जुगाड़ के ये मालवाहक वाहन किसी अफसर को दिखते नहीं जो शहर में बेरोकटोक फर्राटा भर रहे हैं?
आगरा। आगरा में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सुप्रीम कोर्ट से निरंतर आदेश पारित हो रहे हैं। सरकारों के स्तर से भी न जाने क्या-क्या जतन किए जा रहे हैं, लेकिन शहर की अथॊरिटी को ये निष्प्रयोज्य वाहन क्यों नहीं नजर आते जो बेरोकटोक जुगाड़ की गाड़ी बनाकर शहर की सड़कों पर दौड़ते हुए धुआं उगल रहे हैं।
शहर का कोई भी कोना लें, निष्प्रयोजित हो चुके दोपहिया वाहनों को माल वाहक वाहनों के रूप में फर्राटा भरते देखा जा सकता है। शहर का व्यस्त एमजी रोड हो या फिर लोहामंडी समेत अन्य घने आबादी क्षेत्र के बाजार, निष्प्रयोज्य दो पहिया वाहनों को माल वाहक वाहनों के रूप में चलता देखा जा सकता है।
जुगाड़ के इन माल वाहक वाहनों में लोहे की सरिया/बड़े-बड़े बोरे, कार्टन समेत अन्य सामान लादकर ट्रैफिक नियमों को तोड़कर दौड़ते देखा जा सकता है। प्रदूषण के नाम पर 15 वर्ष से ज्यादा पुराने हो चुके इन दो पहिया स्कूटर/बाइक के पिछले हिस्से में तख्ते आदि लगाकर माल ढोने के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। जुगाड़ के इन वाहनों का रजिस्ट्रेशन होने का तो सवाल ही नहीं उठता।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी नवीन चंद शर्मा सवाल उठाते हैं कि आरटीओ, ट्रैफिक पुलिस से लेकर सिविल पुलिस और अक्सर शहर की सड़कों से गुजरने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को जुगाड़ के ये माल वाहक वाहन क्यों नहीं दिखते। ये वाहन बेरोकटोक शहर में प्रदूषण फैला रहे है। जाम का कारण बन रहे हैं। स्कूल आते-जाते बच्चे भी इन वाहनों के दमघोंटू धुएं का शिकार होते हैं। ऐसे वाहनों के बीच जाम में फंसने वाले लोगों की हालत दयनीय हो जाती है।