महिलाओं को बच्चा पैदा करने की मशीन समझने वाली सोच बर्दाश्त नहीं, शौकत अली के ‘हम दो हमारे दो दर्जन’ वाले बयान पर यूपी महिला आयोग अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान का तीखा हमला, बोलीं- मुस्लिम महिलाएं ऐसे लोगों का बहिष्कार करें, कानून इन्हें सजा दे
उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान ने एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली के हम दो, हमारे दो दर्जन वाले बयान को मुस्लिम महिलाओं का घोर अपमान बताते हुए अली के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। डॉ. चौहान ने कहा कि इस तरह की सोच महिलाओं को इंसान नहीं, सिर्फ बच्चे पैदा करने की वस्तु मानती है, जो न केवल असंवैधानिक है बल्कि सामाजिक रूप से भी खतरनाक है।
आगरा/लखनऊ। यूपी महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान ने एआईएमआईएम नेता शौकत अली के उस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है, जिसमें उन्होंने मुरादाबाद की एक सभा में कहा था- हम दो, हमारे दो दर्जन। इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
डॉ. बबिता सिंह चौहान ने कहा कि शौकत अली और इनके जैसी मानसिकता रखने वाले लोग अपने ही समाज की महिलाओं का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, ये लोग महिलाओं को बच्चे पैदा करने की मशीन मानते हैं। महिलाओं को वस्तु समझकर इस्तेमाल करने की मानसिकता रखते हैं। चार-चार शादियां सिर्फ ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए करते हैं। महिलाओं की सेहत, उनकी जिंदगी, इन लोगों के लिए कोई मायने नहीं रखती।
उन्होंने मुस्लिम समाज की महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि वे अपने जमीर की आवाज सुनें और इस तरह की सोच रखने वालों के खिलाफ खुलकर सामने आएं। उन्होंने कहा, मुस्लिम समाज की महिलाओं को आगे आकर ऐसे लोगों का बहिष्कार करना चाहिए। बुर्के और नकाब से बाहर निकलकर अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए।
डॉ. चौहान ने यह भी कहा कि भारत एक समावेशी देश है, जहां हर वर्ग को साथ लेकर चलने की परंपरा रही है, लेकिन इस तरह के बयान अशिक्षित और कमजोर वर्ग को गुमराह करते हैं, जिससे महिलाएं सबसे ज्यादा पीड़ित होती हैं। उन्होंने कहा, शौकत अली जैसे लोग बयान देकर निकल जाते हैं, लेकिन उनके शब्दों का असर समाज की महिलाओं और परिवारों पर पड़ता है।
हिजाब और बुर्के वाली महिलाओं के पीएम और सीएम बनाने संबंधी बयानों पर टिप्पणी करते हुए डॊ. बबिता सिंह चौहान ने कहा, पहले अपने घर की महिलाओं को घर की मालकिन बनाइए, उन्हें सम्मान दीजिए। उसके बाद मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बनाने की बात कीजिए।
डॉ. बबिता सिंह चौहान ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि आगरा में जिस मुमताजमहल की याद में ताजमहल बना, उसे भी लगातार बच्चे पैदा कराने की वजह से कम उम्र में मौत के मुंह में पहुंचा दिया गया। बाद में उसकी याद में ताजमहल खड़ा कर दिया गया।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस तरह के बयानों के जरिए डेमोग्राफी बदलने का इरादा है, तो इसे देश का नेतृत्व गंभीरता से देखेगा और उचित कदम उठाएगा।
महिला आयोग अध्यक्ष ने शासन से मांग की है कि शौकत अली के बयान की जांच कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि समाज में महिलाओं के खिलाफ इस तरह की सोच को रोका जा सके।