्र में लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट के 30 दिसंबर 1996 के आदेश में ताज ट्रिपेजियम जोन में केवल और केवल उन उद्योगों को लगाने की अनुमति दी गई, जो नेचुरल गैस का प्रयोग करेंगे। फोसिल फ्यूल का प्रयोग नहीं करेंगे। इन्हें व्हाइट, ग्रीन और ओरेंज श्रेणी के उद्योगों में नहीं बांटा गया। ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया अन्य कोई भी आदेश जिसमें ग्रीन, व्हाइट और ओरेंज आदि श्रेणियों में बांटकर टीटीजेड में उद्योग लगाने के बारे में कहा गया है, 30 दिसंबर 1996 के आदेश के विरुद्ध होने के कारण स्वतः निरस्त हो जाता है।
292 इकाइयों ने 28 साल पहले ही लगा ली थीं गैस भट्ठियां
पत्र में मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया है कि 30 दिसंबर 1996 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के समय तक आगरा में 292 फाउंड्रीज कोक और कोल (फोसिल फ्यूल) पर चलती थीं, उनमें कोक और कोल के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाकर नेचुरल गैस से चलाने का आदेश दिया गया था। इन सभी औद्योगिक इकाइयों ने गैस आधारित क्यूपोला (भट्ठियां) लगा ली थीं जो आज तक कार्यरत हैं।
28 साल से लगते आ रहे हैं उद्योग
सुप्रीम कोर्ट के 30 दिसंबर 1996 के आदेश को 28 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इसी आदेश के क्रम में सुप्रीम कोर्ट की भावना के अनुसार ताज ट्रिपेजियम जोन में फोसिल फ्यूल रहित उद्योग लगते आ रहे हैं। जहां तक ताजमहल की बात है, सुप्रीम कोर्ट के 30 दिसंबर 1996 के आदेश में पृष्ठ संख्या 8 पर नीरी की रिपोर्ट को सम्मिलित कर कहा गया है कि संगमरमर पर जब बारिश होती है तो धूल के कण धुल जाते हैं और फ्रेश मार्बल नजर आता है।
सुप्रीम कोर्ट ने उद्योगों की क्षमता वृद्धि को भी दी थी हरी झंडी
राकेश गर्ग ने वादी अरुण कुमार गुप्ता द्वारा आईए के साथ दाखिल शपथ पत्र में उस कथन को भी गलत बताया है जिसमें उन्होंने कहा है कि पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इसी प्रकरण में 9 जनवरी 1996 को दाखिल किए शपथ पत्र में आगरा में कार्यरत उद्योगों की क्षमता बढ़ाने की अनुमति नहीं दिए जाने की बात कही थी। बकौल राकेश गर्ग, केंद्रीय पर्यावरण सचिव द्वारा यह शपथ पत्र दिए जाने के उपरांत 30 दिसंबर 1996 को सुप्रीम कोर्ट ने विस्तृत आदेश दिया था और पर्यावरण सचिव के उद्योगों की क्षमता बढ़ाने की अनुमति न दिए जाने के निर्णय को अमान्य कर दिया था।
पर्यावरण मंत्रालय ने रोक लगाकर अवमानना की
राकेश गर्ग ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री को अवगत कराया है कि 15 अक्तूबर 2014 को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेट्री सुशील कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में टीटीजेड में नये उद्योगों की स्थापना और स्थापित उद्योगों की क्षमता बढ़ाने पर अवैध तरीके से रोक लगा दी गई थी। यह सुप्रीम कोर्ट के 30 दिसंबर 1996 के आदेश की अवमानना की श्रेणी में आता है। इसके लिए दोषी अधिकारी के विरुद्ध समुचित कार्रवाई होनी चाहिए। यह अवैध रोक लगाकर औद्योगिक विकास ही नहीं रोका गया, बल्कि राजस्व अर्जन पर भी विपरीत असर डाला गया।
पर्यावरण मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी ने उद्योगों पर रोक लगाकर पर्यावरण संरक्षण नियमावली का भी उल्लंघन किया, जिसमें ऐसे फैसलों के लिए गजट नोटिफिकेशन जारी कर आपत्तियां मांगने और उनका निस्तारण करना बाध्यकारी है।
2016 में उद्योगों पर फिर से लगाई गई रोक
8 सितंबर 2016 को एक बार फिर पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के सचिव अजय नारायण झा की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में ताज ट्रिपेजियम जोन में नये उद्योग लगाने, स्थापित उद्योगों की क्षमता बढ़ान पर तदर्थ रोक लगा दी गई। यह तदर्थ रोक भी सुप्रीम कोर्ट के 30 दिसंबर 1996 के आदेश की अवमानना की श्रेणी में आती है और पर्यावरण संरक्षण नियमावली का उल्लंघन करती है।
जब केशो मेहरा ने मांगी जानकारी
पूर्व विधायक केशो मेहरा ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा 15 अक्तूबर 2014 और 8 सितंबर 2016 को आगरा में उद्योगों पर रोक लगाने संबंधी बैठकों की मिनिट्स आफ द मीटिंग की सूचना का अधिकार के अंतर्गत जानकारी मांगी गई तो मंत्रालय की पर्यावरण संरक्षण नियमावली के उल्लंघन की बात सामने आ गई। केशो मेहरा की आरटीआई पर मंत्रालय की ओर से जवाब में बताया गया कि यह केवल मिनिट्स आफ द मीटिंग हैं, मंत्रालय द्वारा कोई गजट नोटिफिकेशन प्रकाशित नहीं कराया गया था।
अरुण गुप्ता पर भी कार्रवाई हो
पत्र में मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया है कि समय समय पर सुप्रीम कोर्ट में आईए डालकर आगरा के औद्योगिक विकास में बाधा खड़ी कर रहे वादी अरुण कुमार गुप्ता पर भी समुचित कार्रवाई की जाए। राकेश गर्ग का कहना है कि अरुण कुमार गुप्ता सुप्रीम कोर्ट को भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास काफी समय से कर रहे हैं। उदाहरण के लिए अरुण गुप्ता कह रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट के 30 दिसंबर 1996 के आदेश की अवमानना हो रही है जबकि सच्चाई यह है कि पिछले 28 सालों में एक भी उद्योग टीटीजेड में फोसिल फ्यूल के आधार पर नहीं लगा है। सरकार सुप्रीम कोर्ट से प्रार्थना करे कि अरुण कुमार गुप्ता पर आर्थिक दंड आरोपित किया जाए।
टीटीजेड के उद्योगों की पैरवी एसजी तुषार मेहता से कराई जाए
लघु उद्योग निगम के चेयरमैन ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि आगामी 9 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट में इस प्रकरण के बारे में होने वाली सुनवाई के दौरान आगरा के उद्योगों की पैरवी भारत सरकार के सालिसीटर जनरल तुषार मेहता से कराई जाए। विगत 14 अक्तूबर 2024 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से आगरा में उद्योगों पर लगी रोक हट सके। सुप्रीम कोर्ट के 30 दिसंबर 1996 के आदेश के अनुरूप टीटीजेड में वे नए उद्योग लगते रहने चाहिए जो फोसिल फ्यूल का प्रयोग नहीं करते। वर्तमान उद्योगों की क्षमता बढ़ाने पर लगी रोक भी हटनी चाहिए।