किरावली थाने में थर्ड डिग्री का मामला: राजू शर्मा की टांगें तोड़ने वाले पुलिसकर्मियों पर उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग में केस दर्ज
आगरा। किरावली थाने में युवक राजू शर्मा को थर्ड डिग्री देकर उसकी दोनों टांगें तोड़ने के मामले ने पुलिस तंत्र की बर्बरता को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है। उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने इस गंभीर प्रकरण में थानाध्यक्ष नीरज कुमार और दो अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। यह कार्रवाई सोशल एक्टिविस्ट नरेस पारस द्वारा भेजी गई शिकायत के आधार पर की गई है। हालांकि, अब तक दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज न होने से पीड़ित परिवार में गहरी निराशा और आक्रोश है।
आगरा के श्रीराम हॉस्पिटल में भर्ती राजू शर्मा ने बताया कि उसे करीब एक घंटे तक लगातार थर्ड डिग्री दी गई। दर्द असहनीय हो गया था, आंखों के सामने अंधेरा छा गया था। वह रहम की भीख मांगता रहा, लेकिन पुलिसकर्मियों के दिल पर कोई असर नहीं हुआ। जिस दिन की वह घटना याद करता है, आज भी सहम जाता है। राजू का कहना है कि यह हादसा वह जीवन भर नहीं भूल पाएगा और उसकी नजरों में पुलिस की छवि हमेशा के लिए धूमिल हो चुकी है।
राजू ने यह भी स्पष्ट किया कि रिटायर्ड फौजी बलबीर सिंह की हत्या के जिस मामले में उसे आरोपी बनाने के लिए टॊर्चर किया गया, उस दिन वह आगरा में मौजूद था। मोबाइल लोकेशन आगरा की होने के बावजूद उसे निर्दयता से पीटा गया। डॉक्टर लगातार दर्द कम करने के लिए पेनकिलर दे रहे हैं, लेकिन कोई असर नहीं हो रहा। दोनों पैरों में प्लास्टर चढ़ा हुआ है और वह फिलहाल चलने-फिरने में पूरी तरह असहाय हो गया है।
पीड़ित के पिता राधेश्याम ने बताया कि बेटे के दोनों पैर टूटने के बाद पुलिस पूरे मामले को दबाने में जुट गई। उनका आरोप है कि थानाध्यक्ष नीरज कुमार ने कहा कि थोड़ी गलती हो गई है, इलाज मैं करा दूंगा, बस किसी से कुछ मत कहना। सबको यही बताना कि बेटा चलते-चलते गिर गया। बेटे की हालत देखकर उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उनका कहना है कि पुलिस ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं। उसके ऊपर भी पांच डंडे तोड़े गए।
राधेश्याम का यह भी आरोप है कि थानाध्यक्ष ने जबरन पैसे देने की कोशिश की और कहा कि बच्चों को कुछ सामान दिलवा देना, लेकिन उन्होंने यह पैसे लेने से साफ इनकार कर दिया। राजू शर्मा का कहना है कि जब तक दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल नहीं भेजा जाता, तब तक उसे न्याय नहीं मिलेगा।