दो किशोरों के बीच का झगड़ा था और दोनों पक्ष समझौते के लिए राजी हो गए थे तो फिर पुलिस ने एक किशोर का हाथ क्यों तोड़ा, क्या आगरा के थानों में अब कानून नहीं बल्कि वसूली और बर्बरता का राज चल रहा है?
आगरा। आगरा में पुलिस बर्बरता का एक और शर्मनाक मामला सामने आया है। किरावली थाना क्षेत्र की मिढ़ाकुर पुलिस चौकी पर 16 वर्षीय हाईस्कूल छात्र को कथित तौर पर इसलिए बेरहमी से पीटा गया क्योंकि उसके परिजन दस हजार रुपये की अवैध मांग पूरी नहीं कर सके। पुलिस की पिटाई से छात्र के हाथ में फ्रैक्चर हो गया है और अब उसका बोर्ड परीक्षा देना भी संकट में है। मामला सामने आने के बाद डीसीपी पश्चिम आदित्य सिंह ने जांच कराई, जिसमें आरोप सही पाए जाने पर दो दरोगाओं को निलंबित कर दिया गया है।
नानपुर गांव निवासी 16 वर्षीय वशीकरण उर्फ करण, पुत्र नरेंद्र सिंह का गांव के ही कार्तिक पुत्र संजय से विवाद हो गया था। दोनों के बीच मारपीट हुई। इसके बाद कार्तिक के पिता ने मिढ़ाकुर पुलिस चौकी में तहरीर दे दी। दो पुलिसकर्मी गांव में पहुंचकर करन को घर से पकड़कर ले जाने लगे तो परिजनों ने कहा कि वे खुद बच्चे को चौकी ले आएंगे। दोपहर में परिजन करन को लेकर चौकी पहुंचे तो वहां दूसरा पक्ष पहले से मौजूद था।
पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच समझौते की बात बन गई। आरोप है कि चौकी पर मौजूद दरोगाओं ने समझौते के नाम पर करन के पिता से दस हजार रुपये की मांग की। परिजनों द्वारा अपनी बेबसी जताए जाने पर पुलिसकर्मियों ने उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया कि शाम को अपने बच्चे को ले जाना। इसके बाद पुलिस चौकी में करन के साथ जो कुछ हुआ, वह रौंगटे खड़े कर देता है।
परिजनों के अनुसार, जब शाम को वे पुलिस चौकी पर पहुंचे तो करन की हालत खराब थी। पूछने पर उसने बताया कि दरोगा अनुराग ने लात-घूंसों से पेट में मारा, जबकि दरोगा ईशान वर्मा ने डंडों से हाथ पर वार किया।
परिजनों के अनुसार करन का एक हाथ सूजा हुआ और टेढ़ा था। घर वालों के विरोध पर पुलिसकर्मियों ने कहा कि गलती से डंडा लग गया। पुलिस वालों ने इलाज का खर्च देने का भरोसा दिया और चौकी पर समझौता लिखवाकर दोनों पक्षों को छोड़ दिया गया।
डॉक्टरों ने जांच में करन के हाथ में फ्रैक्चर बताया और प्लास्टर की सलाह दी। सोमवार से हाईस्कूल की बोर्ड परीक्षा होने के कारण अब परिजन असमंजस में हैं कि बच्चा परीक्षा कैसे देगा।
आगरा में पुलिस बर्बरता का यह पहला मामला नहीं है। इससे जीवनी मंडी चौकी पर सैंया निवासी नाबालिग को सिर्फ इसलिए पीटा गया क्योंकि वह ऒटो चलाना नहीं जानता था और पुलिस वाले उसे ऒटो लेकर चलने के लिए कह रहे थे। वह तो अपने दोस्त के साथ ऒटो पर आया हुआ था। बहुत बवाल होने पर जब डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने दखल दिया, तब इस मामले में मुकदमा दर्ज हो सका।
इस घटना से भी पहले किरावली थाना में राजू शर्मा को कथित तौर पर हिरासत में रखकर बेरहमी से पीटा गया गया था, जिसमें उसके दोनों पैर में फ्रैक्चर हो गया था। दोषी निलंबित तो हुए, लेकिन इस मामले में आज तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। अब मिढ़ाकुर चौकी में रिश्वत न देने पर छात्र को थर्ड डिग्री का मामला सामने आ गया।
पुलिस अधिकारी शायद जानते थे कि मिढ़ाकुर पुलिस चौकी की घटना भी तूल पकड़ सकती है, इसलिए डीसीपी पश्चिम आदित्य सिंह ने आनन-फानन में दोनों दरोगाओं को निलंबित कर दिया। जनाक्रोश न भड़के, इसलिए वे यह भी कह रहे हैं कि पीड़ित परिवार ने तहरीर दी तो उस पर भी कार्रवाई करेगे।
लगातार सामने आ रहे थर्ड डिग्री के मामलों ने आगरा पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल सिर्फ निलंबन का नहीं है। अगर राजू शर्मा प्रकरण में दोषी पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज हुआ होता, तो क्या मिढ़ाकुर चौकी की यह घटना होती? निलंबन से उस छात्र का भविष्य कैसे लौटेगा, जो हाथ में फ्रैक्चर के कारण बोर्ड परीक्षा नहीं दे पाएगा? क्या थानों में कानून की जगह वसूली और हिंसा का सिस्टम चल रहा है?
यह मामला सिर्फ एक छात्र की पिटाई नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का टेस्ट है।