पनवारी कांड से जुड़ी रामनगर की हिंसा में 35 साल बाद 35 दोषी करार, 30 मई को सुनाई जाएगी सजा
आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में 35 साल पुराने जातीय संघर्ष के एक चर्चित मामले में एससी-एसटी विशेष न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 35 आरोपियों को दोषी करार दिया है। यह मामला वर्ष 1990 में सिकंदरा थाना क्षेत्र के पनवारी गांव में एक दलित परिवार की बेटी की शादी के दौरान हुए जातीय बवाल से जुड़ा है, जिसकी चिंगारी बाद में कागारौल क्षेत्र तक जा पहुंची थी।
पनवारी में भड़का था विवाद, पथराव और गोलीकांड में गई थीं जानें
पनवारी गांव में दलित समाज के चोखे लाल जाटव की बेटी मुंद्रा की शादी हो रही थी। विवाद उस समय शुरू हुआ जब बरात के रास्ते को लेकर जातीय तनाव बढ़ गया। तनाव को देखते हुए बरात गांव के बाहरी रास्ते से निकाली गई। लेकिन जब लड़की के घर के पास पहुंची तो तीन ओर से घेरा डाली भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया था। जवाब में पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। इस दिन घटनास्थल पर तत्कालीन एसएसपी कर्मवीर सिंह खुद राइफल हाथ में लेकर मोर्चा संभाले हुए थे।
रामनगर, अकोला में दलित बस्ती पर हमला, आगजनी और हिंसा
इस घटना की प्रतिक्रिया में कागारौल थाना क्षेत्र के रामनगर (अकोला) गांव में दलित बस्ती पर हमला हुआ। लोगों ने कथित तौर पर बड़े पैमाने पर आगजनी और हिंसा को अंजाम दिया। पीड़ितों की शिकायत पर कागारौल थाने में मामला दर्ज हुआ और जांच के बाद 74 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान 22 लोगों की मौत हो चुकी थी। दो अभियुक्त नाबालिग थे जबकि शेष बचे 50 अभियुक्तों पर सुनवाई हुई।
35 दोषी, 15 बरी, पीड़ितों की गवाही बनी अहम कड़ी
सरकारी वकील हेमंत दीक्षित ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान घायलों और चश्मदीदों की गवाही बेहद महत्वपूर्ण रही। अदालत ने आरोपियों को धारा धारा 147, 148, 323, 406, 506 452, 427, और 3 (1) 10 एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी माना है। वहीं 15 लोगों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
30 मई को सुनाई जाएगी सजा
श्री दीक्षित ने बताया कि अदालत ने जिन 35 लोगों को दोषी ठहराया है, उन्हें 30 मई को सजा सुनाई जाएगी। 35 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पीड़ित परिवारों के लिए यह फैसला एक भावनात्मक मोड़ की तरह आया है।