कांग्रेस के तीन बड़े नेताओं को मिली राहत, सत्र न्यायालय ने भी सरकार की अपील खारिज की

आगरा। उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चित रहे 2020 बस प्रकरण में कांग्रेस नेताओं को आखिरकार सत्र न्यायालय से भी बड़ी राहत मिल गई है। अदालत ने सरकार की ओर से दाखिल की गई अपील को खारिज कर विशेष मजिस्ट्रेट एमपी/एमएलए कोर्ट के बरी करने संबंधी आदेश को यथावत रखा। इस फैसले से कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, पूर्व विधायक प्रदीप माथुर और पूर्व एमएलसी विवेक बंसल को एक बार फिर बड़ी राहत मिली है।

Sep 2, 2025 - 14:16
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कांग्रेस के तीन बड़े नेताओं को मिली राहत, सत्र न्यायालय ने भी सरकार की अपील खारिज की
आगरा से सत्र न्यायालय से राहत मिलने के बाद अपने अधिवक्ता रमा शंकर शर्मा के साथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, पूर्व विधायक प्रदीप माथुर। साथ हैं अन्य लोग।

महामारी अधिनियम व आईपीसी धाराओं में दर्ज हुआ था केस

मामले के अनुसार, 19 मई 2020 को थाना फतेहपुर सीकरी में उपनिरीक्षक जितेंद्र कुमार गौतम ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि भरतपुर बॉर्डर से जबरन बसों को उत्तर प्रदेश में प्रवेश दिलाया गया, जबकि उस समय कोविड के कारण इस पर रोक लगी हुई थी। इसी आधार पर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ भादसं की धारा 188, 269 एवं 3/4 महामारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

निचली अदालत से मिली थी पहली राहत

29 अप्रैल 2023 को विशेष मजिस्ट्रेट एमपी/एमएलए कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में कांग्रेस नेताओं को बरी कर दिया था। हालांकि, अभियोजन पक्ष/सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी।

एडीजे-19 ने वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा और अन्य अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने के बाद माना कि निचली अदालत का आदेश सही है। इसलिए, सरकार की अपील को खारिज करते हुए विशेष मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश यथावत रखा गया। इस तरह कांग्रेस नेताओं को दोबारा न्यायिक राहत मिल गई।

राजनीतिक बन गया था मामला

यह प्रकरण उस समय राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन गया था, जब कोविड-19 महामारी के दौर में प्रवासी मजदूरों के लिए बसें उपलब्ध कराने को लेकर कांग्रेस और योगी सरकार आमने-सामने आ गए थे। कांग्रेस नेताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमे को लेकर तब काफी सियासी बयानबाज़ी हुई थी। अब अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस खेमे ने इसे सत्य की जीत बताया है।

SP_Singh AURGURU Editor